स्पेस में घूमता 'लाइट हाउस' है रहस्यमयी तारा 'पल्सर', सेकंड में लगाता है सैकड़ों चक्कर
नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। आजकल सोशल मीडिया पर पल्सर नाम का न्यूट्रॉन तारा छाया हुआ है, जो सेकंड भर में सैकड़ों बार चक्कर काटता है। तेजी से घूमने के साथ ही तेज आवाज भी निकालता है और इसमें गजब की चुंबकीय शक्ति पाई गई। ऐसे में नासा ने इसके बारे में जानकारी दी।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, पल्सर ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी और रोचक खगोलीय पिंडों में से एक हैं। ये न्यूट्रॉन तारे हैं, जो किसी बड़े तारे के सुपरनोवा विस्फोट के बाद बचे हुए उच्च घनत्व वाले कोर से बनते हैं। ये इतनी तेजी से घूमते हैं कि सेकंड में सैकड़ों बार चक्कर लगा सकते हैं और अपने चुंबकीय ध्रुवों से रेडियो तरंगों, एक्स-रे या गामा किरणों के पल्स छोड़ते हैं।
पृथ्वी से ये पल्स लाइटहाउस की बीकन लाइट की तरह नियमित अंतराल पर चमकते दिखाई देते हैं। पल्सर की खोज 50 साल पहले 1967 में हुई थी। इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने एक बड़े रेडियो टेलिस्कोप से डेटा का विश्लेषण करते हुए डेटा चार्ट पर असामान्य गड़बड़ी देखी थी। ये हर 1.33730 सेकंड में नियमित निशान बन रहे थे। शुरू में इसे एलियन सिग्नल समझकर लिटिल ग्रीन मेन नाम दिया गया, लेकिन जल्दी ही पता चला कि ये नेचुरल हैं।
इसके बाद कई और पल्सर खोजे गए। इस खोज के लिए 1974 में वैज्ञानिक हेविश और मार्टिन राइल को नोबेल पुरस्कार मिला था।
पल्सर बड़े तारों (सूर्य से 7 से 20 गुना भारी) के रूप में बनते हैं। विस्फोट के बाद बचा कोर बेहद उच्च घनत्व का होता है, इसके एक छोटी सी सामग्री का वजन भी पृथ्वी पर कई टन के बराबर होता है। इनमें बहुत मजबूत चुंबकीय क्षेत्र होते हैं और घूमने की गति बहुत तेज होती है। आज 2,000 से ज्यादा पल्सर ज्ञात हैं। नासा सालों बाद भी पल्सर पर अध्ययन कर रहा है।
एनआईसीईआर नासा का पहला ऐसा मिशन है, जो पल्सर के विशेष अध्ययन के लिए समर्पित है। यह जून 2017 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर लॉन्च हुआ और जल्द ही साइंस ऑपरेशन शुरू किया गया। एनआईसीईआर ने खोज के 50 साल पूरे होने पर पहले पल्सर पीएसआर बी1919 प्लस 21, जिसे सीपी1919 भी कहते हैं का अवलोकन किया।
एनआईसीईआर एक्स-रे अवलोकन करता है, जो पल्सर की मिलियन-डिग्री सतह और मजबूत चुंबकीय क्षेत्र से निकलती ऊर्जा को मापता है। इससे न्यूट्रॉन स्टार के अंदरूनी भाग की संरचना समझने में मदद मिलती है, जहां न्यूट्रॉन, प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और शायद क्वार्क्स अत्यधिक दबाव में रहते हैं।
एनआईसीईआर के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर कीथ जेंड्रेउ (गोडार्ड) के अनुसार, कई न्यूक्लियर फिजिक्स मॉडल हैं, लेकिन एनआईसीईआर की संवेदनशीलता, एक्स-रे रेजोल्यूशन और टाइमिंग से रेडियस और मास के सटीक माप मिलेंगे, जो मॉडल को बेहतर बनाएंगे।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एआई पंचायतों की सेवाओं तक लोगों की पहुंच बना रहा आसान : सुशील कुमार लोहानी
नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने मंगलवार को कहा कि सरकार जमीनीस्तर पर पंचायतों की गतिविधियों और प्रोग्राम को पहुंचाने के लिए एआई का उपयोग कर रही है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उदाहरण देते हुए लोहानी ने कहा कि सभासार नाम से एक एआई ऐप हमने विकसित किया है। यह ऐप ग्रामसभा की बैठक के मिनट्स को टेक्स में कुछ मिनट्स में परिवर्तित कर देता है। इस कार्य को पहले पंचायत सचिव को करने में तीन से चार घंटों का समय लगता था।
उन्होंने आगे कहा कि हम एआई को लगातार बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। हम ऐसे चैटबॉट आदि विकसित कर रहे हैं, जो कि आसानी से पंचायतों के प्रोग्राम की जानकारी लोगों तक पहुंचा सके। इसके अतिरिक्त इस समिट में बढ़ी संख्या में कारोबारी भी भाग ले रहे हैं।
एक्सेस पार्टनरशिप के स्ट्रेटजी और पार्टनरशिप के वाइस प्रेसिडेंट अभिनीत कौल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि यह ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाली पहली एआई समिट है। हम इस समिट में एआई को लागू करने वाले समाधानों पर अधिक ध्यान केंद्रित होता हुआ देख रहे हैं।
बीआईटीएस पिलानी डब्ल्यूआईएलपी के डीन प्रोफेसर पीबी वेंकटरमन ने कहा कि यह एक उच्च प्रभाव वाली एआई समिट होने वाली है। हमने भी यहां पर अपना स्टॉल लगाया है, जिसमें हमने तीन क्षेत्रों - शिक्षा में एआई, एआई में शिक्षा और उद्योगों में एआई पर फोकस किया है।
इसके अतिरिक्त एआई को ग्लोबल साइबर एलायंस के ब्रायन क्यूट ने कहा कि अगर हम एआई को सावधानीपूर्वक और पूरी जिम्मेदारी के साथ नैतिकता से तैनात करते हैं, तो इस काफी सारे फायदे हो सकते है। उन्होंने आगे कहा कि जिम्मेदार एआई विकसित करने से पूरे दुनिया को लाभ होगा।
--आईएएनएस
एबीएस/
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