Starlink के भारत प्रवेश पर बोले Shashi Tharoor, सभी कंपनियों के लिए एक जैसी प्रक्रिया
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को कहा कि स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क की स्टारलिंक और भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रवेश करने की इच्छुक अन्य कंपनियों को एक जैसी प्रक्रिया से गुजरने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का कहना है कि सभी कंपनियों को एक जैसी देरी का सामना करना पड़ रहा है। स्टारलिंक को लेकर मस्क की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, थरूर ने ANI से कहा कि अगर सरकार की सफाई को अक्षरशः माना जाए, तो इस प्रक्रिया में न तो मस्क को और न ही रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को कोई फायदा मिल रहा है।
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उन्होंने कहा कि मैंने इस मुद्दे पर सरकार की सफाई सुनी है। सरकार का कहना है कि एक तय प्रक्रिया है, जिसमें बोली लगाने वाली सभी कंपनियां शामिल हैं और सभी को एक जैसी देरी का सामना करना पड़ रहा है। अगर सरकार की इस बात को सच मानें, तो इसका मतलब है कि मस्क कतार में पीछे नहीं हैं और अंबानी आगे नहीं हैं। मुझे लगता है कि हमें बस इस प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार करना चाहिए। थरूर ने कहा कि तकनीक, सुरक्षा संबंधी चिंताएं, तकनीकी विवरण और लागत जैसे कई कारक इसके नतीजे तय करेंगे, जबकि अंतिम फैसला उपभोक्ताओं के हाथ में होगा।
उन्होंने कहा कि इसके कई पहलू हैं। इसमें तकनीक से जुड़े सवाल हैं, सुरक्षा संबंधी कुछ चिंताएं हैं, अपलिंकिंग से जुड़ी कई तरह की बातें हैं और अंत में लागत का सवाल है। लागत के मामले में फैसला आम जनता करेगी। अगर आप मुझे कोई सेवा दे रहे हैं और कोई दूसरा व्यक्ति वही सेवा 10 गुना कीमत पर दे रहा है, तो हो सकता है कि मैं आपसे ही वह सेवा लूं। या फिर, अगर मुझे सच में लगे कि वह जो सेवा दे रहा है, वह 10 गुना कीमत के लायक है, तो मैं उसे वह रकम दे दूंगा। हर ग्राहक को खुद ही यह तय करना होगा।
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थरूर ने आगे कहा कि वह अपने मौजूदा इंटरनेट कनेक्शन से संतुष्ट हैं और व्यक्तिगत रूप से स्टारलिंक (Starlink) सेवाओं की तलाश नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर, मैं अपने मौजूदा इंटरनेट कनेक्शन से काफी खुश हूं। मैं खुद स्टारलिंक नहीं लेना चाहता। लेकिन अगर कुछ लोगों को लगता है कि ये चीजें उनके काम की हैं, तो एक स्वतंत्र देश में उन्हें यह मौका मिलना चाहिए। इससे पहले 9 अक्टूबर को, लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी ने मस्क के उन आरोपों पर अपनी बात रखी, जिनमें कहा गया था कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी (स्टारलिंक) ने भारत के सभी कानूनों और शर्तों का पालन किया है, फिर भी उसे भारत में लाइसेंस नहीं मिल पाया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने भारतीय बाजार में प्रवेश करने की स्टारलिंक की कोशिशों से जुड़ी स्थिति को चिंताजनक बताया। मस्क ने 'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि धन्यवाद, राहुल। यह वाकई चिंताजनक है।
Bombay High Court का अहम फैसला, प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो और अपराधियों को जगह न मिले
बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है लेकिन पुलिस की कार्रवाई पर व्यापक रोक लगाने का आदेश देने से पहले प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि और आम लोगों को होने वाली असुविधा जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को उन याचिकाओं पर जवाब देने का निर्देश दिया, जिनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ मुंबई में हाल में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लेने के आरोप लगाए गए हैं। अदालत अधिवक्ता सावर देवरे की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में दिल्ली में प्रदर्शनों के समर्थन में यहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस की कथित बर्बरता और उन्हें हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया गया था। याचिका में पुलिस को ऐसे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। अधिवक्ता गायत्री सिंह ने सोमवार को चार लोगों की ओर से आवेदन पेश किया।
इन लोगों को पिछले सप्ताह शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया था। सिंह ने कहा कि चारों को एक दिन हिरासत में रखा गया, फिर घर जाने को कहा गया और इसके बाद उन्हें उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने दो अन्य लोगों के हलफनामे भी पेश किए, जिन्हें पुलिस ने उनके घरों से हिरासत में लिया था।
पीठ ने कहा कि हर व्यक्ति को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि पर भी विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा, ‘‘हर किसी को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए।
महाराष्ट्र में हमने देखा है कि पुलिस ने काफी संयम बरता है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। निर्दोष नागरिकों की आड में अपराधियों को प्रदर्शनों में शामिल नहीं होना चाहिए।’’ इस बीच, मध्य मुंबई के शिवाजी पार्क के निवासियों की ओर से पेश दो वकीलों ने भी आवेदन दाखिल किए। उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय का एक आदेश वहां इस तरह के प्रदर्शनों पर रोक लगाता है।
पिछले सप्ताह यहां प्रदर्शन हुए थे। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार को इन शिकायतों पर भी जवाब देना होगा। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की।
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