दिल्ली की एक अदालत में इन दिनों संगीत जगत से जुड़ा एक बड़ा कानूनी विवाद चर्चा में है। मशहूर संगीतकार इलैयाराजा और रिकॉर्ड कंपनी के बीच कॉपीराइट को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश पारित किया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सारेगामा इंडिया लिमिटेड ने दायर याचिका में दावा किया है कि कई चर्चित गीत और साउंड रिकॉर्डिंग उसके कैटलॉग का हिस्सा हैं, जिन पर स्वामित्व का अधिकार कंपनी के पास है। सुनवाई के दौरान अदालत ने संगीतकार इलैयाराजा को इन गीतों और रिकॉर्डिंग का उपयोग करने, लाइसेंस देने या उन पर स्वामित्व का दावा करने से फिलहाल रोक दिया है। साथ ही उनके सहयोगियों, एजेंटों और साझेदारों को भी किसी तीसरे पक्ष को अधिकार सौंपने से प्रतिबंधित किया गया है।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया मामला कंपनी के पक्ष में मजबूत प्रतीत होता है और यदि अंतरिम राहत नहीं दी जाती तो कंपनी को अपूरणीय क्षति हो सकती है। अदालत ने संगीतकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जबकि अगली विस्तृत सुनवाई अप्रैल में प्रस्तावित है।
बताया गया कि विवाद तब और तेज हो गया जब कंपनी ने अदालत को सूचित किया कि फरवरी 2026 की शुरुआत में कुछ विवादित गीत अमेज़न म्यूज़िक, आईट्यून्स और जियोसावन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए गए, जहां स्वामित्व का दावा संगीतकार की ओर से किया गया था। दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अदालत ने 1976 से 2001 के बीच फिल्म निर्माताओं के साथ हुए कई असाइनमेंट समझौतों का हवाला दिया, जिनमें साउंड रिकॉर्डिंग और संगीत व साहित्यिक कृतियों के कॉपीराइट कंपनी को हस्तांतरित किए जाने का उल्लेख है।
गौरतलब है कि अदालत ने कॉपीराइट एक्ट 1957 का भी संदर्भ दिया, जिसके अनुसार सामान्यतः फिल्म निर्माता को कॉपीराइट का प्रथम स्वामी माना जाता है, जब तक कि किसी अनुबंध में अन्यथा न कहा गया हो। इसी आधार पर अदालत ने कहा कि इस चरण पर कंपनी के अधिकारों की सुरक्षा आवश्यक है।
यह विवाद 130 से अधिक फिल्मों के संगीत से जुड़ा बताया जा रहा है, जिनमें तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी भाषाओं की फिल्में शामिल हैं। फिल्म और संगीत उद्योग के जानकारों का मानना है कि यह मामला रचनात्मक अधिकारों और व्यावसायिक स्वामित्व के संतुलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
अदालत ने आगे की प्रक्रिया के तहत निर्देश दिया है कि पहले मामला संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष आएगा और उसके बाद उच्च न्यायालय में विस्तृत बहस होगी। इस अंतरिम आदेश के बाद से मनोरंजन उद्योग में कॉपीराइट और लाइसेंसिंग अधिकारों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
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नई दिल्ली में इन दिनों वैश्विक कूटनीति और प्रौद्योगिकी का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के नेता और तकनीकी विशेषज्ञ एक मंच पर जुट रहे हैं। इसी क्रम में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान बुधवार को दिल्ली पहुंचे।
बता दें कि इंडिया एआई इंम्पेट समिट में भाग लेने के लिए उनका यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात उन्नत तकनीक के क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, केंद्रीय ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने हवाईअड्डे पर उनका स्वागत किया। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत और यूएई के बीच रणनीतिक साझेदारी, निवेश, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग तेजी से बढ़ा है, और एआई को दोनों देशों के भविष्य के सहयोग का प्रमुख क्षेत्र माना जा रहा है।
इसी दिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी नई दिल्ली पहुंचे। उनका स्वागत केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने किया। विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि यह दौरा बहुपक्षवाद, सतत विकास और वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।
बता दें कि सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविक, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो और स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज़ शामिल रहे। इसके अलावा गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुन्दर पिचाई से भी उनकी मुलाकात हुई, जिसमें एआई नवाचार और डिजिटल अवसंरचना पर चर्चा हुई।
अन्य देशों के प्रतिनिधियों में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले और स्वीडन की उपप्रधानमंत्री एब्बा बुश भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि यह शिखर सम्मेलन 16 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में नीति निर्माता, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तक और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर एआई के जिम्मेदार उपयोग, नियमन, नवाचार और साझेदारी को बढ़ावा देना है।
भारत लंबे समय से डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्टार्टअप इकोसिस्टम और डेटा-आधारित शासन मॉडल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता रहा है। ऐसे में यह शिखर सम्मेलन देश के लिए तकनीकी नेतृत्व और निवेश आकर्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
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