कोडिंग अब टेक प्रोफेशनल्स का मुख्य काम नहीं रहेगा: इंफोसिस के नन्दन नीलेकणि
बेंगलुरु, 17 फरवरी (आईएएनएस)। इंफोसिस के सह-संस्थापक और चेयरमैन नन्दन नीलेकणि ने मंगलवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सॉफ्टवेयर बनाने और उसे लागू करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कोड लिखना टेक्नोलॉजी पेशेवरों का मुख्य काम नहीं रहेगा।
इंफोसिस के इन्वेस्टर डे कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नीलेकणि ने कहा कि एआई का यह बदलाव केवल तकनीक जोड़ने भर का नहीं है, बल्कि कंपनियों को अपने कस्टमर जर्नी, बिजनेस प्रोसेस और संगठनात्मक ढांचे पर दोबारा विचार करना होगा। उन्होंने इसे जड़ से बदलाव बताया।
नीलेकणि ने कहा कि भविष्य में टेक्नोलॉजी टैलेंट का मकसद सिर्फ कोडिंग करना नहीं होगा, बल्कि एआई सिस्टम को प्रभावी तरीके से काम करने लायक बनाना होगा। इससे नौकरियों की प्रकृति और कंपनियों के ऑपरेटिंग मॉडल में बदलाव आएगा।
उन्होंने कहा कि कंपनियों को एआई इंजीनियरिंग, एजेंट ऑर्केस्ट्रेशन और नॉन-डिटरमिनिस्टिक सिस्टम्स (गैर-निर्धारित प्रणालियों) को मैनेज करने जैसे नए कौशल की जरूरत होगी। ऐसे सिस्टम में एक ही प्रॉम्प्ट से हर बार अलग-अलग परिणाम मिल सकते हैं।
नीलेकणि ने चेतावनी दी कि कंपनियों को पुराने आईटी सिस्टम और तकनीकी कर्ज जैसी समस्याओं से भी निपटना होगा, जो एआई अपनाने में बाधा बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन उसका सही तरीके से लागू होना अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
उन्होंने कहा, मॉडल की क्षमता बढ़ रही है, लेकिन उसे लागू करना आसान नहीं है। इसके लिए संगठनात्मक बदलाव, बिजनेस में बदलाव, कर्मचारियों को दोबारा प्रशिक्षण देना और डेटा को साइलो से बाहर निकालना जरूरी है।
नीलेकणि की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। पिछले हफ्ते निफ्टी आईटी इंडेक्स एक ही दिन में 5.51 प्रतिशत तक गिर गया था। निवेशकों को आशंका है कि एआई आधारित बदलाव पारंपरिक आईटी सेवाओं को प्रभावित कर सकते हैं, जो भारतीय आईटी कंपनियों की बड़ी आय का स्रोत हैं।
इस महीने की शुरुआत में अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने क्लॉड कोवर्क नामक एआई असिस्टेंट लॉन्च किया, जिसमें ऑटोमेशन की नई सुविधा दी गई है। इसके बाद पारंपरिक आईटी सेवा कंपनियों में चिंता बढ़ गई।
अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस घटनाक्रम को सासपोकेलिप्स बताया। कुछ विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यदि एजेंटिक एआई पारंपरिक सेवाओं की जगह लेता है, तो कंपनियों के रेवेन्यू में 40 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, खासकर तब जब पहले से ही मुनाफे पर दबाव बना हुआ है।
--आईएएनएस
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योगी सरकार लेने जा रही है बड़ा फैसला, विधायक निधि से दुर्घटना और सामान्य बीमारी में मिल सकेगी मदद
UP News: योगी सरकार राज्य के गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए तमाम योजनाएं चला रही है. जिससे उन्हें बेहतर जीवन दिया जा सके. इसी कड़ी में योगी सरकार ने एक और राहत भरी खबर दी है. दरअसल, सीएम योगी के आश्वासन के बाद अब विधायक निधि (MLALAD) के नियमों में ऐतिहासिक संशोधन की तैयारी शुरू हो गई है. जिसके तहत जल्द ही राज्य में विधायक निधि के पैसों का इस्तेमाल न सिर्फ 'असाध्य रोगों' के लिए, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और सामान्य बीमारियों के इलाज में लोगों की मदद के लिए भी किया जा सकेगा.
राजा भैया की पहल पर हुई शुरुआत
बता दें कि विधायक निधि में इस महत्वपूर्ण बदलाव की पहल कुंडा से विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ 'राजा भैया' ने की. दरअसल, चालू विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए राजा भैया ने विधायक निधि के मौजूदा नियमों की विसंगतियों का मुद्दा जोरशोर से उठाया. जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान नियमावली के तहत सिर्फ 'असाध्य रोगों' जैसे जैसे कैंसर या किडनी फेलियर के लिए ही आर्थिक मदद का प्रावधान है.
इसके साथ ही राजा भैया ने सदन में बताया कि, "सड़क दुर्घटनाएं या कई अन्य गंभीर बीमारियां तकनीकी रूप से असाध्य रोगों की श्रेणी में नहीं आतीं, लेकिन उनका इलाज इतना महंगा होता है कि गरीब व्यक्ति उसे वहन नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि यदि 'असाध्य' शब्द की बाध्यता समाप्त कर दी जाए, तो विधायक अपने क्षेत्र के अधिक से अधिक जरूरतमंदों की जान बचा सकेंगे. सीएम योगी ने राजा भैया के इस सुझाव की सराहना की साथ ही सदन में ही आश्वस्त किया कि सरकार जनहित में इन नियमों को शिथिल करने पर विचार करेगी.
ग्राम्य विकास विभाग ने शुरू किया परीक्षण
वहीं अब सीएम के निर्देश के बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, ग्राम्य विकास विभाग ने विधायक निधि के वर्तमान दिशा-निर्देशों का सूक्ष्मता से परीक्षण करना शुरू कर दिया है. जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होगी, विभाग इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठकें शुरू करेगा और उसके बाद नए संशोधित शासनादेश जारी किए कर देगा. इसमें सहायता राशि की सीमा और पात्रता के मानकों को भी पुनर्परिभाषित किए जाने का अनुमान है.
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बता दें कि विधायक निधि के आड़े आने वाली एक और बड़ी अड़चन 'एक बार सहायता' का प्रावधान है. यानी वर्तमान में एक मरीज बीमारी के दौरान सिर्फ एक बार ही आर्थिक मदद दे सकता है. कई विधायकों का तर्क है कि इन बीमारियों में इलाज लंबा चलता है इसलिए महीज की सीमित मदद ही हो पाती है. ऐसा माना जा रहा है कि नई नियमावली में इस परेशानी को भी दूर किया जा सकता है. जिससे मरीजों को एक से ज्यादा बार मदद मिल सकेगी.
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