JNU में छात्रों की भूख हड़ताल: MP John Brittas ने राष्ट्रपति और शिक्षा मंत्री से की दखल की मांग
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल सोमवार को 17वें दिन में प्रवेश करने और इसमें शामिल छात्रों की सेहत बिगड़ने का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से हस्तक्षेप का आग्रह किया है। ब्रिटास ने रविवार को राष्ट्रपति और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के निर्वाचित प्रतिनिधियों के निष्कासन के आदेश वापस लेने, मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय (सीपीओ) नियमावली के कथित आपत्तिजनक प्रावधानों को वापस लेने और छात्रों की शिकायतों का शीघ्र समाधान करने की मांग की। ब्रिटास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जेएनयू के छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अब 17वें दिन में प्रवेश कर गई है और इसमें शामिल छात्रों की बिगड़ती सेहत तत्काल हस्तक्षेप की मांग करती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जेएनयू का पूर्व छात्र होने के नाते मैं मौजूदा स्थिति को लेकर बेहद चिंतित हूं।
जिस विश्वविद्यालय ने बहस और असहमति को बढ़ावा दिया, उसे इसके लिए दंडित नहीं करना चाहिए। इसकी लोकतांत्रिक परंपराओं को संरक्षित किया जाना चाहिए और छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय सुना जाना चाहिए।’’ ब्रिटास ने अपने पत्र में कहा कि भूख हड़ताल तीन अक्टूबर को शुरू हुई थी और इसकी वजह विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्र समुदाय की ‘‘वास्तविक और लंबे समय से लंबित चिंताओं’’ का कथित तौर पर समाधान नहीं करना था। उन्होंने कहा कि छात्र संघ के निर्वाचित प्रतिनिधियों के निष्कासन ने गंभीर चिंताएं पैदा की हैं।
ब्रिटास ने लिखा, ‘‘निर्वाचित प्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय से बाहर करने का सीधा असर छात्र संघ के कामकाज पर पड़ता है और इससे उस व्यवस्था को कमजोर किया जाता है, जिसके जरिये छात्र सामूहिक रूप से अपनी शिकायतें सामने रखते हैं।’’ उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय अधिनियम, 1966 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून में सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक जीवन पद्धति को विश्वविद्यालय के बुनियादी सिद्धांतों में शामिल किया गया है। अधिनियम में राष्ट्रपति को विश्वविद्यालय का ‘विजिटर’ नामित किया गया है। माकपा राष्ट्रपति मुर्मू से अधिनियम की धारा आठ के तहत हस्तक्षेप करने और निष्कासन के आदेश वापस लेने, सीपीओ नियमावली के कथित आपत्तिजनक प्रावधानों को हटाने तथा छात्रों की लंबित शिकायतों का तत्काल समाधान करने के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया।
UPSC CDS II Result 2026 for 451 Post
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