सिंधी कार्यकर्ता हिदायतुल्ला लोहार की हत्या के दो साल पूरे होने पर, सिंधी प्रवासी समुदाय के सदस्य लंदन में उनकी स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित करने और जवाबदेही की मांग को दोहराने के लिए एकत्रित हुए, साथ ही उन्होंने मामले को लेकर पाकिस्तान के रवैये की कड़ी आलोचना की। जेएसएफएम ने कहा कि यह स्मृति कार्यक्रम जेय सिंध फ्रीडम मूवमेंट (जेएसएफएम) के नेताओं और समर्थकों के साथ-साथ वॉयस फॉर मिसिंग पर्सन्स ऑफ सिंध के यूरोप चैप्टर के प्रतिनिधियों द्वारा आयोजित किया गया था। उपस्थित लोगों ने लोहार की तस्वीर के सामने मोमबत्तियां जलाईं और फूल चढ़ाए, उन्हें सिंध में जबरन गायब किए जाने के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बताया। समारोह की शुरुआत सिंधी राष्ट्रगान से हुई, जिसके बाद एक मिनट का मौन रखा गया। जेएसएफएम अध्यक्ष सोहेल अब्रो, प्रवक्ता मंसूर अहमद हब, सारंग सिंधी, सईद सिंधी, मोहम्मद ओसामा सूमरो और ताहिर खान सहित कई राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सभा को संबोधित किया।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि लोहार की हत्या 16 फरवरी, 2024 को सिंध के नासिराबाद स्थित एक सार्वजनिक बाज़ार में कर दी गई थी। उन्होंने दावा किया कि यह हत्या सरकारी एजेंसियों से जुड़े व्यक्तियों द्वारा की गई थी और इस बात पर निराशा व्यक्त की कि संदिग्धों की पहचान होने के बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। कार्यक्रम को संबोधित करने वालों के अनुसार, लोहार को 2017 में जबरन गायब कर दिया गया था और लगभग दो साल हिरासत में रहने के बाद उन्हें रिहा किया गया था। उन्होंने कहा कि रिहाई के बाद भी उन्हें लगातार धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था।
कार्यकर्ताओं ने तर्क दिया कि इन दबावों के कारण ही अंततः उनकी हत्या हुई। प्रतिभागियों ने सिंध में मानवाधिकारों के व्यापक उल्लंघन के मुद्दे पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जबरन गायब किए जाने और कथित गैर-न्यायिक हत्याएं अभी भी एक गंभीर चिंता का विषय हैं, और कई परिवार अपने लापता प्रियजनों के बारे में जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। इस सभा ने एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र सहित वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से पाकिस्तान पर पारदर्शी जांच के लिए दबाव डालने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने का आह्वान किया।
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रमजान से पहले ही अब ईरान के आसमान में कयामत मंडरा रही है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका के फाइटर्स ने ईरान को चारों तरफ से घेर लिया है। ईरान के सामने अब करो या मरो के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। पहले F-15 और अब अमेरिका की तरफ से खतरनाक F35 की भी तैनाती कर दी गई है। मिडिल ईस्ट से आई तस्वीरों में 24 अमेरिकी F1-15 दिखाई दे रहे हैं। इनमें 12 F35A देखे जा सकते हैं। और 12 A10C की तैनाती भी दिखाई दे रही। पहले क़तर का अल उदैद एयरबेस और अब मुफाक साल्टी एयरबेस। अमेरिका ने कतर के अल उदैद और जॉर्डन के मुफाक साल्टी में अपनी जंगी बेड़ों की तैनाती कर दी है। तैयारी ऐसे वक्त में चल रही है जब दोनों तरफ से डील की खबरें सामने आ रही हैं।
हालांकि अमेरिकी गृह मंत्री मार्क रूबियो ने यह संकेत दिए हैं कि अब डील नहीं सीधे रण होगा। क्योंकि ईरान ने समझौते के सभी रास्ते बंद कर दिए। खबरों के मुताबिक अमेरिका के पास 300 से ज्यादा F35 विमान हैं। जिनमें से 35 विमान उसने मिडिल ईस्ट की तरफ मोड़ दिए। इसका इस्तेमाल लंबी दूरी के गुप्त ठिकानों को टारगेट करने के लिए किया जाता है। इसका डिजाइन ऐसा है कि यह रडार को भी चकमा दे सकता है। साथ ही यह सेंसर फ्यूजन टेक्नोलॉजी से भी लेस है। इस जेट में बीवीआर हथियार लगे हैं जो मटियार जैसी खतरनाक मिसाइलों को आसानी से निपटा सकते हैं।
एफ-35 वर्टिकल लैंडिंग और टेक ऑफ कर सकता है। यह एक ही वक्त में सेना के तीनों यूनिट से इंफॉर्मेशन शेयर कर सकता है। हालांकि वॉर की तैयारियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुली चेतावनी दी है। ट्रंप का कहना है कि ईरान के अडियल रुख की वजह से हमें B2 बम वर्ष विमान भेजने पड़े। इधर अमेरिका तैयार है। उधर ईरान ने भी संकेत दे दिए हैं कि अगर कोई गुस्ताखी की तो उसकी तरफ से भी मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। हमें नई ने साफ कर दिया है कि यह रमजान अमेरिका पर भारी पड़ेगा।
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