अहमदाबाद के गुजरात विद्यापीठ में छात्रों को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग, रसायन मुक्त कृषि पर जोर
गांधीनगर, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। अहमदाबाद में गुजरात विद्यापीठ विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती की थ्योरेटिकल और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दे रहा है। इसका मकसद युवा पीढ़ी को रसायन मुक्त भोजन और पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक करना है।
इसके तहत यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को हर महीने 20 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें नेचुरल फार्मिंग के साथ ऑर्गेनिक सब्जियों के उत्पादन के महत्व के बारे में बताया जाता है।
गुजरात विद्यापीठ के छात्र बिनेश कोठीवार ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान बताया कि यहां हमें सीखने को मिला कि प्राकृतिक खेती से हमारी जिंदगी में बहुत सुधार आ सकता है, जैसे कि उपज, जमीन, भोजन और सेहत में काफी सुधार आ सकता है। इसलिए हमारी कोशिश है कि पूरे गुजरात में नेचुरल फार्मिंग को लागू किया जाए।
छात्र जानवी जादव ने बताया कि इस समय ज्यादातर केमिकल फर्टिलाइजर का इस्तेमाल हो रहा है। इससे कई बीमारियां फैल रही हैं, इसलिए अगर हम नेचुरल फार्मिंग को महत्व दें और उस पर काम करें तो अच्छा होगा। यहां हमने इसका महत्व सीखा और यह भी जाना कि इसे कैसे करना है।
गुजरात विद्यापीठ प्रशासन के मुताबिक ‘स्वास्थ्य, समृद्धि के साथ संपदा संरक्षण’ के मंत्र के अंतर्गत स्टूडेंट्स को रासायनिक खेती और उर्वरकों के नुकसान के बारे में जानकारी दी जा रही है। साथ ही, उन्हें गाय के गोबर से बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत और प्राकृतिक खाद व कीटनाशक बनाने के तौर-तरीके सिखाए जा रहे हैं।
गुजरात विद्यापीठ के वाइस चांसलर डॉ. हर्षद पटेल ने कहा कि हमने बीआरएस पाठ्यक्रम में नेचुरल फार्मिंग का सब्जेक्ट शामिल किया है और स्टूडेंट्स को इसका अनुभव कैंपस में ही मिल सके, इसके लिए हमने यहां प्राकृतिक खेती के माध्यम से सब्जियां उगाने की व्यवस्था की है। साथ ही जीवामृत और घन जीवामृत कैसे बनाए जाते हैं, इसे खेती में कैसे उपयोग करते हैं, इसका उत्पादन कैसे किया जाता है, इसके लिए विद्यार्थियों को सिखाया जा रहा है और प्रत्यक्ष अनुभव भी दिए जा रहे हैं।
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शैलेश चौधरी ने कहा कि प्राकृतिक खेती के अंतर्गत बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत का इस्तेमाल पोषण के लिए किया जाता है। इसे यहां स्टूडेंट खुद बनाते हैं, जब पूरी फसल तैयार हो जाती है और कोई बीमारी या कीट का सवाल होता है तो हम अग्निअस्त्र और निमास्त्र का इस्तेमाल करते हैं और कीट को कंट्रोल करने का काम करते हैं।
जाहिर है कि प्राकृतिक खेती से उगाई जाने वाली सब्जियां जहां स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है, वहीं इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी बढ़ती है। ऐसे में अहमदाबाद का गुजरात विद्यापीठ युवाओं को प्राकृतिक खेती का पाठ पढ़ाकर न केवल एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, बल्कि उन्हें सस्टेनेबल फार्मिंग अपनाने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।
--आईएएनएस
एएसएच/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पन्ना में वन भूमि से कब्जा हटाने पर विवाद, ग्रामीणों और वन विभाग की टीम में झड़प, दो वनकर्मी समेत कई लोग घायल
पन्ना: मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है जहां वन मंडल अंतर्गत अजयगढ़ रेंज के ग्राम पेराहा में वन भूमि से अवैध कब्जा हटाने गई वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम पर कुछ ग्रामीणों ने हमला कर दिया। जिसके बाद दोनों पक्षों में झड़प शुरू हो गई। इस घटना में दो वनकर्मी समेत कई लोग घायल हो गये। सभी घायलों को एंबुलेंस की सहायता से अस्तपाल इलाज के लिये भेजा गया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी अनुसार, जिले के ग्राम पेराहा में वन विभाग की 30 हेक्टेयर भूमि पर पटेल समाज के लोग लंबे समय से खेती करके अनाज उगा रहे थे एवं अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। काफी समय से वन विभाग इस जमीन को कब्जा मुक्त करने का प्रयास कर रही थी। वहीं, रविवार को छतरपुर और पन्ना रेंज के अधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जमीन पर कब्जा हटाने की कार्रवाई की जा रही थी एवं विभाग द्वारा भूमि को मुक्त कराकर पौधा रोपण कराया जा रहा था। जिसका ग्रामीणों द्वारा विरोध किया।
20 से अधिक लोग घायल
बता दें कि विरोध इतना बढ़ा कि मामला हिंसक झड़प में तब्दील हो गया एवं दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। अस्पताल में भर्ती ग्रामीण विनोद पटेल ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना कोई सूचना के सुबह-सुबह जबरन कार्रवाई की। साथ ही.. विरोध करने पर महिलाओं और ग्रामीणों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की गई। इस घटना में 20 से अधिक लोग घायल हुये हैं।
वहीं, वन विभाग का कहना है कि ग्रामीणों के अचानक किए गए हमले में देवेंद्रनगर के वनरक्षक बसंत लाला वर्मा और पवई रेंज की वनपाल भारती कुमारी घायल हो गईं। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में ले लिया है। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। वहीं, जो भी ग्रामीण घायल हुये हैं उनका अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation
Mp Breaking News









