अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली जड़ी-बूटी है चित्रक, पाचन से लेकर श्वसन रोगों में लाभकारी
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। भारत में रोग नाश के लिए प्राचीन पद्धति और आयुर्वेद का उपयोग होता आ रहा है, जिसमें कुछ ऐसी चमत्कारी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता है, जिनके फायदों के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं।
पहाड़ों पर आज भी दुर्लभ जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जिनका उपयोग रोगों के लक्षणों को कम करने में होता है। ऐसी ही एक दुर्लभ और बहुत कम मिलने वाली और शक्तिशाली औषधि चित्रक है, जिसे पाचन से जुड़ी बीमारियों के लिए काल माना गया है।
चित्रक एक प्रभावी जड़ी-बूटी है, जिसकी तासीर गर्म होती है और स्वाद कसेला। सालों से चित्रक का उपयोग पेट, जोड़ों, खांसी, डायबिटीज, घाव भरने, याद्दाश्त को तेज करने और त्वचा से जुड़ी अनेक समस्याओं में किया जाता रहा है। इसके प्रमुख औषधीय गुण इसकी जड़ में पाए जाते हैं, जो इसे विशेष रूप से लाभकारी बनाते हैं। चित्रक की जड़ में एंटी-डायबिटिक, एंटी-फंगल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-अल्सर गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को भी कम करने में लाभकारी हैं। यह वात और कफ दोष को संतुलित करने का काम भी करता है।
बच्चों में अक्सर पेट में कीड़े पड़ने की परेशानी रहती है क्योंकि वे बिना हाथ धोए या फिर गंदा खाना खा लेते हैं, जिससे पेट में दर्द और कृमि विकार बढ़ जाते हैं। ऐसे में चित्रक की जड़ का पानी पेट दर्द और कृमि रोगों से बचाव में मदद करता है। दूसरा, अगर जोड़ों में दर्द की परेशानी है या फिर सूजन की परेशानी है, तब भी चित्रक का सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा दर्द में राहत पाने के लिए प्रभावित स्थान पर लेप भी लगाया जा सकता है।
आज की जीवनशैली में त्वचा से संबंधित रोग बहुत जल्दी प्रभावित करते हैं। रक्त में अशुद्धि की वजह से चेहरे पर कील और मुहांसे परेशान करने लगते हैं। कई लोगों को, खासकर गर्मियों में, फोड़े-फुंसी और पुराने त्वचा रोगों की समस्या होने लगती है। ऐसे में चित्रक का लेप प्रभावी तरीके से काम करता है।
इसके साथ ही अगर श्वसन से जुड़े मौसम बदलते ही परेशान करने लगते हैं या सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की वजह से पुरानी खांसी, जुकाम और दमा जैसी समस्याएं आती हैं, तब भी चित्रक का सेवन किया जा सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि किसी भी रोग में इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें।
--आईएएनएस
पीएस/वीसी
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Rajasthan News: राजस्थान में विधायक स्थानीय निधि से विकास को नई दिशा, ग्रामीण विकास मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने किया बड़ा ऐलान
Rajasthan News: राजस्थान में विकास कार्यों को तेजी देने के लिए राजस्थान सरकार लगातार ठोस और दूरदर्शी कदम उठा रही है. इसके तहत ग्रामीण विकास मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर जवाब देते हुए विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है. उनकी यह सोच राज्य सरकार की पारदर्शी और जनहितकारी सोच को दिखाता है.
क्या बोले मंत्री?
ग्रामीण विकास मंत्री ने स्पष्ट किया कि विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना का मुख्य उद्देश्य पूंजीगत प्रकृति के विकासात्मक निर्माण कार्यों को बढ़ावा देना है. इस योजना की मदद से ऐसे स्थायी और उपयोगी कार्य करवाए गए हैं, जिनसे क्षेत्रीय विकास में असंतुलन को दूर करने में मदद मिलेगी. सड़क, भवन, सामुदायिक केंद्र, पेयजल व्यवस्था और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देकर सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई को कम करने का प्रयास कर रही है.
विकास घोषणाओं तक सीमित नहीं!
राजस्थान सरकार की यह सोच बताती है कि विकास सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं है बल्कि उसे जमीन पर उतारने की ठोस रणनीति भी तैयार की गई है. विधायक स्थानीय निधि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने महापुरुषों की प्रतिमा स्थापना के संबंध में भी नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. इसके लिए सदस्यों और अधिकारियों की एक समिति गठित की जाएगी, जो प्राप्त सुझावों पर विचार कर पारदर्शी और संतुलित निर्णय लेने में समर्थ होगी.
ग्रामीण विकास मंत्री श्री किरोड़ी लाल मीणा ने विधानसभा में, शून्यकाल के दौरान ध्यानार्कषण प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कहा कि, विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना का मुख्य उद्देश्य पूंजीगत प्रकृति के, विकासात्मक निर्माण कार्य करवाना हैं ताकि क्षेत्रीय विकास में असंतुलन को दूर किया जा… pic.twitter.com/gt9vRc3FiD
— Government of Rajasthan (@RajGovOfficial) February 19, 2026
विधायक भेजे सुझाव
मंत्री ने बताया कि एक महीने के भीतर कोई भी विधायक अपने सुझाव संबंधित विभाग को भेज सकता है. इसके बाद समिति उन प्रस्तावों पर विचार करेगी. यह प्रक्रिया न सिर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगी बल्कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित करती है.
राजस्थान सरकार का विकास का कदम
राजस्थान सरकार का यह कदम विकास, सांस्कृतिक सम्मान और प्रशासनिक पारदर्शिता का संतुलित उदाहरण है. स्पष्ट है कि सरकार क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक सरोकारों को साथ लेकर आगे बढ़ रही है, जिससे प्रदेश में समग्र और स्थायी विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है.
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