उम्र नहीं फिटनेस और फॉर्म देखें, Sunil Gavaskar ने Team India के लिए की Krunal Pandya की वकालत
भारतीय क्रिकेट में अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी को लेकर चर्चा तेज है। तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने लंबे इंतजार के बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी की है, जिसके बाद अब दूसरे सीनियर खिलाड़ियों को भी दोबारा मौका मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इसी बीच भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ऑलराउंडर क्रुणाल पांड्या की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और पूरी तरह फिट है, तो उसकी उम्र को टीम में चयन के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए।
भुवनेश्वर कुमार ने आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर करीब 1,425 दिन बाद भारतीय टीम में वापसी की है। उनके चयन से यह संकेत मिला है कि चयनकर्ता अनुभवी खिलाड़ियों को फिर से मौका देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की संभावित वापसी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, सुनील गावस्कर ने इस चर्चा के बीच क्रुणाल पांड्या का नाम आगे रखा है, जो पिछले कुछ समय से अपने खेल से प्रभावित कर रहे हैं।
क्रुणाल ने 2026 के आईपीएल सत्र में गेंद और बल्ले दोनों से अहम योगदान दिया। उन्होंने 16 मैचों में 14 विकेट हासिल किए। इस दौरान उनकी गेंदबाजी औसत 30.35 और रन देने की दर 8.45 रही। बल्लेबाजी में भी उन्होंने 226 रन बनाए। इसमें मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेली गई मैच जिताने वाली अर्धशतकीय पारी भी शामिल है। बता दें कि क्रुणाल अपनी टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की पिछली 2 खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।
जियोस्टार से बातचीत के दौरान सुनील गावस्कर ने क्रुणाल की गेंदबाजी को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि क्रुणाल गेंद को बहुत ज्यादा घुमाने वाले गेंदबाज नहीं हैं, लेकिन वह अपनी लाइन और लेंथ में लगातार बदलाव करते हैं। वह बल्लेबाज के इरादे को समझकर गेंदबाजी करते हैं और कभी पैड की तरफ गेंद डालते हैं, तो कभी बाउंसर का इस्तेमाल करते हैं। उनका मकसद केवल विकेट लेना ही नहीं, बल्कि बल्लेबाजों को खुलकर रन बनाने से रोकना भी होता है।
गावस्कर के मुताबिक, क्रुणाल खेल को समझने वाले खिलाड़ी हैं और मैदान पर हमेशा कोई न कोई योजना बनाकर उतरते हैं। उन्होंने बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण में भी क्रुणाल के योगदान की सराहना की। गावस्कर का मानना है कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए टीम में उन खिलाड़ियों को शामिल करना जरूरी है, जो अपने प्रदर्शन से जीत दिलाने की क्षमता रखते हैं।
पूर्व भारतीय कप्तान ने साफ कहा कि टीम चुनते समय खिलाड़ियों की उम्र के बजाय उनके प्रदर्शन और फिटनेस को महत्व दिया जाना चाहिए। अगर कोई खिलाड़ी आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अच्छा खेल रहा है और शारीरिक रूप से फिट है, तो उसे भारतीय टीम में मौका देने पर विचार होना चाहिए। उनके अनुसार, बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए चयन का आधार खिलाड़ी की उपयोगिता होनी चाहिए, न कि उसकी उम्र।
गौरतलब है कि क्रुणाल पांड्या ने आखिरी बार 2021 में श्रीलंका दौरे पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद से वह राष्ट्रीय टीम में वापसी नहीं कर सके हैं। अब गावस्कर के समर्थन के बाद उनके दोबारा भारतीय टीम में चुने जाने की चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, उनकी वापसी को लेकर चयनकर्ताओं की ओर से कोई फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में उनका प्रदर्शन आगे की राह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
'सरकारें वोट से बदलती हैं, ताकत के दम पर नहीं', विपक्ष पर CM हिमंता का हमला
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे. इस मौके पर उन्होंने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार वोट से बदलती है, धमकी और दादागिरी से नहीं.
चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, "यह बहुत ही दुखद घटना है, लेकिन सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए काम किया, सभी के इलाज की व्यवस्था की और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि भविष्य में ऐसी घटना न हो. हालांकि, यह किसी के हाथ में नहीं है और यह बहुत ही दर्दनाक घटना है. फिर भी, स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए त्वरित कदमों से लोगों को कुछ शांति मिली है और उनका दुख कुछ हद तक कम हुआ है."
सरकार दादागिरी से नहीं बदलती- हिमंता
दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा कि सरकार बदलती है वोट से, धमकी और दादागिरी से नहीं, जो लोग सोचते हैं कि सत्ता मसल पावर से बदलती है, उन्हें बांग्लादेश या नेपाल जाना होगा. विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ऐसा कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं था; लगभग 5,000 से 10,000 लोग इकट्ठा हुए थे और विपक्ष के पास स्वाभाविक रूप से इतना समर्थन तो है ही. हालांकि, हमारी संख्या कहीं अधिक है. एक बार जब हमारे समर्थक हर जिले में बाहर आएंगे, तो आप खुद तुलना कर पाएंगे और देख पाएंगे कि असली ताकत किसके पास है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, "अखिलेश यादव क्या कह रहे हैं? हम लोग जहां होते हैं, वहां अखिलेश यादव की कोई चर्चा नहीं होती है. मुझे आपसे पूछना पड़ेगा कि ये विद्वान कौन है? देश में तो उनकी चर्चा नहीं है. पहले तो आप मुझे ये समझाएं कि वो कौन हैं? क्योंकि देश में तो उनकी चर्चा नहीं होती है. मैं तो उनके बारे में सिर्फ इतना ही जानता हूं कि उन्होंने अपने पिता को पीछे से छुरी मारी थी. मैं बस यही कहानी जानता हूं."
जब तक चांद और सूरज हैं, राम हिंदुओं के दिलों में ही रहेंगे- हिमंता
उन्होंने कहा कि मंदिर बदनाम नहीं होता है. राम अपने स्थान पर ही रहेंगे. दुनिया में कोई ऐसा बाबर नहीं है, जो राम को पराजित कर सके. वो अपने स्थान पर ही रहेंगे. श्रद्धालु आते रहेंगे, और जब तक चांद और सूरज हैं, राम हिंदुओं के दिलों में ही रहेंगे. यह बहुत दिव्य है. भगवान राम लला के दर्शन करने के बाद मन श्रद्धा से पूरी तरह परिपूर्ण हो जाता है. बार-बार आने का मन करता है.
विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि राम के मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़ा जाता है, लेकिन जब-जब बाबर दुनिया में होगा, तब-तब राम-लक्ष्मण और हनुमान तो रहेंगे ही. आप इसे ना कैसे कह सकते हैं? अगर हम राम के नाम पर चुनाव लड़ते हैं तो आप भी तो बाबर के नाम पर लड़ते हैं. आपको राम का नाम लेने में तकलीफ है, बाबर का नाम लेना बंद कर दो.
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