Diabetes और High BP से कमजोर हो सकती है आंखों की रोशनी, Blood Sugar रखें कंट्रोल
खानपान और लाइफस्टाइल से जुड़ी गड़बड़ी ने कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। लिहाजा कई बीमारियां जो पहले के समय नें बढ़ती उम्र के साथ हुआ करती थी, वह कम उम्र वालों में भी देखी जा रही है। इनमें से एक दिक्कत आखों की है। अब कम उम्र में आंखों की रोशनी कम होने और चश्मा लगने की समस्या बेहद आम बात हो गई हैं। आंखों की रोशनी कम होने के पीछे कई वजह हो सकती हैं।
शरीर में मौजूद कुछ बीमारियों के कारण धीरे-धीरे आंखों को भी नुकसान हो रहा है। डायबिटीज इसका एक बड़ा उदाहरण है। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर की समस्या होने पर आंखों के पीछे मौजूद रेटिना की छोटी ब्लड वेसेल्स को नुकसान होता है। जिस कारण डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्या हो सकती है। वहीं डायबिटीज से ग्लूकोमा और मोतियाबिंद का भी जोखिम बढ़ जाता है। ठीक उसी तरह हाई बीपी की समस्या भी आंखों की ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आंखों की बढ़ती समस्याओं के पीछे की बीमारियों के बारे में बताने जा रहे हैं।
इसे भी पढ़ें: 5 दिन बैठे-बैठे काम और वीकेंड पर भारी कसरत? कंधों को हो सकता है बड़ा नुकसान
डायबिटीज वालों में अधिक खतरा
लंबे समय तक ब्लड शुगर हाई रहने की वजह से आंख की रेटिना की ब्लड वेसेल्स को नुकसान हो सकता है। इसको डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है।
हालांकि शुरूआत में इसका कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता है। हालांकि समय के साथ आपकी रोशनी धुंधली दिखने लगे, आंखों के सामने धब्बे या रोशनी कम होने जैसी समस्या हो सकती है।
डायबिटीज वाले लोगों में ग्लूकोमा और मोतियाबिंद का खतरा बढ़ा हुआ देखा जाता रहा है।
डायबिटीज के शिकार लोगों को आंखों से जुड़ी समस्या को कम करने के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के साथ-साथ साल में कम से कम 1 बार आंखों की जांच जरूर कराना चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर की समस्या
लगातार ब्लड प्रेशर बढ़े रहने से शरीर की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है। आंखों में मौजूद छोटी रक्त वाहिकाएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए हाई बीपी वाले लोगों को नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखना चाहिए।
अगर आपकी आंखों की रोशनी अचानक से धुंधली हो जाती है, आंखों के सामने अचानक धब्बे दिखाई दें या नजर में अचानक बदलाव महसूस होने लगे, तो इसको सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
आंखों की समस्या होने के अलावा ब्लड प्रेशर हाई रहने पर फौरन डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
ग्लूकोमा और मोतियाबिंद की समस्या होना
ग्लूकोमा बीमारी आंख की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाती है। अगर इसका समय पर इलाज नहीं हो, तो इससे धीरे-धीरे नजर कमजोर हो सकती है। वहीं मोतियाबिंद की समस्या होने पर आंखों का प्राकृतिक लेंस धुंधला होने लगता है। जिस कारण देखने में परेशानी होती है।
उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज वाले लोगों में इन दोनों तरह की समस्याओं का जोखिम ज्यादा रहता है। आंखों में लगातार रोशनी के आसपास घेरा, लगातार धुंधलापन या नजर में बदलाव जैसे लक्षण होने पर जांच करना चाहिए।
लक्षण न हों तब भी आंखों की जांच कराएं
आंखों की कुछ गंभीर बीमारियां ऐसी भी हो सकती हैं, जो बिना किसी शुरूआती लक्षण के बढ़ती हैं। डायबिटिक रेटिनोपैथी इसका उदाहरण है। इसलिए सिर्फ नजर कम होने पर ही आंखों की जांच नहीं करानी चाहिए, बल्कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों को भी नियमित रूप से आई चेकअप कराते रहना चाहिए।
ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना, धूम्रपान से दूरी बनाना और डॉक्टर की बताई गई जांच कराना आंखों की रोशनी को बचाए रखने में सहायता कर सकता है।
Face Yoga: चेहरे पर नैचुरल ग्लो लाने के लिए डेली रूटीन में शामिल करें ये 4 Face Yoga
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक स्क्रीन देखने, आराम की कमी और व्यस्त लाइफस्टाइल का असर अक्सर हमारे चेहरे पर नजर आने लगता है। वहीं कई बार पर्याप्त मेकअप के बाद भी हमारा चेहरा डल और थका हुआ लगता है। ऐसे में आप फेस योगा को अपनी डेली रूटीन में शामिल कर सकती हैं। इससे फेस और गर्दन की मांसपेशियों को हल्के मूवमेंट और स्ट्रेच के जरिए रिलैक्स किया जाता है। ऐसे में अगर आप भी अपने चेहरे पर निखार और ताजगी पाना चाहती हैं, तो इन आसान फेस योगा को अपने रूटीन में शामिल कर सकती हैं।
गुब्बारा मुद्रा
इस आसन को करने के लिए अपने मुंह में हवा भरें और 10 से 30 सेकेंड तक मुंह को गुब्बारे की तरह फुलाकर रखें। 2 सेकेंड तक इसी मुद्रा में रहें और कम से कम 3 से 5 बार इसको करें। इसमें एक एक्सरसाइज और जोड़ लें। मुंह में हवा भरकर हवा को गालों में चारों ओर घुमाएं। एक ओर बाएं तरफ और एक बाद दाएं तरफ से।
इसे भी पढ़ें: Moringa के सेवन से कंट्रोल रहेगा Diabetes और वजन, शरीर को मिलेंगे जरूरी Vitamins
फेस टैपिंग
यह एक आसान फेशियल एक्सरसाइज है। भौंहों के बीच से टैपिंग शुरू करके माथे तक जाएं। इस दौरान आंखों के अंदर और आसपास के क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करें। फिर आंखों के बीच वाले प्वाइंट पर टैप करें, आंखों के नीचे और होंठों पर टैपिंग करें। इसके बाद ऊपरी होंठ और निचले गाल पर बाहर की ओर तक टैपिंग करें। लास्ट में पूरी गर्दन पर टैपिंग करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और स्किन को नेचुरल लालिमा मिलती है। वहीं यह स्किन में ऑक्सीजन के प्रवाह को भी बेहतर बनाता है।
पाउट
सोशल मीडिया पर इसका चलन भले ही नया हो, लेकिन इस मुद्रा से होठों और मुंह के आस-पास का क्षेत्र टोन होता है। यह आसान एक्सरसाइज न सिर्फ आपको अच्छे होंठ देता है, बल्कि मुंह के आसपास की झुर्रियां भी कम होती हैं। इसके लिए पाउट बनाएं और करीब 30 सेकेंड तक इसी मुद्रा में रहें। 4 से 5 बार इस प्रोसेस को दोहराएं।
फिश फेस वर्कआउट
यह भी पाउटिंग जैसी एक्सरसाइज है। लेकिन यह फेस योगा गाल को बढ़ाता है। इसको करने से गाल की मांसपेशियां और पूरे फेस की मांसपेशियां एक्टिव होती हैं। गाल की मांसपेशियों को टोन और मजबूत करता है। इसको करने से गाल की चर्बी कम होती है और फेस पतला और जवां दिखता है। इसको करने के लिए गालों और होठों को मछली के मुंह की तरह बनाएं और आंखों को खुला रखें। 30 सेकेंड तक इस मुद्रा में रहें, जब तक की आपकी आंखें झपकने न लगें। इस प्रोसेस को 4 से 5 बार दोहराएं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi






