Responsive Scrollable Menu

Ranji Trophy: सरफराज खान ने ठोका 18वां शतक, टीम इंडिया के सेलेक्टर्स को फिर दिया करारा जवाब

Ranji Trophy: रणजी ट्रॉफी 2026-27 के दूसरे राउंड में सरफराज खान के बल्ले से एक शानदार पारी देखने को मिली. मुंबई की ओर से खेलते हुए उन्होंने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ शतक जड़ा.

Continue reading on the app

रिश्वतखोरी की जांच के लिए पूर्व मंजूरी जरूरी नहीं: Supreme Court

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत, किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर रिश्वत मांगने के मामले की जांच के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह कृत्य आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़ा हुआ नहीं है। न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने 16 अक्टूबर को दिए गए अपने फैसले में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। इस फैसले के जरिए, पीठ ने राजस्थान पुलिस के एक कांस्टेबल की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप तय किए जाने को चुनौती दी थी।

पीठ के लिए फैसला लिखते हुए, न्यायमूर्ति अंजारिया ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें कांस्टेबल तेजाराम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत आरोप तय करने वाली अधीनस्थ अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। अधिनियम की धारा 7 (2018 में संशोधित), उन लोक सेवकों को दंडित करने का प्रावधान करती है जो अपने सार्वजनिक कर्तव्यों का अनुचित या बेईमानी से पालन करने के लिए कोई गैर-वाजिब लाभ प्राप्त करते हैं, या इसे हासिल करने का प्रयास करते हैं। शीर्ष अदालत ने कांस्टेबल के इस बचाव को खारिज कर दिया कि लोक सेवकों द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान लिए गए निर्णयों या की गई अनुशंसा से जुड़े कुछ अपराधों की जांच या पूछताछ के लिए, अधिनियम की धारा 17ए के तहत जांच एजेंसी ने पूर्व अनुमति नहीं ली थी।

धारा 17ए उन अपराधों की जांच या पूछताछ से संबंधित है, जो लोक सेवकों द्वारा अपने आधिकारिक कार्यों या कर्तव्यों का पालन करते समय की गई अनुशंसा या लिए गए निर्णयों से संबंधित हैं। विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए, इस निर्णय में कहा गया कि धन का दुरुपयोग, खातों में हेराफेरी, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और रिश्वत लेने जैसे अपराध इस प्रावधान के दायरे से बाहर हैं। अधिनियम की धारा 17ए के लागू होने के दायरे और विस्तार के संबंध में दिए गए फैसलों से कानून की एक स्पष्ट स्थिति सामने आती है।

इस धारा के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच या पूछताछ शुरू करने से पहले पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है। न्यायालय के निर्णय के अनुसार, ‘‘इस प्रावधान की भाषा ही इसके लागू होने के दायरे को तय और सीमित करती है। इस धारा में सबसे महत्वपूर्ण वाक्य आधिकारिक कार्यों या कर्तव्यों का निर्वहन है।’’ हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि कानून बनाने वाली संस्था (विधायिका) का मकसद धारा 17ए को कानून में शामिल करके लोक सेवक को मुकदमे से बचाना था।

इस बात को ध्यान में रखते हुए कि इस धारा को ‘‘सर्वव्यापी’’ नहीं माना जा सकता, निर्णय में कहा गया है, ‘‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के प्रावधान लागू होने के लिए, किसी लोक सेवक द्वारा कोई निर्णय लिया जाना या ‘अनुशंसा’ आवश्यक है, जिनके खिलाफ जांच या पूछताछ शुरू की जानी है।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘इस तरह का निर्णय या अनुशंसा , किसी लोक सेवक द्वारा अपने आधिकारिक कार्यों या कर्तव्यों का पालन करते समय लिया गया निर्णय या की गई अनुशंसा होगी।’’ मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, तेजाराम राजस्थान के सिरोही में पुलिस उपाधीक्षक के कार्यालय में तैनात था। एक सहकर्मी कांस्टेबल, देवेंद्र कुमार ने 22 अप्रैल 2021 की एक ईमेल शिकायत में आरोप लगाया कि तेजाराम ने पुलिस अधीक्षक की ओर से 1.5 लाख रुपये की मांग की। चार जून 2021 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7ए और भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई।

तेजाराम को एक सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद आठ दिसंबर 2023 को अधिनियम की धारा 19 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद, 19 जनवरी 2024 को आरोपपत्र दाखिल किया गया। राजस्थान के पाली में एक विशेष अदालत ने 12 सितंबर 2024 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत आरोप तय किए।

तेजाराम ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसने 26 मार्च 2025 को उसकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उसने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

Continue reading on the app

  Sports

Rajasthan के Sachin Yadav और Karan Lamba ने ठोके 194 रन Railways के खिलाफ 338 रन की साझेदारी

रणजी ट्रॉफी में राजस्थान और रेलवे के बीच खेले जा रहे मुकाबले के दूसरे दिन ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे क्रिकेट फैंस लंबे समय तक याद रख सकते हैं। राजस्थान के बल्लेबाज सचिन यादव और करण लांबा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 194-194 रन बनाए, लेकिन दोनों ही खिलाड़ी दोहरे शतक से केवल 6 रन दूर रह गए। दोनों का एक ही स्कोर पर आउट होना इस मुकाबले का सबसे खास संयोग बन गया।

जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेले जा रहे ग्रुप डी के इस मुकाबले में राजस्थान ने दूसरे दिन सुबह 247 रन पर 2 विकेट से आगे खेलना शुरू किया। सचिन और करण ने अपनी शानदार बल्लेबाजी जारी रखी और रेलवे के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया। दोनों के बीच 338 रन की बड़ी साझेदारी हुई, जिसने राजस्थान को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि, सचिन के आउट होने के बाद मेजबान टीम की पारी लड़खड़ा गई और पूरी टीम 497 रन बनाकर आउट हो गई।

सचिन यादव ने अपनी 194 रन की पारी के लिए 358 गेंदों का सामना किया। इस दौरान उन्होंने 22 चौके और 4 छक्के लगाए। दूसरी ओर, अपना 11वां फर्स्ट क्लास मुकाबला खेल रहे करण लांबा ने केवल 284 गेंदों पर 194 रन बनाए। उनकी पारी में 19 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। करण ने इस दौरान अपना तीसरा रणजी शतक भी पूरा किया। दोनों बल्लेबाजों ने धैर्य और आक्रामकता के बीच अच्छा तालमेल दिखाया।

सुबह नई गेंद आने के बाद बल्लेबाजों को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रेलवे के गेंदबाजों ने किनारे लगवाने में सफलता हासिल की, लेकिन खराब क्षेत्ररक्षण के कारण टीम कुछ आसान मौके गंवा बैठी। इसका फायदा राजस्थान के बल्लेबाजों को मिला। शुरुआती दबाव से निकलने के बाद सचिन और करण ने खुलकर रन बनाए और रेलवे के गेंदबाजी आक्रमण को थका दिया। सचिन स्टंप आउट हुए, जबकि करण पॉइंट पर कैच दे बैठे।

दोनों बल्लेबाज कई वर्षों से राजीव गांधी क्रिकेट अकादमी में साथ अभ्यास करते रहे हैं। करण ने बताया कि लंबे समय से साथ खेलने के कारण दोनों एक-दूसरे की ताकत और खेल को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने यह भी माना कि दोहरे शतक से चूकने का थोड़ा अफसोस जरूर था, लेकिन वह इस बारे में बहुत ज्यादा नहीं सोच रहे थे। करण के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट में बल्लेबाजी के लिए इतनी अच्छी पिच कम ही मिलती है और उन्होंने लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की कोशिश की।

दिन के आखिरी सत्र में राजस्थान के गेंदबाजों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। पदार्पण कर रहे तेज गेंदबाज दानिश भांबू ने सटीक गेंदबाजी की, जबकि चेतन शर्मा और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकाश सिंह ने उनका साथ दिया। बाएं हाथ के स्पिनर मोहित चांगड़ा ने सलामी बल्लेबाज विवेक सिंह को पगबाधा आउट कर रेलवे को पहला झटका दिया।

दिन का खेल समाप्त होने तक रेलवे ने 1 विकेट पर 46 रन बना लिए थे और वह राजस्थान से 451 रन पीछे है। ऐसे में मुकाबले में वापसी करने के लिए रेलवे के बल्लेबाजों को अगले दिन बड़ी साझेदारियां करनी होंगी।

Mon, 19 Oct 2026 22:45:00 +0530

  Videos
See all

Top Headlines Of The Day: Tiger Shroff Firing Case | Saurav Das | CJP News | Dussehra #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-20T01:34:20+00:00

मुख्यमंत्री Manik Saha ने मंडई में दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचकर लिया आशीर्वाद | #Tripura #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-20T01:38:56+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers