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प्रोफेसर की नौकरी छोड़ शुरू किया तेल का कारोबार, सालाना हुआ 50 लाख का टर्नओवर, जानें रांची के प्रतीक की सफलता का राज

Business Idea: झारखंड के रांची के प्रतीक ने प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर एसेंशियल ऑयल का बिजनेस शुरू किया. वह विभिन्न राज्यों से पौधे लाकर तेल तैयार करते हैं. उनका सालाना टर्नओवर 50 लाख से अधिक है और ब्यूटी इंडस्ट्री में उनके सामान को काफी पसंद किया जाता है. आइये जानते हैं इसके बारे में.

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OpenAI में जासूसी के खुलासे से हड़कंप! AI ने पकड़ा अपना ही इंजीनियर Abdulrahman Alfozan, Silicon Valley में मचा घमासान

दुनिया को AI की ताकत दिखाने वाली अमेरिकी कंपनी OpenAI के अपने दफ्तर में ही जासूसी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस खबर के सामने आते ही सैन फ्रांसिस्को से लेकर सिलिकॉन वैली तक हड़कंप मच गया है। दरअसल, कंपनी के एक इंजीनियर पर आरोप है कि उसने बड़े अधिकारियों की गुप्त बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए कमरे में छिपकर एक डिवाइस लगा दिया। मामला खुला तो OpenAI ने अपने ही AI की मदद से आरोपी का सुराग खोज निकाला और बात FBI तक पहुंच गई। उधर, Apple पर भी आरोप लगे हैं कि उसके पास OpenAI के 100 से ज्यादा गोपनीय दस्तावेज पहुँचे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि AI की दुनिया में आखिर कौन किसके राज चुरा रहा है? सवाल यह भी है कि क्या तकनीक की इस जंग में कंपनियों के सबसे बड़े रहस्य भी सुरक्षित नहीं रहे?

टॉयलेट पेपर के पीछे छिपा था जासूसी का कथित उपकरण

अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, OpenAI के सैन फ्रांसिस्को कार्यालय में 30 सितंबर को सुरक्षा जांच के दौरान एक अंगूठे के आकार का रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। इसे एक कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे USB पोर्ट में लगाया गया था और कथित तौर पर टॉयलेट पेपर से छिपाया गया था, ताकि सामान्य जांच में इसका पता न चले। जांच में सामने आए विवरणों के मुताबिक, डिवाइस में माइक्रोफोन, अलग किया जा सकने वाला कैमरा सेंसर और माइक्रोएसडी स्टोरेज जैसी सुविधाएं थीं। इसमें रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने के लिए एन्क्रिप्शन और डेटा ट्रांसफर की क्षमता होने की भी बात कही गई है। बताया गया कि यह कमरा OpenAI के अधिकारियों की उन बैठकों के लिए इस्तेमाल होता था, जिनमें कंपनी की अत्याधुनिक AI तकनीक, भविष्य के उत्पादों, कारोबारी रणनीति और संभावित साझेदारियों पर चर्चा होती थी। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के मुताबिक, डिवाइस को लगभग 28 सितंबर को लगाया गया था। हालांकि, उसकी सामग्री एन्क्रिप्टेड होने के कारण रिकॉर्डिंग तक पहुंच नहीं बन सकी।

इसे भी पढ़ें: OpenAI के बैठक कक्ष में गुप्त रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाने पर इंजीनियर गिरफ्तार

AI ने ही खोज निकाला कथित आरोपी का सुराग

इस मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब OpenAI ने बताया कि उसने डिवाइस को समझने और उसके स्रोत का पता लगाने के लिए अपने AI मॉडल्स का इस्तेमाल किया। कंपनी के मुताबिक, इस विश्लेषण से उसे उस कर्मचारी की पहचान करने में मदद मिली, जिसने डिवाइस लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों ने 35 वर्षीय सऊदी नागरिक अब्दुलरहमान अलफोजान को 9 अक्टूबर को गिरफ्तार किया। वह OpenAI में इंजीनियरिंग लीड के रूप में काम कर चुका था और जुलाई 2025 में कंपनी से जुड़ा था। वह अमेरिका का स्थायी निवासी भी बताया गया है।

साथ ही अभियोजन पक्ष के आरोप इससे भी आगे जाते हैं। जांचकर्ताओं का दावा है कि अलफोजान ने कंपनी की इमारतों, मीटिंग रूम, बैठकों के कैलेंडर और अधिकारियों की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए एक प्रोडक्टिविटी टूल का इस्तेमाल किया। आरोप है कि 24 से 30 सितंबर के बीच उसने अपनी पत्नी से जुड़े AI चैटबॉट अकाउंट पर रिकॉर्डिंग डिवाइस बनाने, लगाने, छिपाने और दूर से संचालित करने से संबंधित सवाल भी पूछे।

शिकायत में CCTV फुटेज का भी उल्लेख है। जांचकर्ताओं के मुताबिक, कुछ मौकों पर अलफोजान को उस कॉन्फ्रेंस रूम के आसपास देखा गया, जहां जाने या बैठक में शामिल होने की उसे अनुमति नहीं थी। पांच अक्टूबर की फुटेज में कथित तौर पर उसे टीवी के पीछे देखते हुए दिखाया गया। उसी दिन दूसरे कमरे में छोड़े गए एक बैग की तलाशी के दौरान सुरक्षा कर्मियों को एक अन्य एन्क्रिप्टेड रिकॉर्डिंग डिवाइस मिलने का भी दावा किया गया है।

अलफोजान पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए मौखिक बातचीत को अवैध रूप से रिकॉर्ड करने या ऐसा करने का प्रयास करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि दोषी पाए जाने पर उसे पांच साल तक की जेल, 2.5 लाख डॉलर का जुर्माना और तीन साल तक निगरानी में रिहाई की सजा हो सकती है।

OpenAI का दावा: डेटा चोरी का सबूत नहीं

उधर, इतने गंभीर आरोपों के बावजूद OpenAI ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उसे ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि आरोपी ने कंपनी के मॉडल वेट्स, सोर्स कोड या ग्राहकों के डेटा तक अनुचित पहुंच बनाई अथवा उन्हें बाहर भेजा। कंपनी ने मामला FBI को सौंपने और जांच में सहयोग करने की बात कही है। FBI निदेशक काश पटेल ने इसे अमेरिकी AI नवाचार की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया है। वहीं अब्दुलरहमान अलफोजान का पेशेवर अनुभव भी ध्यान खींचता है। वह इससे पहले Meta, Microsoft और SAP जैसी कंपनियों में काम कर चुका है। वह MIT से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की डिग्रीधारी बताया गया है और निवेश फर्म Raed Ventures से भी जुड़ा है।

Apple और OpenAI की जंग में 100 से ज्यादा फाइलों का विवाद

उधर, Apple के साथ चल रहे कानूनी विवाद ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है। OpenAI का आरोप है कि उसका एक पूर्व कर्मचारी कंपनी के उत्पाद से जुड़ी 100 से अधिक फाइलें अपने निजी अकाउंट पर भेजने के बाद Apple के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने उस उत्पाद का प्रेजेंटेशन दे चुका था। हालांकि, Apple ने इन आरोपों को खारिज किया है। OpenAI की ओर से अदालत में दाखिल याचिका के मुताबिक, Apple में नौकरी करने पहुंचे उसके एक पूर्व कर्मचारी ने 100 से अधिक फाइलें अपने निजी अकाउंट पर भेजी थीं। आरोप है कि उसने बाद में अपने उत्पाद से जुड़ी प्रस्तुति Apple के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने दी। OpenAI को आशंका है कि उसकी गोपनीय जानकारी अब Apple के भीतर मौजूद हो सकती है और कंपनी के इंजीनियर इसका इस्तेमाल अपने आगामी उत्पादों को विकसित करने में कर सकते हैं। हालांकि Apple ने कहा है कि उसके पास पूर्व नियोक्ताओं की गोपनीय जानकारी के इस्तेमाल को रोकने के लिए नीतियां और प्रक्रियाएं हैं तथा उसकी जांच में अब तक OpenAI की फाइलें Apple के सर्वरों पर नहीं मिली हैं।

Apple के वकीलों ने यह भी कहा कि OpenAI द्वारा बताए गए दो निजी फोन नंबर उस कर्मचारी के Apple कार्य-संबंधी नंबर से मेल नहीं खाते। Apple के अनुसार, उसे कथित प्रेजेंटेशन की जानकारी भी नहीं थी और उसने OpenAI से अतिरिक्त विवरण मांगे थे। कंपनी का आरोप है कि OpenAI ने जवाब देने के बजाय अदालत का रुख किया। हम आपको यह भी बता दें कि OpenAI की ओर से Apple के पूर्व कर्मचारियों द्वारा गोपनीय जानकारी ले जाने के आरोपों को भी पहले खारिज किया जा चुका है।

इस बीच, अदालत ने Apple को अपने कुछ पूर्व कर्मचारियों के डिजिटल उपकरणों से डेटा जुटाने और तीन लोगों से निर्धारित समय से पहले पूछताछ करने की अनुमति दी है। इनमें पूर्व वरिष्ठ सिस्टम इंजीनियर चांग लियू और iPhone तथा Apple Watch के डिजाइन से जुड़े रहे पूर्व उपाध्यक्ष टैंग येव टैन शामिल हैं। मुकदमे की सुनवाई अक्टूबर 2027 में होने की संभावना है, हालांकि OpenAI ने जून 2027 तक तैयार होने की बात कही है। देखा जाये तो इन दोनों मामलों में अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं। रिकॉर्डिंग डिवाइस से कोई संवेदनशील जानकारी बाहर गई या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। इसी तरह Apple के पास OpenAI की गोपनीय जानकारी पहुंचने के आरोप भी अभी साबित नहीं हुए हैं।

बहरहाल, एक बात साफ है। AI की दुनिया में जंग अब सिर्फ सबसे ताकतवर मॉडल बनाने की नहीं, बल्कि एक-दूसरे के तकनीकी राज हथियाने और अपने रहस्यों को बचाने की भी है। किसके पास कितनी उन्नत तकनीक है, कौन अगली बड़ी छलांग लगाने वाला है और किसकी गोपनीय जानकारी किसके हाथ लग रही है, इन्हीं सवालों के बीच दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां आमने-सामने हैं। हैरानी देखिए, जिस AI को इंसानी दिमाग की सबसे जटिल पहेलियां सुलझाने के लिए बनाया गया, वही अब जासूसी के सुराग खोजने और साजिशों का पर्दाफाश करने में जुटा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब तकनीक के महारथी ही एक-दूसरे के राज तलाशने में लगे हों, तो इस डिजिटल महायुद्ध में आखिर किसके रहस्य सुरक्षित हैं और किसकी अगली चाल पहले ही बेनकाब हो जाएगी?

-नीरज कुमार दुबे

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  Sports

WPL 2027 Auction कोच्चि में 28 अक्टूबर को, Sophia Dunkley और Sophie Molineux की बेस प्राइस 50 लाख

महिला प्रीमियर लीग 2027 की नीलामी से पहले खिलाड़ियों की सूची सामने आ गई है। इस बार इंग्लैंड की सोफिया डंकली और ऑस्ट्रेलिया की सोफी मोलिन्यू ने सबसे ऊंची आधार कीमत 50 लाख रुपये रखी है। वहीं, जी कमालिनी, किरण नवगिरे, हीदर ग्राहम और जेस जोनासन ने 40 लाख रुपये की आधार कीमत के साथ अपना नाम दर्ज कराया है। खिलाड़ियों को खरीदने के लिए सभी 5 टीमों के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है।

महिला प्रीमियर लीग की नीलामी 28 अक्टूबर को केरल के कोच्चि में होगी। इसमें कुल 146 खिलाड़ी शामिल होंगी, जबकि टीमों के पास भरने के लिए 27 जगह खाली हैं। इनमें 20 जगह भारतीय खिलाड़ियों और 7 जगह विदेशी खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध हैं। ऐसे में सीमित जगहों के कारण टीमों को अपनी जरूरत और उपलब्ध बजट के हिसाब से खिलाड़ियों का चुनाव करना होगा।

नीलामी में 30 खिलाड़ियों ने 30 लाख रुपये की आधार कीमत रखी है। इस सूची में चमारी अटापट्टू, ग्रेस हैरिस, क्लो ट्रायन और स्नेह राणा शामिल हैं। वहीं, 4 खिलाड़ियों ने अपनी आधार कीमत 20 लाख रुपये तय की है। बाकी 106 खिलाड़ियों ने 10 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ पंजीकरण कराया है।

पूरी सूची में 119 भारतीय खिलाड़ी शामिल हैं। इनमें 22 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुकी हैं, जबकि 97 ऐसी खिलाड़ी हैं जिन्होंने अभी तक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेला है। विदेशी खिलाड़ियों की संख्या 27 है, जिनमें 6 खिलाड़ी ऐसे देशों से आती हैं जो क्रिकेट के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समूह के पूर्ण सदस्य नहीं हैं।

टीमों की तैयारी की बात करें तो मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने ग्रेस हैरिस समेत 4 खिलाड़ियों को टीम से बाहर किया है। गुजरात जायंट्स ने सबसे ज्यादा 15 खिलाड़ियों को अपने साथ बनाए रखा और डैनी वायट-हॉज समेत 4 खिलाड़ियों को रिलीज किया। मुंबई इंडियंस ने 11 खिलाड़ियों को बरकरार रखा और 6 को छोड़ा। दिल्ली कैपिटल्स ने 13 खिलाड़ियों को टीम में बनाए रखा, जबकि लिजेल ली और स्नेह राणा समेत 6 खिलाड़ियों को रिलीज किया।

यूपी वॉरियर्ज ने सबसे ज्यादा 9 खिलाड़ियों को रिलीज किया है। इनमें डिएंड्रा डॉटिन, क्लो ट्रायन और किरण नवगिरे शामिल हैं। टीम ने तारा नॉरिस को 10 लाख रुपये में मुंबई इंडियंस के साथ ट्रेड भी किया है। इसके बाद यूपी वॉरियर्ज के पास 3.75 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा बजट बचा है। साथ ही उसे 8 खिलाड़ियों की जगह भरनी है, जिनमें 5 भारतीय और 3 विदेशी खिलाड़ी हो सकती हैं।

अन्य टीमों के पास उपलब्ध बजट और खाली जगहों पर नजर डालें तो रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पास 1.15 करोड़ रुपये और 5 जगह हैं। मुंबई इंडियंस के पास 90 लाख रुपये और 6 जगह हैं, जबकि दिल्ली कैपिटल्स के पास 1.10 करोड़ रुपये और 5 जगह खाली हैं। गुजरात जायंट्स के पास 1.25 करोड़ रुपये और 3 जगह बची हैं। मुंबई को सभी 6 जगह भारतीय खिलाड़ियों से भरनी हैं, जबकि बाकी टीमों के पास विदेशी खिलाड़ियों को शामिल करने का भी मौका है।

गौरतलब है कि नीलामी में टीमों को सीमित बजट में मजबूत संयोजन तैयार करना होगा। ऊंची आधार कीमत वाली खिलाड़ियों के अलावा कम कीमत पर उपलब्ध प्रतिभाओं पर भी सबकी नजर रहेगी। नीलामी के बाद ही साफ होगा कि कौन सी टीम अपने खाली स्थानों को सबसे बेहतर तरीके से भर पाती है और आगामी सीजन के लिए मजबूत टीम तैयार करती है।

Mon, 19 Oct 2026 22:14:00 +0530

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