हरदा में बिना लाइसेंस पटाखों का अवैध कारोबार उजागर, मकान में जमा था लाखों का स्टॉक, पुलिस ने जब्त किया पूरा माल
हरदा: दशहरे और दीपावली से पहले मध्यप्रदेश में अवैध पटाखों की बिक्री और भंडारण के खिलाफ पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। प्रदेशभर में चल रही कार्रवाई के दौरान पुलिस अवैध पटाखे और बारूद जब्त कर आरोपियों पर शिकंजा कस रही है। इसी बीच, हरदा जिले में पुलिस ने एक मकान में बिना अनुमति और वैध लाइसेंस के बड़ी मात्रा में लाखों रुपये के पटाखे अवैध तरीके से जमा किये जाने का खुलासा किया है। पुलिस ने पूरा माल जब्त कर लिया है।
बता दें कि हरदा पहले भी पटाखा विस्फोट की भयावह घटना का सामना कर चुका है। ऐसे में रिहायशी इलाके में भारी मात्रा में बारूद एवं अवैध पटाखे मिलने की घटना ने प्रशासन की सतर्कता और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिये हैं।
जानकारी अनुसार, रविवार को सिटी कोतवाली पुलिस की टीम मुखबिर से सूचना मिली थी कि सरस्वती शिशु मंदिर के पास स्थित एक मकान में अवैध रूप से पटाखे रखे गये हैं। सूचना मिलते ही पुलिस एक्टिव हो गई और मकान पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान पुलिस को मकान से भरे हुये बड़े बॉक्स मिले।
पुलिस ने जब्त किया पटाखों का पूरा अवैध स्टॉक
इतना ही नहीं पुलिस को मौके से खाली बॉक्स और रैपर भी मिले है। जिसके बाद आशंका जताई जा रही है कि मकान पर अवैध रूप से पटाखों की री-पैकिंग का काम भी चल रहा था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके से पटाखों का पूरा अवैध स्टॉक जब्त कर लिया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी सागर तलरेजा के पास इतनी बड़ी मात्रा में पटाखे जमा करने के लिये कोई वैध लाइसेंस नहीं था।
पुलिस के अनुसार, घनी आबादी के बीच मकान में बिना अनुमति और सुरक्षा नियमों का पालन किये बगैर पटाखों का अवैध कारोबार किया जा रहा था। मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।
छत्तीसगढ़ से बालाघाट होते हुए जबलपुर पहुंचा हाथियों का झुंड, बरगी के जंगल में तलाश में जुटे 40 से ज्यादा वनकर्मी
छत्तीसगढ़ से निकलकर करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद हाथियों का झुंड जबलपुर के बरगी इलाके तक पहुंच गया है। दरअसल बरगी के जंगलों में हाथियों की मौजूदगी की खबर मिलते ही वन विभाग अलर्ट हो गया है। रविवार को 40 से ज्यादा कर्मचारी जंगल में हाथियों की तलाश में जुट गए। वन विभाग अब उनकी संख्या और मूवमेंट का पता लगा रहा है। आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को भी घने जंगल की ओर न जाने की सलाह दी गई है।
दरअसल बरगी में हाथियों का पहुंचना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जानकारों के मुताबिक इससे पहले इस इलाके के जंगलों में हाथियों को नहीं देखा गया था। अब तक उमरिया और शहडोल के जंगलों में हाथियों की आवाजाही की जानकारी सामने आती रही है। इस बार झुंड ने अपना रास्ता बदलते हुए बालाघाट के रास्ते जबलपुर की ओर सफर किया है। वन विभाग की टीम लगातार इलाके पर नजर रख रही है ताकि हाथियों की मौजूदगी से लोगों और फसलों को किसी तरह का नुकसान न हो।
छत्तीसगढ़ से बरगी तक कैसे पहुंचे हाथी?
जानकारी के मुताबिक हाथियों ने छत्तीसगढ़ से अपना सफर शुरू किया था। इसके बाद वे बालाघाट के चूरापूड़ी से होते हुए नकटिया और परासिया के रास्ते बरगी तक पहुंचे। इस दौरान झुंड ने करीब 300 किलोमीटर की दूरी तय की। हाथियों के इस तरह लंबा सफर तय करके नए इलाके में पहुंचने से वन विभाग की टीम उनकी मौजूदा लोकेशन और आगे की दिशा का पता लगाने में जुटी है। जबलपुर के डीएफओ पुनीत सोनकर के मुताबिक हाथियों के सफर की कोई तय सीमा नहीं होती। वे एक दिन में कितनी दूरी तय करेंगे यह उनकी चाल और हालात पर निर्भर करता है। कभी हाथी पूरा दिन चलते रहते हैं तो कभी 20 से 30 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। इसी वजह से उनकी आगे की मूवमेंट का अंदाजा लगाना आसान नहीं होता। वन विभाग के कर्मचारी जंगल में उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं ताकि झुंड किस दिशा में बढ़ रहा है इसकी जानकारी समय पर मिल सके।
बरगी के जंगलों में क्यों रुके हाथी?
जानकारों के मुताबिक बरगी और आसपास के इलाके में फैली हरियाली, पानी और खाने की उपलब्धता हाथियों को यहां तक खींच लाई हो सकती है। सफर के दौरान हाथियों को जहां भोजन और पानी मिलता है वहां वे रुकते भी हैं। इसी वजह से उनकी चाल धीमी हो सकती है। बरगी के आसपास कुछ खेतों में हाथियों के घुसने की जानकारी भी सामने आई है हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक उन्होंने ज्यादा नुकसान नहीं किया। हाथियों के नए इलाके में पहुंचने के बाद वन विभाग के सामने सबसे जरूरी काम उनकी सही संख्या और लोकेशन का पता लगाना है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि झुंड में कुल कितने हाथी हैं और वे आगे किस दिशा में बढ़ेंगे। टीम जंगल में उनकी मौजूदगी के संकेत तलाश रही है और हर गतिविधि पर नजर रख रही है। हाथियों के व्यवहार और रास्ते को समझकर ही विभाग आगे की निगरानी की योजना बना रहा है।
ग्रामीणों को जंगल से दूर रहने की सलाह
वहीं हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए जबलपुर वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। सिवनी वन विभाग को भी इसकी जानकारी दी गई है ताकि आसपास के इलाकों में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। एक विशेष टीम दिन-रात जंगल में तैनात है और हाथियों की मूवमेंट पर नजर रख रही है। विभाग की कोशिश है कि झुंड को घने जंगल के भीतर ही रहने दिया जाए और वह आबादी वाले इलाकों की ओर न बढ़े। वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को सावधानी बरतने और घने जंगल की ओर न जाने की सलाह दी है।
वंदना झां, जबलपुर
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