Income Tax: क्या 12 लाख रुपये तक नहीं देना होगा टैक्स? जानें नई टैक्स व्यवस्था के 5 बड़े फायदे
Income Tax: नई टैक्स व्यवस्था को लेकर कई करदाताओं में यह धारणा है कि इसमें पुरानी व्यवस्था की तुलना में कम कटौतियां मिलती हैं। पुरानी प्रणाली में 80C, 80D और होम लोन ब्याज जैसे प्रावधानों के तहत टैक्स बचत के कई विकल्प उपलब्ध थे।
हालांकि नई टैक्स व्यवस्था में कम दरों और कुछ अहम लाभों के कारण यह मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
सेक्शन 87A के तहत टैक्स रिबेट
आयकर अधिनियम 1961 के सेक्शन 87A के तहत नई टैक्स व्यवस्था में अधिकतम 60,000 रुपये तक की टैक्स रिबेट मिल सकती है। इस प्रावधान के कारण यदि किसी व्यक्ति की सालाना आय 12 लाख रुपये तक है तो उसे आयकर नहीं देना पड़ सकता। यह सुविधा खास तौर पर सैलरी पाने वाले मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए राहत देती है।
75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन
नई टैक्स व्यवस्था में वेतनभोगी कर्मचारियों को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। इससे उनकी टैक्स योग्य आय कम हो जाती है। इस लाभ को जोड़ने पर प्रभावी रूप से 12.75 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स देनदारी शून्य के करीब पहुंच सकती है, जो अंतिम गणना पर निर्भर करती है।
NPS में नियोक्ता का योगदान: सेक्शन 80CCD(2)
यदि नियोक्ता कर्मचारी के NPS खाते में योगदान करता है तो उस राशि पर सेक्शन 80CCD(2) के तहत टैक्स लाभ मिलता है। आम तौर पर यह वेतन का 10 प्रतिशत तक और कुछ मामलों में 14 प्रतिशत तक मान्य होता है। यह राशि कर योग्य आय से घटाई जाती है, जिससे कुल टैक्स देनदारी कम होती है।
ग्रेच्युटी पर टैक्स राहत
सेवानिवृत्ति या सेवा पूरी होने पर मिलने वाली ग्रेच्युटी भी टैक्स नियमों के तहत राहत देती है। सरकारी कर्मचारियों के लिए पूरी ग्रेच्युटी टैक्स मुक्त होती है। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी टैक्स फ्री है, जो सरकारी नियमों के अधीन है।
लीव एन्कैशमेंट पर भी छूट
रिटायरमेंट के समय अवकाश के बदले मिलने वाली राशि को लीव एन्कैशमेंट कहा जाता है। नई टैक्स व्यवस्था में तय सीमा तक यह राशि भी टैक्स मुक्त रहती है। यह प्रावधान रिटायरमेंट के समय अतिरिक्त आर्थिक राहत प्रदान करता है।
कुल मिलाकर नई टैक्स व्यवस्था में कटौतियां कम जरूर हैं, लेकिन कम टैक्स दर और प्रमुख लाभ इसे कई करदाताओं के लिए आकर्षक विकल्प बना सकते हैं। सही गणना और वित्तीय योजना के साथ यह व्यवस्था फायदेमंद साबित हो सकती है।
AI Impact: 2050 तक किसी को नौकरी की जरूरत नहीं होगी, भारतीय मूल के टेक दिग्गज का बड़ा दावा
AI Impact: नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में टेक जगत के दिग्गज और वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला ने ऐसा बयान दिया जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि साल 2050 तक हालात ऐसे हो जाएंगे कि लोगों को नौकरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
खोसला का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है कि पारंपरिक नौकरियों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, '2050 तक यह बिल्कुल साफ हो जाएगा कि किसी को नौकरी की जरूरत नहीं होगी।'
यह बयान उन्होंने कुछ दिन पहले की गई अपनी उस भविष्यवाणी के बाद दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगले पांच साल में आईटी सर्विसेज और बीपीओ सेक्टर लगभग खत्म हो जाएंगे। समिट के मंच से उन्होंने दो टूक कहा कि 2030 तक आईटी सर्विसेज और बीपीओ जैसा कुछ नहीं बचेगा। उनके मुताबिक, भारत जैसे देश, जिन्होंने आईटी आधारित विकास पर भरोसा किया है, उन्हें इस बदलाव को गंभीरता से लेना होगा।
खोसला ने यह भी कहा कि भारत में लोग अब भी मानने को तैयार नहीं हैं कि आईटी सेक्टर पर बड़ा असर पड़ने वाला है। उनके अनुसार, आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री 2030 तक गायब हो सकती है।
बड़ी कंपनियों में लंबे समय तक काम करने पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर कोई व्यक्ति 15-20 साल तक किसी बड़ी कंपनी में काम करता है, तो वह बदलते दौर में खुद को ढालने में पीछे रह सकता है। हालांकि, उन्होंने भारत की AI पहल की तारीफ भी की।
उन्होंने कहा कि इंडिया AI इम्पैक्ट समिट उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रहा। 3 लाख से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया। उन्होंने 'सॉवरेन AI' मॉडल का समर्थन करते हुए कहा कि हर देश को अपने राष्ट्रीय हितों के लिए अपना AI मॉडल विकसित करना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने भारतीय AI स्टार्टअप Sarvam AI में निवेश किया है।
खोसला का मानना है कि भारत में AI का सबसे बड़ा असर पब्लिक हेल्थकेयर में दिखेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि हर भारतीय को 24x7 लगभग मुफ्त AI डॉक्टर उपलब्ध कराना सबसे अहम लक्ष्य होना चाहिए।
उनके बयानों ने जहां एक तरफ उत्साह पैदा किया है, वहीं नौकरीपेशा लोगों में चिंता भी बढ़ा दी है। अब सवाल यही है कि क्या सच में 2050 तक नौकरी बीते दौर की बात हो जाएगी?
(प्रियंका कुमारी)
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