Canada सैन्य अड्डे पर आग से 4 सैनिकों की मौत, जांच में जुटे 50 अधिकारी
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोमवार को कहा कि देश के एक सैन्य अड्डे पर आग लगने से चार सैनिकों की मौत और 39 अन्य के घायल होने के मामले की जांच के लिए 50 अधिकारियों को तैनात किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि पास में आग लगने की जानकारी होने के बावजूद सैनिकों का प्रशिक्षण जारी क्यों रखा गया। कार्नी ने ओटावा में संसद को संबोधित करते हुए कहा कि अल्बर्टा स्थित ‘कनाडियन फोर्सेज बेस वेनराइट’ में शनिवार को हुई इस त्रासदी की जांच ‘कनाडियन फोर्सेज नेशनल इन्वेस्टिगेशन सर्विस’, ‘रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस’ के सहयोग से कर रही है।
कार्नी के ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में संबोधन से पहले सांसदों ने एक मिनट का मौन रखकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी। विपक्षी दलों के नेताओं ने भी दिवंगत सैनिकों को याद किया। कार्नी ने कहा, ‘‘प्रशिक्षण क्षेत्र में आग धधक रही थी।
तेज हवाओं के कारण आग एक मिनट से भी कम समय में करीब एक किलोमीटर दूर उस स्थान तक पहुंच गई, जहां सैनिक मौजूद थे।’’ उन्होंने बताया कि जांच अधिकारी अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं लगा पाए हैं।
महाराष्ट्र: जालना में आयुष्मान भारत योजना के तहत थैलेसीमिया से पीड़ित दो भाई-बहनों को मुफ्त इलाज मिला
जालना, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के जालना जिले में एक परिवार के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबीपीएम-जय) एक बड़ी राहत बनकर आई है। इस योजना के तहत थैलेसीमिया से पीड़ित दो भाई-बहनों का संजीवनी अस्पताल में मुफ्त इलाज हो रहा है।
जालना के नूतन वसाहत इलाके में रहने वाले संदीप साबले के परिवार के लिए, खून से जुड़ी एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे अपने दो बच्चों के इलाज का खर्च उठाना एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन गया था, हालांकि केंद्र सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजना के तहत मिली चिकित्सा सहायता ने परिवार की मदद की, जिससे वे पूरा आर्थिक बोझ उठाए बिना अपने बच्चों का इलाज जारी रख सके।
साबले के बेटे, संबोधि को लगभग एक साल की उम्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगीं। जांच के बाद पता चला कि उसे थैलेसीमिया है। यह खून से जुड़ी एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें अक्सर नियमित रूप से खून चढ़ाने (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की जरूरत पड़ती है।
शुरुआत में साबले ने अपने बेटे के इलाज के लिए अपनी बचत का इस्तेमाल किया, लेकिन बार-बार होने वाले चिकित्सा खर्चों को उठाना परिवार के लिए धीरे-धीरे मुश्किल होता गया।
इस दौरान डॉक्टरों ने परिवार को आयुष्मान भारत योजना के फायदों के बारे में बताया। इसके बाद इस योजना के तहत संबोधि का इलाज मुफ्त में शुरू हो गया।
परिवार की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब लगभग चार साल बाद उनकी बेटी संघप्रिया को भी थैलेसीमिया होने का पता चला।
दूसरे बच्चे को भी बीमारी का पता चलने के बाद परिवार के सामने दोनों बच्चों के लिए नियमित चिकित्सा देखभाल की व्यवस्था करने की चुनौती आ गई। इसके बाद संघप्रिया का इलाज भी आयुष्मान भारत योजना के दायरे में आ गया।
परिवार के अनुसार, दोनों बच्चों को लगभग हर 21 दिन में खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है, इसलिए उन्हें लगातार चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है।
साबले ने बताया कि इस योजना के तहत मिली स्वास्थ्य सहायता से परिवार का आर्थिक बोझ काफी कम हो गया है और इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि दोनों बच्चों को जरूरी इलाज मिलता रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना ने मुश्किल समय में उनके परिवार को बहुत बड़ी मदद दी है।
उन्होंने आर्थिक तंगी का सामना कर रहे अन्य पात्र परिवारों से भी अपील की कि वे इस योजना के बारे में जानकारी लें और इसके लाभ उठाएं।
--आईएएनएस
एससीएच/वीसी
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