Thalipeeth Recipe: हेल्दी स्नैक थालीपीठ सब करेंगे पसंद, बच्चों से लेकर बड़ों तक की है फेवरेट डिश
Thalipeeth Recipe: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खास ख्याल रखना चाहते हैं। ऐसे में पारंपरिक व्यंजन एक बार फिर लोगों की थाली में लौट रहे हैं। इन्हीं में से एक है महाराष्ट्र की प्रसिद्ध डिश थालीपीठ, जो स्वाद और पोषण का बेहतरीन संगम मानी जाती है। यह एक ऐसा हेल्दी स्नैक है जिसे बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी बड़े चाव से खाते हैं।
महाराष्ट्र की रसोई से निकला थालीपीठ अब देशभर के घरों में अपनी जगह बना चुका है। मल्टीग्रेन आटे, ताजी सब्जियों और सुगंधित मसालों से तैयार यह व्यंजन न केवल पेट भरता है, बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करता है। सुबह के नाश्ते से लेकर शाम की हल्की भूख तक, थालीपीठ हर मौके पर फिट बैठता है।
थालीपीठ तैयार करने के लिए सामग्री
- 1 कप ज्वार का आटा
- 1/2 कप बाजरे का आटा
- 1/2 कप गेहूं का आटा
- 1/4 कप बेसन
- 1 बारीक कटा प्याज
- 2 बारीक कटी हरी मिर्च
- 2 चम्मच कटा हरा धनिया
- 1/2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- 1/2 चम्मच हल्दी
- 1/2 चम्मच जीरा
- स्वादानुसार नमक
- आवश्यकतानुसार पानी
- सेंकने के लिए थोड़ा सा तेल या घी
थालीपीठ तैयार करने की विधि
स्वाद और पोषण से भरपूर थालीपीठ खूब पसंद किया जाता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में सभी प्रकार के आटे को मिला लें। अब इसमें प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, जीरा, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालें। धीरे-धीरे पानी मिलाते हुए सख्त लेकिन मुलायम आटा गूंथ लें।
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एक प्लास्टिक शीट या केले के पत्ते पर थोड़ा सा तेल लगाएं। आटे की लोई लेकर हाथ से थपथपाते हुए गोल आकार दें। बीच में छोटे-छोटे छेद कर दें ताकि पकाते समय तेल अंदर तक पहुंच सके।
इसके बाद गरम तवे पर थालीपीठ रखें और किनारों पर थोड़ा तेल डालें। मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेकें। गरमा-गरम थालीपीठ को दही, मक्खन या चटनी के साथ परोसें।
थालीपीठ का स्वाद हल्का मसालेदार और सुगंधित होता है, जो बच्चों को भी आकर्षित करता है। वहीं बड़ों के लिए यह एक हेल्दी और लो-कैलोरी विकल्प है। मल्टीग्रेन होने के कारण यह पाचन में सहायक है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
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(लेखक:कीर्ति)
Diabetes Causes: 5 खराब आदतें बन सकती हैं डायबिटीज की वजह, आज से ही बदल लें रूटीन
Diabetes Causes: डायबिटीज अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। तेजी से बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने युवाओं को भी इसकी चपेट में ला दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार बीमारी अचानक नहीं आती, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की कुछ छोटी-छोटी गलत आदतें धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करती रहती हैं।
अगर समय रहते इन आदतों को पहचान लिया जाए और रूटीन में सुधार कर लिया जाए, तो डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 5 खराब आदतों के बारे में, जो भविष्य में ब्लड शुगर बढ़ने की बड़ी वजह बन सकती हैं।
5 खराब आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार
ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड खाना
रोजाना ज्यादा मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, पैकेट जूस और प्रोसेस्ड स्नैक्स का सेवन ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाता है। इन चीजों में रिफाइंड शुगर और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जो इंसुलिन पर अतिरिक्त दबाव डालती है। लंबे समय तक ऐसा खानपान इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ा सकता है।
फिजिकल एक्टिविटी की कमी
दिनभर कुर्सी पर बैठकर काम करना और एक्सरसाइज से दूरी बनाए रखना भी डायबिटीज का बड़ा कारण है। जब शरीर एक्टिव नहीं रहता, तो ग्लूकोज सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पाता। रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक या हल्की कसरत ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करती है।
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देर रात तक जागना और कम नींद लेना
नींद की कमी हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ सकती है। रिसर्च बताती हैं कि 6-8 घंटे की पर्याप्त नींद न लेने से इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने की आदत भी मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक असर डालती है।
बढ़ता वजन और पेट की चर्बी
मोटापा, खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी, टाइप-2 डायबिटीज का प्रमुख जोखिम कारक है। अतिरिक्त फैट शरीर में इंसुलिन के काम करने की क्षमता को कम कर देता है। संतुलित डाइट और नियमित व्यायाम से वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
तनाव और अनियमित दिनचर्या
लगातार मानसिक तनाव भी ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। स्ट्रेस हार्मोन शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ाते हैं। इसके अलावा अनियमित समय पर खाना, नाश्ता छोड़ना और ओवरईटिंग जैसी आदतें भी जोखिम बढ़ाती हैं। योग, ध्यान और समय पर भोजन से इस समस्या को कम किया जा सकता है।
(Disc।aimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी डॉक्टर/विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)
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