टी20 विश्व कप में युवा ओपनर अभिषेक शर्मा की धीमी शुरुआत को लेकर चर्चा तेज है और अब पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने उन्हें सादा लेकिन अहम सलाह दी है। लगातार दो मैचों में खाता खोले बिना आउट होने के बाद अभिषेक पर दबाव बढ़ा है, ऐसे में गावस्कर ने उन्हें बुनियादी बातों पर ध्यान देने की नसीहत दी है।
बता दें कि टी20 विश्व कप 2026 में अभिषेक अब तक अपनी लय हासिल नहीं कर पाए हैं। हाल ही में स्पोर्ट्स टुडे से बातचीत में सुनील गावस्कर ने कहा कि अभिषेक को सबसे पहले एक सिंगल लेकर अपना खाता खोलना चाहिए, उसके बाद ही बड़े शॉट्स खेलने की कोशिश करनी चाहिए। उनके मुताबिक क्रीज पर समय बिताने से आत्मविश्वास लौटता है और फिर स्वाभाविक आक्रामक खेल सामने आता है।
गौरतलब है कि 23 वर्षीय अभिषेक टूर्नामेंट से पहले शानदार फॉर्म में थे और न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक जड़कर सुर्खियों में आए थे। हालांकि विश्व कप के दौरान वह बीमार पड़ गए और नामीबिया के खिलाफ मुकाबला नहीं खेल सके। मौजूद जानकारी के अनुसार, अस्पताल से लौटने के बाद कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ मैच में भी वह बिना खाता खोले आउट हो गए।
लगातार दो ‘डक’ के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या वह शुरुआत में जरूरत से ज्यादा आक्रामक होने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टी20 प्रारूप में तेज शुरुआत महत्वपूर्ण होती है, लेकिन बल्लेबाज को परिस्थितियों के अनुरूप संतुलन भी बनाना पड़ता है। गावस्कर ने भी इसी ओर इशारा करते हुए कहा कि जब खिलाड़ी सेट हो जाता है, तब वह अपनी सीमाओं से बाहर जाकर बड़े शॉट खेल सकता है।
भारत पहले ही सुपर 8 चरण में जगह बना चुका है, ऐसे में टीम प्रबंधन के पास अभिषेक को दोबारा आत्मविश्वास हासिल करने का मौका देने का विकल्प है। यदि वह शुरुआती दबाव से निकलकर अपनी स्वाभाविक लय में लौटते हैं, तो मध्यक्रम पर भी दबाव कम होगा।
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घरेलू क्रिकेट के मौजूदा सत्र में मोहम्मद शमी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अनुभव और कौशल का कोई विकल्प नहीं होता। रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में बंगाल के लिए खेलते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर के खिलाफ कालयाणी में आठ विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
बता दें कि रणजी ट्रॉफी के इस अहम मुकाबले में शमी ने बंगाल क्रिकेट ग्राउंड पर शानदार गेंदबाजी करते हुए जम्मू-कश्मीर की बल्लेबाजी क्रम को तहस-नहस कर दिया। पहली पारी के 59वें ओवर में विकेटकीपर-बल्लेबाज कनहैया वाधवन को कैच आउट कर उन्होंने अपना पांचवां विकेट पूरा किया और साथियों के साथ जोरदार जश्न मनाया। पूरे मैच में उनके आठ विकेट इस बात का संकेत हैं कि वह लगातार लय में लौट रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, 35 वर्षीय तेज गेंदबाज ने इस सत्र में अब तक सात मैचों में 38 विकेट हासिल किए हैं, जिसमें तीन बार पांच विकेट लेने का कारनामा शामिल है। इससे पहले सर्विसेज के खिलाफ उन्होंने दूसरी पारी में 5/51 का प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। ऐसे समय में जब भारतीय तेज आक्रमण की गहराई को लेकर चर्चा जारी है, शमी का यह प्रदर्शन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे श्रृंखला और आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 की टीम में शमी को जगह नहीं मिली थी। चोट के कारण हरषित राणा के बाहर होने पर मोहम्मद सिराज को शामिल किया गया। इसके अलावा उनका बीसीसीआई केंद्रीय अनुबंध भी समाप्त हो चुका है। भारत के लिए उनकी आखिरी उपस्थिति 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में रही थी।
शमी ने सीमित ओवरों के घरेलू टूर्नामेंट में भी प्रभाव छोड़ा है। विजय हजारे ट्रॉफी में सात मैचों में 15 विकेट लेकर उन्होंने यह दिखाया कि वह सिर्फ लाल गेंद ही नहीं, सफेद गेंद से भी असरदार साबित हो सकते हैं।
सेमीफाइनल मुकाबले में बंगाल ने पहली पारी में 328 रन बनाए, जिसमें सुदीप कुमार घरामी ने 146 रन की अहम पारी खेली। शमी की अगुआई में गेंदबाजी आक्रमण ने जम्मू-कश्मीर पर लगातार दबाव बनाए रखा, जिससे बंगाल ने मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना ली।
रणजी ट्रॉफी के बाद शमी आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए खेलते नजर आएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह इसी तरह फिटनेस और प्रदर्शन बरकरार रखते हैं, तो 2026 में भारत के चुनौतीपूर्ण टेस्ट कार्यक्रम को देखते हुए चयनकर्ताओं के लिए उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
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