Baghdad में Pakistan के इशारे पर Islamic Cooperation Council ने Kashmir पर कर दी 'बयानबाजी', India ने लगे हाथ दे दिया करारा जवाब
बगदाद में OIC की बैठक में भारत के खिलाफ बयानबाजी पर मोदी सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान और OIC को दोटूक जवाब दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का हक किसी बाहरी संगठन को नहीं है। भारत ने पाकिस्तान पर OIC को अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि झूठे प्रचार और भारत विरोधी प्रस्तावों से न तो सच्चाई बदलेगी और न ही भारत की संप्रभुता पर कोई आंच आएगी। हम आपको बता दें कि बगदाद में 17 और 18 अक्टूबर को आयोजित OIC के विदेश मंत्रियों की 52वीं बैठक के प्रस्तावों में भारत के संदर्भों को नई दिल्ली ने दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण और झूठा करार दिया है।
कश्मीर पर दखल की कोशिश, भारत ने दिखाई लाल रेखा
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के राजनीतिक प्रस्ताव, किसी देश का प्रचार अभियान या दबाव की कूटनीति इस वास्तविकता को नहीं बदल सकती। भारत का रुख है कि OIC को उन विषयों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है जिन्हें वह देश का आंतरिक मामला मानता है। देखा जाये तो यह जवाब ऐसे समय आया है जब OIC की बैठक में फलस्तीन, मुस्लिम समुदायों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों, इस्लामोफोबिया तथा विभिन्न सदस्य देशों से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर प्रस्ताव अपनाए गए। संगठन ने 18 अक्टूबर को जारी अपनी विज्ञप्ति में बैठक को सफल बताया और फलस्तीनियों के अधिकारों तथा पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर फलस्तीन राज्य की स्थापना के समर्थन को दोहराया। OIC की आधिकारिक समापन विज्ञप्ति के मुताबिक, बैठक का समापन बगदाद घोषणा के साथ हुआ। भारत की आपत्ति इसी व्यापक बैठक में पारित प्रस्तावों के उन संदर्भों पर है जिन्हें नई दिल्ली अपने आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप मानती है।
पाकिस्तान पहले अपने कब्जे वाले क्षेत्र का हिसाब दे
हम आपको बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर के संबंध में लंबित वास्तविक मुद्दे केवल दो हैं। एक तो पाकिस्तान अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को खाली करे और दूसरा यह कि वह सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद करे।
विदेश मंत्रालय के बयान में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में नागरिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा, दमन और बर्बरता का आरोप भी लगाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि इस हिंसा में महिलाओं और बच्चों सहित अनेक लोगों की जान गई है। भारत का आरोप है कि मीडिया पर पाबंदियों के बावजूद मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीरता को छिपाया नहीं जा सकता।
साथ ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे, पर्यटन और संपर्क सुविधाओं के विकास का उल्लेख किया। भारत का कहना है कि इन प्रयासों से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिला है।
इस्लामोफोबिया के आरोपों पर भी पलटवार
हम आपको यह भी बता दें कि OIC प्रस्तावों में इस्लामोफोबिया से जुड़े संदर्भों पर भी भारत ने तीखी आपत्ति जताई। मंत्रालय ने इन्हें पाकिस्तान के अपने रिकॉर्ड से अंतरराष्ट्रीय ध्यान हटाने की कोशिश बताया और अल्पसंख्यकों के कथित उत्पीड़न, सांप्रदायिक हिंसा, शासन की विफलताओं तथा राजनीतिक अस्थिरता का मुद्दा उठाया।
भारत की दलील साफ है कि धार्मिक पहचान के आधार पर राजनीति करने और चुनिंदा मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उछालने से किसी देश के आरोप स्वतः सत्य नहीं हो जाते। यदि OIC वास्तव में निष्पक्षता और मानवाधिकारों की पक्षधर है, तो उससे अपेक्षा होगी कि वह सभी संबंधित पक्षों के मामलों को समान कसौटी पर परखे।
भारत की चेतावनी: संप्रभुता पर समझौता नहीं
विदेश मंत्रालय ने OIC की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए सदस्य देशों से संगठन में सुधार करने की अपेक्षा जताई है। देखा जाये तो भारत का संदेश उन सभी देशों और मंचों के लिए भी स्पष्ट है जो घरेलू राजनीतिक लाभ या किसी तीसरे देश के दबाव में भारतीय मामलों पर एकतरफा टिप्पणी करते हैं। साथ ही जम्मू-कश्मीर पर बयानबाजी करने वालों को पहले अपने दावों की विश्वसनीयता, अपने आचरण और आतंकवाद के सवालों पर जवाब देना चाहिए।
बहरहाल, भारत के आंतरिक मामलों पर राजनीतिक प्रचार को अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिलाने की कोशिशें वास्तविकता को नहीं बदल सकतीं। पाकिस्तान हो या OIC का कोई सदस्य देश हो, भारत अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों पर किसी बाहरी दबाव को स्वीकार करने वाला नहीं है।
Delhi LG Taranjit Singh Sandhu ने कम दोषसिद्धि पर अभियोजन निदेशालय की जवाबदेही तय करने के दिए निर्देश
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दोषसिद्धि की कम दर, लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और मामलों के निपटारे में देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए सोमवार को दिल्ली सरकार के अभियोजन निदेशालय को जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संधू ने कहा, “न्याय में देरी का मतलब न्याय से वंचित होना नहीं होना चाहिए। हर टाली जा सकने वाली देरी और चूक को दूर किया जाना चाहिए।” उपराज्यपाल के आधिकारिक ‘एक्स’ खाते पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, संधू ने एक समीक्षा बैठक में इन समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल ठोस और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।
उन्होंने दोषसिद्धि की कम दर, लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और उनके निपटारे में हो रही देरी पर चिंता जताई। साथ ही, आरोपियों के बरी होने के मामलों का विश्लेषण करने, कमियों की पहचान करने और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय करने को कहा। पोस्ट में कहा गया कि संधू ने मामलों की निगरानी प्रणाली को बेहतर बनाने, मुकदमों में देरी के कारणों की पहचान करने, दिल्ली पुलिस और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के बीच समन्वय मजबूत करने तथा जांच अधिकारियों को प्रभावी ढंग से जानकारी देने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में निर्धारित समय-सीमाओं का पालन सुनिश्चित करने, जहां कानूनन लागू हो वहां आरोपियों की अनुपस्थिति में मुकदमे की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू करने तथा जांच की गुणवत्ता और साक्ष्य जुटाने के लिए जांच अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया। संधू ने आरोपपत्रों को अदालत में दाखिल करने से पहले उनकी गहन जांच करने, बार-बार स्थगन की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने को भी कहा। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को अभियोजन व्यवस्था मजबूत करने और अधिक प्रभावी ढंग से न्याय सुनिश्चित करने के लिए तत्परता से काम करने का निर्देश दिया।
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