अचानक छूटने वाली बेकाबू Laughter के पीछे काम करते हैं Brain के दो अलग तंत्र, रिसर्च में खुलासा
(सोफी स्कॉट - यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन एवं फॉस्टो कैरुआना - यूनिवर्सिटी ऑफ पारमा) लंदन, 19 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) कभी-कभी हंसी ऐसी छूटती है कि लाख कोशिशों के बावजूद रुकने का नाम नहीं लेती। हैरानी की बात यह है कि इसके पीछे सिर्फ कोई मजेदार बात नहीं, बल्कि मस्तिष्क की जटिल प्रक्रियाएं भी होती हैं। एक नए शोध के मुताबिक, बेकाबू होकर हंसने और बातचीत के दौरान सामान्य रूप से हंसने के पीछे मस्तिष्क के अलग-अलग तंत्र काम करते हैं। कई बार हंसी ऐसे समय पर आती है, जब इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं होती। हममें से एक के साथ ऐसा उस समय हुआ, जब वह तलाक के एक अप्रिय मामले के दौरान अपने मित्र के साथ पारिवारिक अदालत गया था। हंसी पर काबू पाने की तमाम कोशिशें नाकाम होने के बाद उसे बाथरूम की ओर भागना पड़ा। जाहिर है, मित्र को उस समय इस तरह के भावनात्मक सहयोग की उम्मीद तो नहीं थी। ऐसा ही एक चर्चित उदाहरण 1991 का है, जब क्रिकेट कमेंटेटर ब्रायन जॉनस्टन और जोनाथन एग्न्यू मैच का हाल सुनाते समय इतना हंसने लगे कि बोल ही नहीं पाए। लेकिन ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे मस्तिष्क में क्या प्रक्रिया होती है?
----- हंसी के पीछे सामाजिक कारण ----- आमतौर पर हम हंसी को मनोरंजन या किसी मजेदार बात से जोड़ते हैं, लेकिन हंसी के पीछे ज्यादातर सामाजिक कारण होते हैं। उदाहरण के लिए, अकेले होने के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति के साथ होने पर आपके हंसने की संभावना 30 गुना अधिक होती है। यदि आप अपने साथी को जानते हैं और उसे पसंद करते हैं, तो आपके हंसने की संभावना और बढ़ जाती है। अक्सर हंसी बातचीत के दौरान आती है। कई बार हम दूसरों को हंसते देखकर या उनकी हंसी सुनकर खुद भी हंसने लगते हैं। इससे सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं। हम सहमति और समझ जताने, दोस्ती मजबूत करने तथा साझा यादों को ताजा करने के लिए भी हंसते हैं। इसके अलावा, हंसी तनाव कम करने में मदद करती है। बातचीत के दौरान सामान्य हंसी औसतन हर दस मिनट में लगभग छह बार आती है। यह छोटी होती है और जल्दी शुरू होकर जल्दी खत्म हो जाती है। इसके विपरीत, बेकाबू हंसी लंबे समय तक चलती है। इसकी आवाज ऊंची हो सकती है और इसमें अजीब तरह की चीख जैसी आवाजें भी शामिल हो सकती हैं। शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि क्या हंसी के इन दोनों प्रकारों की उत्पत्ति मस्तिष्क की अलग-अलग प्रणालियों में होती है।
----- मस्तिष्क के दो अलग-अलग तंत्र ----- हंसी पैदा करने वाले मस्तिष्क के तंत्र को समझना आसान नहीं है। हंसते समय लोगों के शरीर में काफी हलचल होती है, जिससे एफएमआरआई जैसी तकनीकों से मस्तिष्क का अध्ययन करना मुश्किल हो जाता है। प्रयोगशाला में लोगों को स्वाभाविक रूप से हंसाना भी चुनौतीपूर्ण है। मिलान के निगुआर्दा अस्पताल में मिर्गी के मरीजों के मस्तिष्क में चिकित्सकीय उद्देश्यों से विद्युत उत्तेजना देने की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि मस्तिष्क के पांच या छह हिस्सों को उत्तेजित करने पर मरीज जोर-जोर से हंसने लगते हैं। हंसी से संबंधित अध्ययनों की समीक्षा में सामने आया कि मस्तिष्क के दो अलग-अलग तंत्र इसमें भूमिका निभाते हैं। पहले तंत्र को उत्तेजित करने पर व्यक्ति को खुशी महसूस होती है और वह बेकाबू होकर हंसने लगता है। दूसरे तंत्र की उत्तेजना से हंसी आती है, लेकिन बोलने में परेशानी हो सकती है और इसके साथ खुशी की भावना होना जरूरी नहीं है।
----- हंसी का विकास और शरीर पर असर ----- स्वाभाविक और बेकाबू हंसी से जुड़ी पहली प्रणाली मनुष्यों और अन्य स्तनधारी जीवों में आवाज निकालने के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क तंत्र से मिलती-जुलती है। विकास की दृष्टि से यह पुरानी प्रणाली है और इसकी जड़ें जानवरों की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं तथा खेल-कूद के दौरान होने वाली गतिविधियों में हैं। इसके सक्रिय होने पर शरीर में कई रासायनिक प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। इनमें ओपिओइड प्रणाली भी शामिल है, जो आनंद और संतुष्टि की भावना पैदा करने में मदद करती है। दर्द के प्रति संवेदनशीलता को नियंत्रित करने वाली सेरोटोनिन प्रणाली भी प्रभावित हो सकती है। इससे बेकाबू हंसी के दौरान कुछ समय के लिए शारीरिक दर्द कम महसूस होने की संभावना समझ में आती है। इसके विपरीत, स्वेच्छा से आने वाली हंसी का संबंध मस्तिष्क के उस तंत्र से है, जो बोलने जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। बातचीत के दौरान यह हंसी सहमति जताने और सामाजिक संबंध मजबूत करने में मदद करती है। वर्ष 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि बातचीत के दौरान हंसते समय मुख और गले के आकार में होने वाले बदलाव बोलते समय होने वाले बदलावों से मिलते-जुलते हैं। इसके विपरीत, बेकाबू हंसी के दौरान ये बदलाव बोलने के तरीके से काफी अलग होते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि स्ट्रोक से स्वेच्छा से हंसने और बोलने को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क तंत्र को नुकसान पहुंचता है, तो व्यक्ति को बोलने में गंभीर परेशानी हो सकती है, जबकि वह हंसने और रोने में सक्षम रह सकता है। हंसी का विज्ञान अब सामाजिक व्यवहार के विकास, आपसी जुड़ाव, सहानुभूति, दर्द को नियंत्रित करने और बातचीत में भाषा की भूमिका जैसी प्रक्रियाओं को समझने में मदद कर रहा है।
खुद भारी कर्ज में डूबा Pakistan बना कर्ज लेने वाले देशों के वैश्विक समूह का अध्यक्ष, जानिए क्या काम करता है Borrowers Platform
लगातार भारी-भरकम कर्ज लेने वाला देश पाकिस्तान अब एक अजीब और विरोधाभासी स्थिति में दुनिया के सामने आया है। भारी कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान, संयुक्त राष्ट्र (UN) समर्थित एक ऐसे वैश्विक मंच का अध्यक्ष बन गया है, जिसे विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय कर्ज के मामलों में अपनी आवाज मजबूती से उठाने के लिए तैयार किया गया है। पाकिस्तान सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, देश के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने 12 अक्टूबर को बैंकॉक में 'बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म' (Borrowers Platform / उधारकर्ताओं के मंच) की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता औपचारिक रूप से स्वीकार कर ली है। इस नई जिम्मेदारी के तहत पाकिस्तान का मुख्य काम कर्ज प्रबंधन (Debt Management) में सहयोग का मार्गदर्शन करना, आर्थिक सुधारों से जुड़े अपने कड़वे-मीठे अनुभव साझा करना और इस मंच के 2026-27 के कार्य कार्यक्रम को आगे बढ़ाना होगा।
'बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म' कर्ज लेने वाले विकासशील देशों को एक साथ लाता है ताकि वे ज्ञान का आदान-प्रदान कर सकें, कर्ज प्रबंधन की अपनी क्षमता को बेहतर बना सकें और साझा चुनौतियों पर चर्चा कर सकें। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) इसके सचिवालय के रूप में काम करता है। पाकिस्तान इसके राजनीतिक निर्णय लेने वाले निकाय की अध्यक्षता करेगा, जबकि एक अलग संचालन समिति (Steering Committee) तकनीकी और परिचालन संबंधी कार्यों को संभालेगी।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान लगातार बाहरी वित्तीय मदद की तलाश में है। हाल ही में 7 अक्टूबर को, पाकिस्तान ने IMF के साथ एक 'स्टाफ-लेवल' समझौता किया है, जिससे उसे लगभग 1.21 अरब डॉलर मिल सकते हैं (बशर्ते IMF के कार्यकारी बोर्ड से इसे मंजूरी मिल जाए)। 2023 में, पाकिस्तान ने IMF से 3 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज लेकर खुद को 'सॉवरेन डिफॉल्ट' (देश के दिवालिया होने) से बाल-बाल बचाया था। इसके बाद 2024 में उसे 7 अरब डॉलर का एक और कार्यक्रम मिला। इसके अलावा, उसे IMF से जलवायु-लचीलेपन (climate-resilience) के लिए 1.3 अरब डॉलर का एक अलग कर्ज भी मिला।
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक पाकिस्तान पर कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां 137.55 अरब डॉलर थीं।
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तो, जिस निकाय का नेतृत्व अब पाकिस्तान कर रहा है, वह क्या काम करता है? वैश्विक स्तर पर, यह मंच एक लंबे समय से चले आ रहे असंतुलन को दूर करने का प्रयास करता है। असल में, कर्ज देने वालों (creditors) ने तो आपस में तालमेल बिठाने के लिए तंत्र बना रखे हैं, लेकिन कर्ज लेने वाले देशों के पास सहयोग के लिए कोई स्थायी मंच नहीं था। कम से कम पाकिस्तान के पास इस मंच पर साझा करने के लिए अनुभवों की कोई कमी नहीं होगी।
'बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म' (उधारकर्ताओं का मंच) क्या है?
इस मंच का विचार जुलाई 2025 में स्पेन के सेविले में आयोजित एक वैश्विक विकास-वित्तपोषण सम्मेलन में सामने आया। UNCTAD के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म को आधिकारिक तौर पर 15 अप्रैल, 2026 को वाशिंगटन में लॉन्च किया गया था।
यह प्लेटफॉर्म सरकारों को एक-दूसरे के उधार लेने के अनुभवों से सीखने, विशेषज्ञों की मदद लेने और कर्ज प्रबंधन के बारे में जानकारी साझा करने का मौका देता है। UNCTAD के अनुसार, देश बिना कोई सदस्यता शुल्क दिए इसमें शामिल हो सकते हैं।
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UNCTAD की 'ऋण और विकास वित्त' शाखा की कार्यवाहक प्रमुख पेनेलोप हॉकिन्स ने अप्रैल में लॉन्च के दौरान रॉयटर्स को बताया, "पेरिस क्लब के मुकाबले, यह 'बॉरोअर्स क्लब' (उधारकर्ताओं का क्लब) 70 साल पीछे है।" उनका इशारा 'पेरिस क्लब' की ओर था, जो कई दशकों से सक्रिय है। यह उन देशों का एक समूह है जो अन्य सरकारों को कर्ज देते हैं।
'बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म' के प्रमुख के रूप में पाकिस्तान क्या करेगा?
पाकिस्तान ने इस प्लेटफॉर्म का अध्यक्ष बनने से पहले ही इसे स्थापित करने में मदद की थी। वह मिस्र के नेतृत्व वाले एक कार्य समूह का उपाध्यक्ष था, जिसमें कोलंबिया, होंडुरास, मालदीव, नेपाल और जाम्बिया भी शामिल थे। इस समूह ने तय किया कि प्लेटफॉर्म क्या काम करेगा, यह कैसे चलेगा और इसमें कौन-कौन शामिल हो सकता है।
UNCTAD के अनुसार, सदस्य हर साल एक अध्यक्ष चुनते हैं। वित्त मंत्री, केंद्रीय बैंक के गवर्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी 'गवर्निंग काउंसिल' (शासी परिषद) के माध्यम से इसकी प्राथमिकताएं तय करते हैं, जबकि 'स्टीयरिंग कमेटी' (संचालन समिति) तकनीकी कामकाज संभालती है।
सरकार के 12 अक्टूबर के बयान के अनुसार, पाकिस्तान के मंत्री औरंगजेब ने कहा कि उनका देश अन्य देशों को कर्ज का बेहतर प्रबंधन करने, एक-दूसरे के सुधारों से सीखने और विकास कार्यों के लिए वित्त जुटाने के नए तरीके खोजने में मदद करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। उन्होंने योजनाओं को लागू करने और ऐसे परिणाम हासिल करने पर भी जोर दिया जिन्हें मापा जा सके।
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हालांकि ये पाकिस्तान और 'बॉरोअर्स क्लब' की जिम्मेदारियां होंगी, लेकिन UNCTAD ने स्पष्ट किया है कि यह प्लेटफॉर्म अपने सदस्यों की ओर से ऋण की शर्तों या कर्ज अदायगी को लेकर कोई बातचीत नहीं करेगा। यह पहले से मौजूद ऋण व्यवस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा; इसलिए, सिर्फ इसलिए कि पाकिस्तान इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है, उसके अपने कर्ज कम नहीं हो जाएंगे या माफ नहीं किए जाएंगे।
पाकिस्तान की भूमिका कर्ज के बोझ तले दबे देशों को ज्ञान साझा करने में मदद करना है—एक ऐसा क्षेत्र जिसमें पाकिस्तान के पास काफी अनुभव हो सकता है। यह मंच विशेषज्ञ सहायता भी प्रदान करेगा और सदस्य देशों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाएगा। कुल मिलाकर बात यह है कि भले ही पाकिस्तान कर्ज लेने वालों की सूची में सबसे ऊपर हो, लेकिन उसके कर्जदाता इस स्थिति को कर्ज की अदायगी समझने की गलती शायद ही करेंगे।
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