गुजरात की 108 एंबुलेंस सेवा बनी जीवनरेखा, 19 वर्षों में 19.66 लाख लोगों की बचाई जान
गांधीनगर, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में सरकार की ‘108 इमरजेंसी मेडिकल सर्विस’ नागरिकों के लिए लाइफलाइन बन चुकी है। 108 सेवा केवल एंबुलेंस नहीं है, बल्कि अस्पताल पहुंचने से पहले मिलने वाली ‘प्री-हॉस्पिटल केयर’ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए 29 अगस्त 2007 को इसकी शुरुआत की थी।
अब यह सेवा 19 वर्ष पूरे कर 20वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इतने वर्षों से इसके जरिए आपदाग्रस्त या आपातकालीन स्थिति में फंसे जरूरतमंदों, गंभीर रूप से बीमार या घायल व्यक्तियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए निशुल्क एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
लाभार्थी अशोक साधु ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि जिस प्रकार 108 मनकों की माला का आध्यात्मिक महत्व यह है कि 108 नाम जपने से परमपिता परमात्मा प्रकट होते हैं, वैसे ही 108 एंबुलेंस इतनी जल्दी आ जाती है कि मानो देवदूत मदद के लिए आ गए हों। मेरे भाई को जीवन देने में 108 सेवा ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई
लाभार्थी महबूब अली ने बताया कि मेरे बेटे की तबीयत खराब थी, हमने 108 एंबुलेंस के लिए कॉल किया। इसके बाद गाड़ी आई और बेहतर सुविधा प्रदान की। एंबुलेंस के जरिए हम समय पर अस्पताल पहुंच पाए।
जीवीआर ईएमआरआई के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जसवंत प्रजापति ने कहा कि पूरे राज्य में करीब 800 रोड एंबुलेंस, 38 आईसीयू ऑन व्हील्स दो बोट एंबुलेंस और एक एयर एंबुलेंस चल रही हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मरीजों को पूरी तरह से इंटीग्रेटेड पेशेंट ट्रांसपोर्ट मिले इसके लिए हमने 586 सरकारी हेल्थ सेंटर की एंबुलेंस को भी अपने साथ इंटीग्रेट किया है इसलिए अभी 108 सर्विस के तहत लगभग 1,500 एंबुलेंस 24 घंटे कार्यरत हैं।
बीते 19 वर्षों के दौरान 108 इमरजेंसी सेवा द्वारा अगस्त 2026 तक कुल 1 करोड़ 99 लाख से अधिक इमरजेंसी मामलों में त्वरित सेवा प्रदान की जा चुकी है, जिसमें मुख्य रूप से 1 करोड़ 96 लाख से अधिक मेडिकल इमरजेंसी मामले, 2 लाख 55 हजार से ज्यादा पुलिस संबंधी इमरजेंसी मामले और 8 हजार से अधिक फायर संबंधी घटनाओं में समय पर सहायता पहुंचाई गई है।
इस दौरान 19 लाख 66 हजार से ज्यादा लोगों की जान बचाई गई है। 108 सेवा के माध्यम से 19 वर्षों में जहां 62 लाख 97 हजार से ज्यादा गर्भावस्था और प्रसूति संबंधी मामलों में आपातकालीन सहायता पहुंचाई गई है, वहीं 24 लाख 18 हजार से अधिक सड़क दुर्घटना के मामले, 11 लाख 77 हजार से ज्यादा श्वास संबंधी गंभीर मामलों और 9 लाख 87 हजार से अधिक हार्ट अटैक संबंधी मामलों में मरीजों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर प्री-हॉस्पिटल केयर प्रदान की गई है।
एंबुलेंस वाहनों को 62 करोड़ किलोमीटर से अधिक चलाया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में यह सेवा आज नई ऊंचाइयों को छू रही है और आज इसमें एयर एंबुलेंस और बोट एंबुलेंस सेवा जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जुड़ चुकी हैं। 108 सेवा के माध्यम से पूरे राज्य में हर 21 सेकेंड में एक 108 एंबुलेंस इमरजेंसी मामले के उपचार के लिए रवाना होती है और सर्विस का औसत रिस्पॉन्स टाइम 13 मिनट 9 सेकेंड है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों से बेहतर है।
108 एंबुलेंस सेवा ड्राइवर राजेंद्र सिंह सोढा ने बताया कि हमारा समय पर पहुंचने का कारण यह होता है कि इसमें जीपीएस सिस्टम भी लगा होता है। इसके अलावा हम सब रास्तों के जानकार होते हैं। जहां से छोटा रास्ता होता है वहां से हम पहुंचने का प्रयास करते हैं और जितना हो सके उतनी स्पीड में और सावधानीपूर्वक हम मरीज के पास पहुंचने की कोशिश करते हैं।
108 एंबुलेंस सेवा मेडिकल टेक्नीशियन शैलेश ठाकोर ने कहा कि क्रिटिकल मामलों में जब भी एक्सीडेंट या कोई भी इमरजेंसी कॉल हमारे पास आती है तो हम सबसे पहले मरीज को बचाने की पूरी कोशिश करते हैं। इमरजेंसी के लिए सभी उपकरण जैसे एईडी मशीन, मॉनिटर, वेंटिलेटर और एयरवे मैनेज करने के लिए विभिन्न उपकरण दिए गए हैं और यदि रास्ते में कोई भी मरीज कोलैप्स हो जाता है तो हम उन्हें सही तरीके से सीपीआर देकर अस्पताल पहुंचाते हैं।
इस इमरजेंसी सर्विस के सफल संचालन के लिए अहमदाबाद के नरोडा-कठवाडा में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर बनाया गया है। कुल मिलाकर रोजाना औसतन 4,780 मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली गुजरात सरकार की यह निशुल्क सेवा आज राज्य के प्रत्येक अंतिम छोर के नागरिक के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है।
--आईएएनएस
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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर, मौतों का आंकड़ा 1,196 पहुंचा, 2.13 लाख से अधिक मामले संदिग्ध
ढाका, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे का अभूतपूर्व प्रकोप फैला हुआ है। रविवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों के कारण सात बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही, इस प्रकोप से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 1,196 हो गई है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के मुताबिक, बांग्लादेश में हुई सभी सात मौतों को खसरे (मीजल्स) से जुड़ी संदिग्ध माना गया है।
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नई मौतों के साथ खसरे से जुड़ी संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 1,092 हो गई है, जबकि पुष्टि की गई मौतों की संख्या 104 पर ही बनी हुई है।
रविवार सुबह तक के 24 घंटों में बांग्लादेश में खसरे के 1,254 संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 2,13,244 हो गई है। इसी दौरान, खसरे के 65 नए मामलों की पुष्टि हुई, जिससे देश में कुल पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 23,122 हो गई है।
द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका ट्रिब्यून ने बताया है कि डीजीएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च से बांग्लादेश के अस्पतालों में खसरे के 189,484 संदिग्ध मरीजों को भर्ती कराया गया है। इनमें से 181,756 मरीज ठीक हो चुके हैं और उन्हें अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।
द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, डीजीएचएस में रोग नियंत्रण (डिजीज कंट्रोल) के पूर्व निदेशक बेनजीर अहमद ने पिछले हफ्ते कहा कि भले ही बांग्लादेश ने अप्रैल में यूनिसेफ के जरिए वैक्सीन मंगवाना फिर से शुरू करवा दिया है और इसके बाद एक आपातकालीन टीकाकरण अभियान भी चलाया है, लेकिन संक्रमण फैलने की रफ्तार को देखते हुए महामारी पर जल्द काबू पाना मुश्किल है।
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस दोबारा फैलाव के लिए पिछली टीकाकरण कवरेज में कमियों और अस्पताल तथा मरीज प्रबंधन में खामियों को जिम्मेदार ठहराया है। इनमें संक्रमित बच्चों की पहचान करने में देरी और उन्हें घर पर आइसोलेट (अलग) करने में हुई लापरवाही शामिल हैं।
द डेली स्टार से बातचीत में जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन ने बताया कि टीकाकरण के बाद बच्चों में पर्याप्त इम्युनिटी विकसित होने में आमतौर पर तीन से चार सप्ताह का समय लगता है। उन्होंने आगे कहा, इसलिए, संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने के मामलों और मौतों की मौजूदा लहर कम से कम एक और महीने तक जारी रह सकती है।
इससे पहले, एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था ने 2026 में खसरे के प्रकोप को बांग्लादेश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर जनस्वास्थ्य संकटों में से एक बताया था। साथ ही, इस बात पर भी जोर दिया कि टीकाकरण के जरिए इस बीमारी को रोका जा सकता है।
प्रिवेंटेबल ट्रैजेडी: बांग्लादेश का 2026 खसरा प्रकोप शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में, कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने कहा है कि भले ही आम जनता को यह खसरे का प्रकोप अचानक लगा हो, लेकिन महामारी विज्ञान के नजरिए से यह कोई अप्रत्याशित घटना नहीं थी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह संकट कई कारणों के मिलने से पैदा हुआ। इनमें 2024-2025 के दौरान मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली तत्कालीन अंतरिम सरकार के समय वैक्सीन की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई रुकावटें; नियमित टीकाकरण का छूट जाना; तय किए गए अतिरिक्त टीकाकरण कार्यक्रमों का रद्द होना; वैक्सीन खरीदने में प्रशासनिक देरी; और जोखिम वाली आबादी समूहों की समय रहते पहचान न कर पाना शामिल हैं।
--आईएएनएस
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