Responsive Scrollable Menu

एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा और भ्रामक लेबल को लेकर जेप्टो और तीन कंपनियों को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई ने सोमवार को कहा कि उसने खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग और विज्ञापन दावों से संबंधित कथित उल्लंघनों के लिए जेप्टो और खाद्य व्यवसाय संचालकों हेल्दीहे फूड्स एलएलपी, बेकलाइट फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड और बीएमएस लाइफसाइंस को नोटिस जारी किए हैं, साथ ही स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही को भी मंजूरी दी है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कहा है कि उसने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के प्रयासों के तहत कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

नियामक ने जेप्टो मार्केटप्लेस प्राइवेट लिमिटेड को एक नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। यह बेसन के दो पैकेट की डिलीवरी से जुड़ी एक शिकायत के संबंध में है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यह पैकेट एक्सपायर थे।

एफएसएसएआई के अनुसार, इन उत्पादों पर यूज बाय: 12 सितंबर 2026 लिखा हुआ था और आरोप है कि इनकी डिलीवरी एक्सपायरी तारीख बीत जाने के बाद की गई। नियामक ने जेप्टो को निर्देश दिया है कि वह इस शिकायत की जांच करे और ऑर्डर, डिलीवरी, वेयरहाउस, विक्रेता और उत्पाद से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराए।

इसके अलावा, एफएसएसएआई ने हेल्दीहे फूड्स एलएलपी को उसके हेल्दीहे न्यूट्रिशन नेचुरल क्रैनबेरी एक्सट्रैक्ट 25 प्रतिशत कैप्सूल से संबंधित कथित भ्रामक दावों के लिए नोटिस जारी किया है। नियामक ने कहा कि उसे उत्पाद लेबल पर रंग संबंधी घोषणाओं में खामियां मिलीं और मूत्र मार्ग स्वास्थ्य में सहायक जैसे दावों को रोग-जोखिम कम करने वाले दावे के रूप में पहचाना गया, जबकि इनके लिए एप्रूवल की आवश्यकता होती है।

इसके अलावा, एफएसएसएआई ने बेकलाइट फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड को भी ब्लिंकइट और जेप्टो जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेचे जाने वाले उसके मालपानीज बेक-लाइट पुणेरी क्रीम रोल के लेबलिंग और मार्केटिंग को लेकर नोटिस जारी किया है। नियामक के अनुसार, उत्पाद की सामग्री सूची में परिष्कृत गेहूं का आटा, हाइड्रोजनीकृत वनस्पति वसा, मार्जरीन और चीनी शामिल हैं, लेकिन इसमें दूध, दूध वसा, क्रीम या अन्य डेयरी सामग्री नहीं है।

एफएसएसएआई ने कहा कि क्रीम रोल और क्रीमी जैसे शब्दों का प्रयोग और क्रीमी फिलिंग दर्शाने वाली छवियों का उपयोग उपभोक्ताओं को उत्पाद की संरचना के बारे में गुमराह कर सकता है।

एक अन्य कार्रवाई में, नियामक ने बीएमएस लाइफसाइंस को उसके एचएओजी के क्रैनबेरी यूरिनरी ट्रैक्ट हेल्थ कैप्सूल पर कथित भ्रामक दावों के संबंध में नोटिस जारी किया।

एफएसएसएआई ने कहा कि उत्पाद का विपणन एक समाप्त हो चुके पंजीकरण प्रमाण पत्र के तहत किया जा रहा था और इसमें मूत्र पथ के संक्रमण, गुर्दे के स्वास्थ्य और रोग निवारण से संबंधित दावे किए गए थे जिनके लिए एप्रूवल की आवश्यकता होती है।

इस बीच, एफएसएसएआई ने कहा कि स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड के अनार के रस उत्पाद पर कथित भ्रामक दावों के संबंध में कार्यवाही को मंजूरी दे दी गई है।

नियामक ने कहा कि उत्पाद में 4 प्रतिशत अनार के रस का सांद्रण और 12 प्रतिशत सेब के रस का सांद्रण है, जबकि इसकी ब्रांडिंग और छवि इसकी संरचना के बारे में भ्रामक धारणा पैदा कर सकती है।

नियामक के अनुसार, निरीक्षण, नमूनाकरण और लेबल की जांच के बाद कंपनी का स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया, जिसके बाद न्यायिक कार्यवाही शुरू की गई।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

CM Yogi की इस योजना से संवर रही ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, हर महीने खाते में आ रहे 4 हजार; ऐसे करें आवेदन

UP News: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अब बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाना पहले के मुकाबले आसान हो रहा है. गांव के लोगों को पैसे निकालने, जमा करने और सरकारी योजनाओं की राशि प्राप्त करने के लिए दूर-दराज के कस्बों या शहरों में जाने की जरूरत कम हो रही है. इसमें योगी सरकार की बीसी सखी योजना अहम भूमिका निभा रही है. इस योजना के तहत गांव की महिलाओं को बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में काम करने का अवसर दिया जाता है. इससे ग्रामीणों को घर के पास बैंकिंग सेवाएं मिलती हैं, वहीं महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलता है.

क्या है बीसी सखी योजना?

बीसी सखी योजना का पूरा नाम बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी योजना है. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं को लोगों के घर तक पहुंचाना है. इसके तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बैंकिंग प्रतिनिधि के तौर पर काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है.

प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं गांव में ही लोगों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराती हैं. इनमें खाते से पैसे निकालना, पैसे जमा करना, रकम ट्रांसफर करना और सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता की राशि निकालने जैसी सुविधाएं शामिल हैं.

बुजुर्गों को पेंशन निकालने और किसानों को सम्मान निधि की रकम प्राप्त करने में भी इनकी मदद मिल सकती है. इससे ग्रामीणों का समय और आने-जाने का खर्च बचता है. साथ ही, गांव में डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा मिलता है.

पहले छह महीने हर महीने मिलते हैं 4,000 रुपये

बीसी सखी योजना के तहत चयनित महिलाओं को काम शुरू करने के शुरुआती छह महीनों तक हर महीने 4,000 रुपये मानदेय देने का प्रावधान बताया गया है. इससे महिलाओं को शुरुआती दिनों में आर्थिक सहारा मिलता है और वे अपना काम व्यवस्थित कर सकती हैं.

इसके अलावा, बैंकिंग सेवाएं देने के लिए जरूरी उपकरण खरीदने के वास्ते 50,000 रुपये की सहायता का भी उल्लेख किया जाता है. इन उपकरणों में स्मार्टफोन, फिंगरप्रिंट स्कैनर और माइक्रो एटीएम जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं.

शुरुआती छह महीने पूरे होने के बाद महिलाओं की कमाई बैंकिंग लेनदेन पर मिलने वाले कमीशन से जुड़ जाती है. यानी उनकी आय इस बात पर निर्भर कर सकती है कि वे कितने लेनदेन करती हैं और संबंधित बैंक के नियम क्या हैं.

हालांकि, मानदेय और उपकरणों के लिए मिलने वाली राशि की मौजूदा शर्तों की आधिकारिक सूचना से पुष्टि करना जरूरी है. इसे सभी आवेदकों के लिए बिना शर्त मिलने वाली राशि नहीं मानना चाहिए.

कौन महिलाएं कर सकती हैं आवेदन?

बीसी सखी योजना में शामिल होने के लिए महिलाओं को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं. आवेदन से पहले इन पात्रता मानदंडों को समझना जरूरी है.

  • उम्र: महिला की आयु 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए. उम्र संबंधी वर्तमान शर्तों की आधिकारिक विज्ञप्ति से पुष्टि करें.
  • शैक्षिक योग्यता: महिला का कम से कम 10वीं पास होना जरूरी बताया गया है.
  • स्वयं सहायता समूह: महिला का राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन या संबंधित राज्य मिशन के तहत पंजीकृत स्वयं सहायता समूह का सक्रिय सदस्य होना जरूरी है.
  • मोबाइल की जानकारी: आवेदक को एंड्रॉयड मोबाइल चलाना और जरूरी डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल करना आना चाहिए.
  • स्थानीय निवासी: महिला उसी ग्राम पंचायत की निवासी होनी चाहिए, जहां के लिए वह बीसी सखी बनना चाहती है.

इन शर्तों को पूरा करने वाली महिलाएं संबंधित भर्ती या चयन प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकती हैं.

आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?

आवेदन करते समय कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रखने चाहिए, ताकि फॉर्म भरने में परेशानी न हो. इनमें मुख्य रूप से ये दस्तावेज शामिल हो सकते हैं:

1. आधार कार्ड.
2. 10वीं कक्षा की अंकतालिका या प्रमाण पत्र.
3. स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्यता का प्रमाण.
4. आधार से लिंक बैंक खाते की पासबुक की प्रति.
5. उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र.
6. पासपोर्ट साइज फोटो.
7. चालू मोबाइल नंबर.

दस्तावेजों की सूची भर्ती के नोटिफिकेशन के अनुसार अलग हो सकती है. इसलिए आवेदन करने से पहले जारी दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए.

मोबाइल से कैसे करें बीसी सखी योजना में आवेदन?

बीसी सखी के लिए आवेदन प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जा सकती है. इसके लिए सबसे पहले आधिकारिक आवेदन व्यवस्था और वर्तमान भर्ती की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए.

आवेदन करने के सामान्य चरण इस प्रकार हैं:

पहला चरण: गूगल प्ले स्टोर पर बीसी सखी से संबंधित आधिकारिक ऐप उपलब्ध होने पर उसे डाउनलोड करें. ऐप की पहचान और सरकारी स्रोत की पुष्टि जरूर करें.

दूसरा चरण: ऐप में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी के जरिए उसका सत्यापन करें.

तीसरा चरण: आवेदन फॉर्म में अपना नाम, पिता या पति का नाम, ग्राम पंचायत, स्वयं सहायता समूह और शैक्षिक योग्यता से जुड़ी जानकारी भरें.

चौथा चरण: मांगे गए दस्तावेजों की साफ तस्वीरें या स्कैन कॉपी अपलोड करें.

पांचवां चरण: सभी जानकारियों को अच्छी तरह जांचने के बाद फॉर्म जमा करें. आवेदन संख्या मिलने पर उसे सुरक्षित रख लें.

इसके बाद चयन प्रक्रिया के तहत पात्र महिलाओं को आगे की जानकारी दी जा सकती है. जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षण, परीक्षा या अन्य निर्धारित चरणों को पूरा करना होगा.

ध्यान रखें कि आवेदन का तरीका और चयन प्रक्रिया समय के साथ बदल सकती है. इसलिए केवल आधिकारिक ऐप, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन या संबंधित सरकारी विभाग की सूचना पर भरोसा करें.

गांव में रोजगार और बैंकिंग सुविधा

बीसी सखी योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के साथ गांवों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का माध्यम है. इससे खासकर बुजुर्गों, किसानों और उन लोगों को सुविधा मिल सकती है, जिन्हें बैंक तक पहुंचने में परेशानी होती है.

महिलाओं को अपने गांव में रहकर काम करने का अवसर मिलता है और उनकी आर्थिक भागीदारी भी बढ़ती है. हालांकि, आवेदन करने से पहले पात्रता, उपलब्ध रिक्तियों, मानदेय और उपकरणों के लिए सहायता से जुड़ी शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूर कर लें. इससे गलत जानकारी या किसी अनधिकृत ऐप के जरिए आवेदन करने से बचा जा सकता है.

यह भी पढ़ें: UP News: यूपी में आज भी रहेगा अवकाश, इस दिन से खुलेंगे दफ्तर और स्कूल

Continue reading on the app

  Sports

Rajasthan के Sachin Yadav और Karan Lamba ने ठोके 194 रन Railways के खिलाफ 338 रन की साझेदारी

रणजी ट्रॉफी में राजस्थान और रेलवे के बीच खेले जा रहे मुकाबले के दूसरे दिन ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे क्रिकेट फैंस लंबे समय तक याद रख सकते हैं। राजस्थान के बल्लेबाज सचिन यादव और करण लांबा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 194-194 रन बनाए, लेकिन दोनों ही खिलाड़ी दोहरे शतक से केवल 6 रन दूर रह गए। दोनों का एक ही स्कोर पर आउट होना इस मुकाबले का सबसे खास संयोग बन गया।

जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेले जा रहे ग्रुप डी के इस मुकाबले में राजस्थान ने दूसरे दिन सुबह 247 रन पर 2 विकेट से आगे खेलना शुरू किया। सचिन और करण ने अपनी शानदार बल्लेबाजी जारी रखी और रेलवे के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया। दोनों के बीच 338 रन की बड़ी साझेदारी हुई, जिसने राजस्थान को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि, सचिन के आउट होने के बाद मेजबान टीम की पारी लड़खड़ा गई और पूरी टीम 497 रन बनाकर आउट हो गई।

सचिन यादव ने अपनी 194 रन की पारी के लिए 358 गेंदों का सामना किया। इस दौरान उन्होंने 22 चौके और 4 छक्के लगाए। दूसरी ओर, अपना 11वां फर्स्ट क्लास मुकाबला खेल रहे करण लांबा ने केवल 284 गेंदों पर 194 रन बनाए। उनकी पारी में 19 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। करण ने इस दौरान अपना तीसरा रणजी शतक भी पूरा किया। दोनों बल्लेबाजों ने धैर्य और आक्रामकता के बीच अच्छा तालमेल दिखाया।

सुबह नई गेंद आने के बाद बल्लेबाजों को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रेलवे के गेंदबाजों ने किनारे लगवाने में सफलता हासिल की, लेकिन खराब क्षेत्ररक्षण के कारण टीम कुछ आसान मौके गंवा बैठी। इसका फायदा राजस्थान के बल्लेबाजों को मिला। शुरुआती दबाव से निकलने के बाद सचिन और करण ने खुलकर रन बनाए और रेलवे के गेंदबाजी आक्रमण को थका दिया। सचिन स्टंप आउट हुए, जबकि करण पॉइंट पर कैच दे बैठे।

दोनों बल्लेबाज कई वर्षों से राजीव गांधी क्रिकेट अकादमी में साथ अभ्यास करते रहे हैं। करण ने बताया कि लंबे समय से साथ खेलने के कारण दोनों एक-दूसरे की ताकत और खेल को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने यह भी माना कि दोहरे शतक से चूकने का थोड़ा अफसोस जरूर था, लेकिन वह इस बारे में बहुत ज्यादा नहीं सोच रहे थे। करण के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट में बल्लेबाजी के लिए इतनी अच्छी पिच कम ही मिलती है और उन्होंने लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की कोशिश की।

दिन के आखिरी सत्र में राजस्थान के गेंदबाजों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। पदार्पण कर रहे तेज गेंदबाज दानिश भांबू ने सटीक गेंदबाजी की, जबकि चेतन शर्मा और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकाश सिंह ने उनका साथ दिया। बाएं हाथ के स्पिनर मोहित चांगड़ा ने सलामी बल्लेबाज विवेक सिंह को पगबाधा आउट कर रेलवे को पहला झटका दिया।

दिन का खेल समाप्त होने तक रेलवे ने 1 विकेट पर 46 रन बना लिए थे और वह राजस्थान से 451 रन पीछे है। ऐसे में मुकाबले में वापसी करने के लिए रेलवे के बल्लेबाजों को अगले दिन बड़ी साझेदारियां करनी होंगी।

Mon, 19 Oct 2026 22:45:00 +0530

  Videos
See all

LIVE: Japan's Mars Moons Exploration (MMX) mission set to grab a piece of Mars's moon | BBC News #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-19T19:28:43+00:00

Russia Ukraine War Update: रूस पर यूक्रेन का भयंकर हमला? | Trump | Putin | Zelenskyy | News #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-19T19:30:18+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers