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तमिलनाडु में Drug Smuggling पर DMK नेता का TVK सरकार पर आरोप, CM की चुप्पी पर उठाए सवाल

द्रमुक के वरिष्ठ नेता और पार्टी की कानूनी शाखा के उप सचिव आई. परंथामेन ने तमिलनाडु में मादक पदार्थों की तस्करी के मौजूदा मुद्दों को लेकर तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार पर सोमवार को निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के पदाधिकारी सीधे तौर पर मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों में शामिल हैं जबकि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने इस पर “पूरी तरह चुप्पी” साध रखी है। पूर्व विधायक ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मादक पदार्थों की जब्ती और उनसे जुड़ी गिरफ्तारियों से संबंधित नौ मामलों की एक सूची पढ़ी और दावा किया कि इनमें राजनीतिक रूप से बाहरी लोगों के बजाय सीधे तौर पर टीवीके के पदाधिकारी शामिल थे।

परंथामेन ने कहा, “ये सभी नौ लोग टीवीके के पदाधिकारी हैं और नौ आपराधिक घटनाएं हुई हैं। इसलिए, तमिलनाडु के लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से यह संदेह है कि यह तमिलगा वेत्री कषगम है या ड्रग्स वेत्री कषगम?” परंथामेन ने आरोप लगाया कि इन मामलों में से एक में टीवीके के एक पदाधिकारी बूबलन के पास से 137 किलोग्राम मेथामफेटामाइन जब्त किया गया, जिसे तस्करी कर श्रीलंका ले जाया जाना था। परंथामेन ने कानून-व्यवस्था और राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर जवाबदेही की मांग की।

उन्होंने रोम के सम्राट नीरो का उदाहरण देते हुए कहा कि जब रोम जल रहा था, तब वह बांसुरी बजा रहा था। परंथामेन ने कहा, “क्या राज्य सरकार का अस्तित्व भी है? क्या राज्य पुलिस सो रही है?

ये ऐसे सवाल हैं, जो तमिलनाडु के लोगों के बीच उठ रहे हैं।” उन्होंने इस मुद्दे पर द्रमुक के पिछले शासनकाल से तुलना करते हुए दावा किया कि अलग-अलग पुलिस महानिदेशकों के कार्यकाल में मादक पदार्थों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए थे, जिनमें शैक्षणिक परिसरों की व्यापक तलाशी भी शामिल थी। उन्होंने मुख्यमंत्री पर जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं देने और युवाओं के कल्याण तथा अपराध से जुड़े मामलों पर ध्यान देने के बजाय अपने विभागों का प्रभार मंत्रिमंडल के मंत्रियों को सौंपकर प्रशासनिक जिम्मेदारी से पीछे हटने का आरोप लगाया। परंथामेन ने कहा, “मुख्यमंत्री इसलिए भी कुछ नहीं बोल रहे हैं क्योंकि मादक पदार्थों की बरामदगी के मामलों में टीवीके के पदाधिकारी शामिल हैं।”

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शारदीय नवरात्र में 3.81 लाख श्रद्धालुओं ने किए Vaishno Devi के दर्शन

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही और 11 अक्टूबर से अब तक 3.81 लाख से अधिक भक्त माता के दर्शन कर चुके हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि दशहरे के अवसर पर श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।

मंदिर के आधार शिविर कटरा में मौसम साफ रहने और उत्सव का माहौल होने के बीच यात्रा सुचारू रूप से जारी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘शारदीय नवरात्र के दौरान सोमवार दोपहर दो बजे तक 3.81 लाख श्रद्धालु त्रिकूटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा के दर्शन कर चुके हैं।’’ शारदीय नवरात्र वर्ष में मनाए जाने वाले दो प्रमुख नवरात्र उत्सव में से एक है। दूसरा चैत्र नवरात्र है।

शारदीय नवरात्रि का आयोजन शरद ऋतु में सितंबर-अक्टूबर के दौरान होता है। अधिकारियों के अनुसार, नवरात्र के पहले आठ दिनों में 3.62 लाख श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए, जबकि सोमवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में मत्था टेका। आंकड़ों के अनुसार, 11 अक्टूबर को कुल 47,574 श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए।

इसके बाद 12 अक्टूबर को 48,400 श्रद्धालुओं, 13 अक्टूबर को 46,558 श्रद्धालुओं, 14 अक्टूबर को 41,961 और 15 अक्टूबर को 39,951 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। वहीं, 16 अक्टूबर को 41,750 श्रद्धालु मंदिर पहुंचे, जबकि 17 अक्टूबर को 48,500 श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में मत्था टेका। 18 अक्टूबर को 47,700 श्रद्धालुओं ने यात्रा के लिए पंजीकरण कराया।

अधिकारियों ने बताया कि सोमवार दोपहर तक 20,000 से अधिक श्रद्धालु माता के भवन की ओर रवाना हो चुके हैं। दशहरे के अवसर पर श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की उम्मीद है। परंपरागत रूप से इस उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर परिसर स्थित यज्ञशाला में प्रार्थनाओं और वैदिक अनुष्ठानों के साथ आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ सोमवार को नौवें दिन जारी रहा। माता के दरबार, यात्रा मार्ग और कटरा शहर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने के लिए कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं जिनमें निःशुल्क घोड़ा और बैटरी चालित वाहन सेवा, प्राथमिकता के आधार पर दर्शन तथा सहायता के लिए विशेष केंद्र शामिल हैं। इसके अलावा, यात्रा मार्ग पर पेयजल, स्वच्छता और चिकित्सा सहायता जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मार्ग के प्रमुख स्थानों पर आपातकालीन सहायता दल भी तैनात किए गए हैं।

जम्मू में अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को भारी भीड़ के बीच दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने माता काली मंदिर में दर्शन किए। यह मंदिर लोकप्रिय रूप से ‘बावे वाली माता’ के नाम से जाना जाता है। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता, विपक्ष के नेता एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा तथा पंजाबी अभिनेत्री प्रीति सप्रू ने भी मंदिर में दर्शन किए।

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  Sports

Virender Sehwag Birthday: पूर्व क्रिकेटर Virender Sehwag का 48वां जन्मदिन, Team India के लिए बनाए ऐतिहासिक रिकॉर्ड

भारतीय पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग का आज यानी की 20 अक्टूबर को अपना 48वां जन्मदिन मना रहे हैं। क्रिकेट की दुनिया में सहवाग को 'नजफगढ़ का नवाब' और 'मुल्तान का सुल्तान' भी कहा जाता है। वह भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज हैं। उनकी छवि ऐसे धाकड़ खिलाड़ी की रही हैं, जिन्होंने लाल गेंद के प्रारूप यानी टेस्ट क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी का पैमाना अपनाया था। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर भारतीय पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

दिल्ली के नजफगढ़ में 20 अक्टूबर 1978 को वीरेंद्र सहवाग का जन्म हुआ था। उनके पिता कृष्ण सहवाग अनाज का व्यापार करते थे। उनकी मां का नाम कृष्णा सहवाग हैं। अरोड़ा विद्या स्कूल से 12वीं पास करने के बाद उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने विकासपुरी में स्थित क्रिकेट कोचिंग सेंटर में कोच एएन शर्मा से क्रिकेट के नियम-कायदे सीखे थे।

वनडे डेब्यू

वीरेंद्र सहवाह ने पाकिस्तान के खिलाफ साल 1999 में पहला वनडे मैच खेला था। इसमें उन्होंने महज 1 रन बनाया। उन्होंने अपने 3 ओवर में 35 रन लुटा दिए। डेब्यू में खराब प्रदर्शन के बाद उनको टीम से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद दूसरे मैच के लिए एक साल का इंतजार करना पड़ा था। उनका करियर चौथे वनडे से चमका, जब उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 58 रन बनाए और 3 विकेट भी लिए थे।

टेस्ट मैच में डेब्यू

सहवाग का टेस्ट डेब्यू बेहद धमाकेदार रहा था। साल 2001 में वीरेंद्र सहवाग ने नंबर 6 पर बल्लेबाजी करने उतरे और 105 रन बनाए। उन्होंने सचिन के साथ 220 रनों की अहम साझेदारी की थी। हालांकि यह मैच इंडिया टीम हार गई। फिर अपने छठे टेस्ट मैच में सहवाग ने डेब्यू किया। सहवाग ने पहले दो टेस्ट मैचों में 84 और 106 रन की पारी खेलकर ओपनर के रूप में टीम इंडिया में अपनी जगह बनाई।

जीते दो वर्ल्डकप

बता दें कि वीरेंद्र सहवाग ने अपने क्रिकेट करियर में 3 वनडे और एक टी20 वर्ल्ड कप खेला था। साल 2003 में सहवाग वीरेंद्र सहवाग वर्ल्ड कप फाइनल खेले, जहां पर भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा। साल 2007 में भारतीय टीम लीग राउंड से बाहर हो गई। फिर साल 2011 में टीम इंडिया वर्ल्ड कप जीती, जिसमें सहवाग ने 47.50 के औसत के साथ 380 रन बनाए।

31 बार जीता 'मैन ऑफ द मैच का अवॉर्ड'

वहीं वीरेंद्र सहवाग ने 31 बार मैन आफ द मैच का अवार्ड जीता था। इस लिस्ट में सहवाह सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली से पीछे हैं। फिर साल 2008 और 2009 में सहवाग पहले भारतीय बने, जिनको 'विजडन लीडिंग क्रिकेटर' का सम्मान मिला था। वीरेंद्र सहवाग ने अपना ज्यादातर करियर ओपनर के रूप में बिताया था। हालांकि शुरूआत में वह मध्यक्रम के बल्लेबाज थे। साल 2002 में सौरव गांगुली ने मध्यक्रम में जगह न होने की वजह से ओपनिंग करने के लिए कहा।

सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड

वीरेंद्र सहवाग के नाम वनडे क्रिकेट में सबसे तेज शतक बनाने का रिकॉर्ड था। साल 2013 में विराट कोहली ने सहवाग का रिकॉर्ड तोड़ा था। वहीं सहवाग अपने शतह को बड़े स्कोर में बदलने की कोशिश करते रहे। उन्होंने 11 बार शतक को 150 से ऊपर पहुंचाया। वहीं साल 2011 के विश्व कप में वीरेंद्र सहवाग ने 5 बार पहली गेंद पर चौका लगाया।

Tue, 20 Oct 2026 11:04:00 +0530

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