बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर, मौतों का आंकड़ा 1,196 पहुंचा, 2.13 लाख से अधिक मामले संदिग्ध
ढाका, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे का अभूतपूर्व प्रकोप फैला हुआ है। रविवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों के कारण सात बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही, इस प्रकोप से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 1,196 हो गई है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के मुताबिक, बांग्लादेश में हुई सभी सात मौतों को खसरे (मीजल्स) से जुड़ी संदिग्ध माना गया है।
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नई मौतों के साथ खसरे से जुड़ी संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 1,092 हो गई है, जबकि पुष्टि की गई मौतों की संख्या 104 पर ही बनी हुई है।
रविवार सुबह तक के 24 घंटों में बांग्लादेश में खसरे के 1,254 संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 2,13,244 हो गई है। इसी दौरान, खसरे के 65 नए मामलों की पुष्टि हुई, जिससे देश में कुल पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 23,122 हो गई है।
द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका ट्रिब्यून ने बताया है कि डीजीएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च से बांग्लादेश के अस्पतालों में खसरे के 189,484 संदिग्ध मरीजों को भर्ती कराया गया है। इनमें से 181,756 मरीज ठीक हो चुके हैं और उन्हें अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।
द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, डीजीएचएस में रोग नियंत्रण (डिजीज कंट्रोल) के पूर्व निदेशक बेनजीर अहमद ने पिछले हफ्ते कहा कि भले ही बांग्लादेश ने अप्रैल में यूनिसेफ के जरिए वैक्सीन मंगवाना फिर से शुरू करवा दिया है और इसके बाद एक आपातकालीन टीकाकरण अभियान भी चलाया है, लेकिन संक्रमण फैलने की रफ्तार को देखते हुए महामारी पर जल्द काबू पाना मुश्किल है।
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस दोबारा फैलाव के लिए पिछली टीकाकरण कवरेज में कमियों और अस्पताल तथा मरीज प्रबंधन में खामियों को जिम्मेदार ठहराया है। इनमें संक्रमित बच्चों की पहचान करने में देरी और उन्हें घर पर आइसोलेट (अलग) करने में हुई लापरवाही शामिल हैं।
द डेली स्टार से बातचीत में जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन ने बताया कि टीकाकरण के बाद बच्चों में पर्याप्त इम्युनिटी विकसित होने में आमतौर पर तीन से चार सप्ताह का समय लगता है। उन्होंने आगे कहा, इसलिए, संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने के मामलों और मौतों की मौजूदा लहर कम से कम एक और महीने तक जारी रह सकती है।
इससे पहले, एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था ने 2026 में खसरे के प्रकोप को बांग्लादेश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर जनस्वास्थ्य संकटों में से एक बताया था। साथ ही, इस बात पर भी जोर दिया कि टीकाकरण के जरिए इस बीमारी को रोका जा सकता है।
प्रिवेंटेबल ट्रैजेडी: बांग्लादेश का 2026 खसरा प्रकोप शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में, कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने कहा है कि भले ही आम जनता को यह खसरे का प्रकोप अचानक लगा हो, लेकिन महामारी विज्ञान के नजरिए से यह कोई अप्रत्याशित घटना नहीं थी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह संकट कई कारणों के मिलने से पैदा हुआ। इनमें 2024-2025 के दौरान मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली तत्कालीन अंतरिम सरकार के समय वैक्सीन की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई रुकावटें; नियमित टीकाकरण का छूट जाना; तय किए गए अतिरिक्त टीकाकरण कार्यक्रमों का रद्द होना; वैक्सीन खरीदने में प्रशासनिक देरी; और जोखिम वाली आबादी समूहों की समय रहते पहचान न कर पाना शामिल हैं।
--आईएएनएस
एएसएच/एबीएम
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Shiva Murder Case: जिस श्रद्धा की पुलिस को खोज, वह दे रही है इंटरव्यू, कहा- शिवा का मर्डर नहीं हुआ, उसने सुसाइड किया
Shiva Murder Case: लखनऊ के चर्चित व्यापारी शिवा वर्मा की मौत के मामले में आरोपी श्रद्धा दुबे पहली बार मीडिया के सामने आईं. श्रद्धा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया और दावा किया कि शिवा शर्मा की हत्या नहीं हुई है. बल्कि उसने बिल्डिंग की चौथी मंजिल से छलांग लगाई थी. श्रद्धा ने बिल्डिंग के सीसीटीवी फुटेज को सामने लाने की मांग की और कहा कि इससे घटना की सच्चाई सामने आ सकती है.
श्रद्धा दुबे ने पुलिस और न्यायपालिका से निष्पक्ष जांच की मांग भी की है. उसने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को हत्या का आरोपी बताकर पूरे देश के समक्ष अपराधी की तरह पेश करना सही नहीं है.
'हत्या नहीं, आत्महत्या थी'
श्रद्धा दुबे ने दावा किया कि शिवा शर्मा ने उसकी बिल्डिंग की चौथी मंजिल से छलांग लगाई थी. श्रद्धा का कहना है कि बिल्डिंग में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं. उनकी रिकॉर्डिंग से सच्चाई सामने आ जाएगी. श्रद्धा ने सवाल किया दूसरी जगहों के सीसीटीवी फुटेज की जांच हो रही है तो उसकी बिल्डिंग में लगे कैमरों की जांच क्यों नहीं हो रही है. सीसीटीवी फुटेज सामने आने से उसकी बेगुनाही साबित हो सकती है.
शिवा को चार महीने से जानने का दावा
श्रद्धा दुबे के अनुसार, वह शिवा शर्मा को पिछले करीब चार महीनों से जानती थी और दोनों की दोस्ती ढाई महीने तक रही थी. उसने दावा किया कि पिछले दो महीनों से शिवा उसके घर भी आने-जाने लगा था. श्रद्धा ने शिवा के परिवार द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को गलत बताया. इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर अलग-अलग लोगों के साथ उसकी वायरल हो रही तस्वीरों पर भी आपत्ति जताई. श्रद्धा ने कहा, तस्वीरें तो कोई भी किसी के साथ खिंचवा सकता है. मेरा इस सबसे कोई संबंध नहीं है.
शिवा पर कर्ज होने का दावा
श्रद्धा ने अपने बयान में शिवा की आर्थिक स्थिति के बारे में भी कई बातें कहीं. उसके अनुसार, शिवा पर करीब 16 से 17 लाख रुपये का कर्ज था और कर्ज देने वालों के फोन आने की वजह से वह काफी परेशान रहता था. श्रद्धा ने यह भी आरोप लगाया कि करीब एक महीने पहले शिवा उसके घर से 5-6 लाख रुपये के गहने ले गया था. उसके अनुसार, शिवा ने एक वीडियो में गहने वापस करने की बात भी स्वीकार की थी.
घटना के बाद वहां से जाने की वजह घटना के बाद वहां से चले जाने को लेकर सफाई देते हुए श्रद्धा ने कहा, "मैं वहां से इसलिए चली गई थी क्योंकि मुझे सांस लेने में दिक्कत है. मैं इस हद तक सदमे में थी कि मुझे वहां से निकलना ही पड़ा. वरना मैं वहां से भागती नहीं, बल्कि डटकर उसका सामना करती." उसने दावा किया कि उनके ड्राइवर के साथ भी मारपीट की गई और उस पर हत्या का झूठा आरोप लगाया जाने लगा, जिससे वह काफी घबरा गई थी.
श्रद्धा ने अपनी बहन रश्मि दुबे का नाम इस मामले में घसीटे जाने पर भी प्रतिक्रिया दी. उसने साफ किया कि उसकी बहन को इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और बेवजह उसका नाम जोड़ा जा रहा है. इसके अलावा, कथित डायरी और सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के आधार पर लग रहे सभी आरोपों को भी उसने खारिज कर दिया.
पुलिस ने बढ़ाया था इनाम
इससे पहले, श्रद्धा दुबे और इस मामले के अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लखनऊ पुलिस लगातार जुटी हुई थी. पुलिस ने श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे, आदिल उर्फ तनवीर और दानिश पर घोषित इनाम की राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी थी. डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर के मुताबिक, आरोपियों को पकड़ने के लिए सर्विलांस और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मदद ली जा रही थी और उनके करीबियों से भी पूछताछ की गई थी. इस बीच, श्रद्धा दुबे की ओर से अदालत में सरेंडर के लिए एप्लीकेशन दिए जाने की बात भी सामने आई थी.
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