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Face Yoga: चेहरे पर नैचुरल ग्लो लाने के लिए डेली रूटीन में शामिल करें ये 4 Face Yoga

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक स्क्रीन देखने, आराम की कमी और व्यस्त लाइफस्टाइल का असर अक्सर हमारे चेहरे पर नजर आने लगता है। वहीं कई बार पर्याप्त मेकअप के बाद भी हमारा चेहरा डल और थका हुआ लगता है। ऐसे में आप फेस योगा को अपनी डेली रूटीन में शामिल कर सकती हैं। इससे फेस और गर्दन की मांसपेशियों को हल्के मूवमेंट और स्ट्रेच के जरिए रिलैक्स किया जाता है। ऐसे में अगर आप भी अपने चेहरे पर निखार और ताजगी पाना चाहती हैं, तो इन आसान फेस योगा को अपने रूटीन में शामिल कर सकती हैं।

गुब्बारा मुद्रा

इस आसन को करने के लिए अपने मुंह में हवा भरें और 10 से 30 सेकेंड तक मुंह को गुब्बारे की तरह फुलाकर रखें। 2 सेकेंड तक इसी मुद्रा में रहें और कम से कम 3 से 5 बार इसको करें। इसमें एक एक्सरसाइज और जोड़ लें। मुंह में हवा भरकर हवा को गालों में चारों ओर घुमाएं। एक ओर बाएं तरफ और एक बाद दाएं तरफ से।

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फेस टैपिंग

यह एक आसान फेशियल एक्सरसाइज है। भौंहों के बीच से टैपिंग शुरू करके माथे तक जाएं। इस दौरान आंखों के अंदर और आसपास के क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करें। फिर आंखों के बीच वाले प्वाइंट पर टैप करें, आंखों के नीचे और होंठों पर टैपिंग करें। इसके बाद ऊपरी होंठ और निचले गाल पर बाहर की ओर तक टैपिंग करें। लास्ट में पूरी गर्दन पर टैपिंग करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और स्किन को नेचुरल लालिमा मिलती है। वहीं यह स्किन में ऑक्सीजन के प्रवाह को भी बेहतर बनाता है।

पाउट

सोशल मीडिया पर इसका चलन भले ही नया हो, लेकिन इस मुद्रा से होठों और मुंह के आस-पास का क्षेत्र टोन होता है। यह आसान एक्सरसाइज न सिर्फ आपको अच्छे होंठ देता है, बल्कि मुंह के आसपास की झुर्रियां भी कम होती हैं। इसके लिए पाउट बनाएं और करीब 30 सेकेंड तक इसी मुद्रा में रहें। 4 से 5 बार इस प्रोसेस को दोहराएं।

फिश फेस वर्कआउट

यह भी पाउटिंग जैसी एक्सरसाइज है। लेकिन यह फेस योगा गाल को बढ़ाता है। इसको करने से गाल की मांसपेशियां और पूरे फेस की मांसपेशियां एक्टिव होती हैं। गाल की मांसपेशियों को टोन और मजबूत करता है। इसको करने से गाल की चर्बी कम होती है और फेस पतला और जवां दिखता है। इसको करने के लिए गालों और होठों को मछली के मुंह की तरह बनाएं और आंखों को खुला रखें। 30 सेकेंड तक इस मुद्रा में रहें, जब तक की आपकी आंखें झपकने न लगें। इस प्रोसेस को 4 से 5 बार दोहराएं।

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Moringa के सेवन से कंट्रोल रहेगा Diabetes और वजन, शरीर को मिलेंगे जरूरी Vitamins

हेल्दी रहने के लिए बेहतरीन डाइट का होना भी काफी जरुरी है। मोरिंग जिसे आम भाषा में सहजन कहा जाता है। असल में यह एक ऐसा वृक्ष है जिसके सभी भाग उपयोग में आते हैं। इसकी फलियां, पत्तियां, फूल, बीज, तना और जड़ सभी औषधि के रुप में कारगर है।

साइंस में इसे चमत्कारी वृक्ष माना जाता है। आज ही नहीं हजारों साल पहले भी इससे प्राकृतिक चिकित्सा में प्रयोग किया जा रहा है। असल में इस वृक्ष के प्रति भाग में प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और मैग्नेशियम जैसे मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इसकी आप सब्जी, सूप या पाउडर का सेवन कर सकते हैं।

पोषण से भरपूर सहजन की सब्जी

कुछ लोग ही सिर्फ इडली सांभर में इसका प्रयोग जानते हैं, लेकिन बंगाल, यूपी, बिहार इन राज्यों में इसकी फलियों की सब्जियां बनाई जाती है। आप चाहें तो इस सब्जी के साथ चावल या फिर रोटी कुछ भी खा सकते हैं। यदि आप इसे घर पर बनाना चाहते हैं, तो पहले इसके रेशों को अच्छी तरह से निकाल लें, वरना खाते समय यह गले में फंस जाने से परेशानी होती है। इसलिए इसमें हल्का मसाला और पानी डालकर इसे पका लें। इस बात का ध्यान रखें कि सहजन को ज्यादा उबालने से इसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

इम्यूनिटी बूस्टर है सहजन का पाउडर

सहजन की सब्जी ही नहीं इसका सूप और इसके फूल के पकौड़े भी काफी टेस्टी होती है और पौष्टिक से भरपूर होते हैं। यही नहीं, सहजन की छाल, जड़ और पत्तों से बना पाउडर या चूर्ण रोग प्रकिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। इस पाउडर में इतनी शक्ति होती है कि आपको किसी सप्लीमेंट्स की जरुरत नहीं पड़ती है। आप चाहें तो इसे किसी भी तरह के पेय पदार्थ में मिलाकर पी सकते हैं, दूध, चाय, दाल या फिर गुनगुना पानी। वहीं, आप इसका सूप भी बना सकते हैं। रोजाना खाली पेट इसके सेवन से डायबिटीज और वजन नियंत्रण में आता है। पाचन में सुधार होता है और हड्डियां मजबूत होती हैं।

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  Sports

न्यूजीलैंड से जीत को कभी तरसता था भारत:पहली जीत में 10 साल लगे; अब लगातार तीसरी टी-20 सीरीज जीतने का मौका

2007 में भारत ने पहला टी-20 वर्ल्ड कप जीता था। टूर्नामेंट में टीम को सिर्फ एक हार मिली और वह न्यूजीलैंड के खिलाफ थी। इसके बाद भी भारत को इस टीम के खिलाफ पहली जीत हासिल करने में 10 साल लग गए। अब तस्वीर बदल चुकी है। 2020 से भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार पांच द्विपक्षीय टी-20 सीरीज जीत चुका है। इनमें तीन सीरीज भारत में और दो न्यूजीलैंड में खेली गईं। 22 अक्टूबर से न्यूजीलैंड में पांच मैचों की सीरीज शुरू होगी। यह बदलाव कैसे आया, न्यूजीलैंड में खेलना भारत के लिए अलग चुनौती क्यों है और इस बार कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने क्या सवाल होंगे? इसे 5 फैक्ट में समझते हैं… 1. पहली जीत 53 रन से मिली भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहला टी-20 मुकाबला 2007 में जोहान्सबर्ग में हुआ था। भारत को इसमें 10 रन से हार मिली। 2009 के न्यूजीलैंड दौरे पर भी टीम इंडिया दोनों मैच गंवा बैठी। 2012 में चेन्नई में जीत करीब आई, लेकिन भारतीय टीम एक रन से चूक गई। 2016 के टी-20 वर्ल्ड कप में नागपुर में घरेलू मैदान पर खेलते हुए भी भारत 47 रन से हार गया। लगातार नाकामियों के बाद भारत ने 1 नवंबर 2017 को दिल्ली में पहली बार न्यूजीलैंड को हराया। रोहित शर्मा और शिखर धवन ने 80-80 रन की पारियां खेलीं, जिससे मेजबान टीम ने 20 ओवर में 202/3 का स्कोर बनाया। जवाब में कीवी टीम 149/8 तक ही पहुंच सकी। भारत ने 53 रन से मुकाबला जीत लिया। 2. 2020 से भारत का दबदबा, लगातार 5 सीरीज जीतीं भारत की तस्वीर 2020 में बदली। न्यूजीलैंड दौरे पर पांच मैचों की सीरीज में भारतीय टीम ने सभी मुकाबले जीते। इनमें दो मैच निर्धारित 20 ओवरों के बाद टाई हुए थे, लेकिन दोनों बार भारत ने सुपर ओवर में जीत दर्ज की। सुपर ओवर वह अतिरिक्त ओवर होता है, जिसमें टाई मैच का फैसला करने के लिए दोनों टीमों को एक-एक ओवर खेलने का मौका मिलता है। इसके बाद 2021 में न्यूजीलैंड भारत दौरे पर आया। भारतीय टीम ने तीनों मैच जीतकर सीरीज 3-0 से अपने नाम की। 2022-23 में भारत ने न्यूजीलैंड में फिर सीरीज जीती। पहले मैच में बारिश के कारण खेल नहीं हो सका। दूसरे में सूर्यकुमार यादव के नाबाद 111 रन की मदद से भारत ने 65 रन से जीत दर्ज की। तीसरा मैच बारिश से प्रभावित हुआ और डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) नियम के तहत टाई रहा। यह नियम बारिश के कारण ओवर कम होने पर दोनों टीमों के लक्ष्य की तुलना करने के लिए इस्तेमाल होता है। 3. न्यूजीलैंड की धरती पर पहली जीत 2019 में मिली न्यूजीलैंड की धरती पर पहली जीत के लिए टीम को फरवरी 2019 तक इंतजार करना पड़ा। ऑकलैंड में खेले गए दूसरे मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को सात विकेट से हराया। हालांकि, तीन मैचों की सीरीज न्यूजीलैंड ने 2-1 से जीती थी। न्यूजीलैंड में खेलना आसान नहीं है। इसकी वजह वहां की परिस्थितियां हैं। कुछ मैदानों पर नई गेंद से तेज गेंदबाजों को हवा में स्विंग और पिच से उछाल मिल सकता है। मैदान की बाउंड्री भी हर दिशा में एक जैसी नहीं होती, इसलिए बल्लेबाजों को यह समझना होता है कि किस दिशा में शॉट खेलना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। 4. 2026 में वर्ल्ड कप फाइनल में हराया भारत ने इस साल टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में भी न्यूजीलैंड को हराया था। 8 मार्च को अहमदाबाद में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 255/5 रन बनाए। संजू सैमसन ने 46 गेंदों पर 89 रन, ईशान किशन ने 25 गेंदों पर 54 रन और अभिषेक शर्मा ने 21 गेंदों पर 52 रन बनाए। भारत ने पारी के पहले छह ओवर यानी पावरप्ले में बिना विकेट गंवाए 92 रन जोड़ दिए। इसका मतलब था कि टीम ने शुरुआत से ही तेज रन बनाए और कोई विकेट भी नहीं खोया। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 159 रन पर ऑलआउट हो गई। जसप्रीत बुमराह ने 15 रन देकर चार विकेट लिए, जबकि अक्षर पटेल को तीन विकेट मिले। 5. श्रेयस की कप्तानी और भुवनेश्वर की वापसी पर नजर इस सीरीज में भारत की कप्तानी श्रेयस अय्यर करेंगे और न्यूजीलैंड की टीम मिचेल सैंटनर की अगुआई में उतरेगी। अय्यर के लिए यह सीरीज सिर्फ जीत का सिलसिला आगे बढ़ाने का मौका नहीं है, बल्कि विदेशी परिस्थितियों में रणनीतिक फैसले लेने की परीक्षा भी होगी। कप्तान को मैच के दौरान कई फैसले लेने होते हैं। शुरुआत में किस बल्लेबाज को भेजना है, किस गेंदबाज को किस समय गेंद देनी है और आखिरी ओवरों में रन तेजी से बनाने के लिए कितने विकेट बचाने हैं। अय्यर की कप्तानी में भारत का विदेश में रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। टीम को आयरलैंड ने पहली बार हराया था। इसके बाद इंग्लैंड से भी टीम को हार का सामना करना पड़ा। भुवनेश्वर कुमार की वापसी भी भारत के लिए अहम होगी। उन्होंने आखिरी मैच नवंबर 2022 में खेला था। नई गेंद से गेंद को हवा में घुमाना उनकी खासियत रही है। Tue, 20 Oct 2026 23:00:00

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