भारत में रजिस्टर्ड ड्रोन की संख्या 38,500 के पार; 39,000 से अधिक प्रमाणित रिमोट पायलट
नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। भारत में ड्रोन इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में पंजीकृत ड्रोन की संख्या 38,500 के पार पहुंच गई है और देश में फरवरी 2026 तक डीजीसीए-प्रमाणित रिमोट पायलटों की संख्या 39,890 हो गई है।
मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ड्रोन संचालन और रखरखाव के लिए 240 से अधिक मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए गए हैं, जो कुशल जनशक्ति तैयार कर रहे हैं।
सरकार के बयान के मुताबिक, ड्रोन का बढ़ता उपयोग एक मजबूत इकोसिस्टम को दर्शाता है, जिसमें निर्माता, सॉफ्टवेयर और कंपोनेंट डेवलपर, सेवा प्रदाता, प्रशिक्षण संस्थान, प्रमाणित पायलट, स्टार्टअप, शोध संस्थान और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह पूरा ढांचा एक समान नियामक व्यवस्था के तहत काम कर रहा है।
ड्रोन अब कृषि, भूमि और संपत्ति सर्वेक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग, आपदा आकलन और सरकारी सेवाओं में सक्रिय रूप से इस्तेमाल हो रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और काम की सटीकता बढ़ रही है।
स्वामित्व योजना के तहत अब तक 3.28 लाख गांवों का ड्रोन से सर्वे किया जा चुका है और 31 राज्यों के 1.82 लाख गांवों में 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि ड्रोन क्षेत्र अब पायलट प्रोजेक्ट से आगे बढ़कर एक मुख्यधारा और नवाचार-आधारित सेक्टर बन चुका है, जिसे प्रगतिशील नीतियों और वित्तीय प्रोत्साहन का समर्थन मिला है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1,094 ड्रोन महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को वितरित किए गए हैं, जिनमें से 500 से अधिक नमो ड्रोन दीदी पहल के तहत दिए गए हैं। इससे खेती की उत्पादकता और महिलाओं की आय में सुधार हो रहा है।
सरकार का मानना है कि स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा, रिमोट पायलटों के लिए कौशल विकास और केंद्र व राज्य योजनाओं के साथ एकीकरण से भारत ड्रोन तकनीक का उपयोग सामाजिक-आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए और बेहतर तरीके से कर सकेगा।
बयान में आगे कहा गया है कि ड्रोन का उपयोग रेलवे और राजमार्गों की निगरानी में भी किया जा रहा है। बढ़ते सरकारी समर्थन, बजट आवंटन और नवाचार अनुदान के साथ भारत मानव रहित हवाई प्रणालियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
--आईएएनएस
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Surya Grahan 2026: साल के पहले सूर्य ग्रहण की हुई शुरुआत, आसाम में दिखेगा 'रिंग ऑफ फायर' का नजारा, जानें क्या भारत में आएगा नजर
Surya Grahan 2026: आज यानी 17 फरवरी 2026 को साल के पहले सूर्य ग्रहण की शुरुआत हो चुकी है. हिंदू धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों का ही विशेष महत्व है. परंपराओं के अनुसार ग्रहण के दौरान किसी भी तरह का शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है. ज्योतिष के अनुसार, साल का पहला सूर्य कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगने जा रहा है जिसकी वजह से यह बहुत ही विशेष ग्रहण होगा. चलिए जानते हैं कि क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा और किन देशों में इसे देखा जा सकेगा.
साल के पहले सूर्य ग्रहण की हुई शुरुआत
भारतीय समय के अनुसार, सूर्य ग्रहण आज दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर शुरु हो चुका है और यह शाम 07 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा. इसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट रहेगी. यह कंकड़ाकृति सूर्य ग्रहण होगा जिसको विज्ञान की भाषा में रिंग ऑफ फायर कहा जाता है. हालांकि रिंग ऑफ फायर का अद्भुत नजारा भारत के लोग नहीं देख सकेंगे क्योंकि भारत में यह सूर्य ग्रहण नहीं लग रहा है.
क्या भारत में सूतक काल मान्य होगा?
यह सूर्य ग्रहण भारत में देखने को नहीं मिलेगा. शास्त्रों के अनुसार, जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक काल नहीं माना जाता. इसलिए भारत में:मंदिरों के पट बंद नहीं होंगे, भोजन और दिनचर्या सामान्य रहेगी साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं है.
‘रिंग ऑफ फायर’ क्यों है खास?
इस सूर्य ग्रहण के दौरान एक बेहद दुर्लभ नजारा देखने को मिलेगा जिसे रिंग ऑफ फायर कहा जाता है. करीब 2 मिनट 20 सेकंड तक चंद्रमा सूर्य के लगभग 96% हिस्से को ढक लेगा. सूर्य का केवल बाहरी किनारा चमकता दिखाई देगा. आसमान में ऐसा लगेगा जैसे सूर्य के चारों ओर आग की चमकती अंगूठी बन गई हो. हालांकि, यह अद्भुत नजारा भारत से दिखाई नहीं देगा.
किन देशों में दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?
यह सूर्य ग्रहण इन क्षेत्रों में देखा जा सकेगा दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, जाम्बिया, तंजानिया, मॉरिशस, अंटार्कटिका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्से जैसे अर्जेंटीना और चिली इन देशों में रहने वाले लोग स्थानीय मान्यताओं के अनुसार नियमों का पालन कर सकते हैं.
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