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इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो विचारों, नवाचार और इरादों का शक्तिशाली संगम : पीएम मोदी

नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 की मुख्य विशेषताओं को साझा करते हुए कहा कि यह विचारों, नवाचार और इरादों का एक शक्तिशाली संगम था।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 विचारों, नवाचार और इरादों का एक शक्तिशाली संगम था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, इसने वैश्विक भलाई के लिए एआई के भविष्य को आकार देने में भारतीय प्रतिभा की असाधारण क्षमता को प्रदर्शित किया। सबसे बढ़कर, इसने मानव प्रगति के लिए एआई का जिम्मेदारपूर्वक, समावेशी रूप से और व्यापक स्तर पर उपयोग करने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

इससे पहले सोमवार को, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया और कहा कि एआई में भारत की प्रगति न केवल देश के लिए परिवर्तनकारी समाधानों को आकार देगी बल्कि वैश्विक उन्नति में भी योगदान देगी।

पीएम मोदी ने कहा कि नवप्रवर्तकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी उत्साही लोगों के बीच रहने से एआई, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता की झलक मिलती है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा था, हम मिलकर न केवल भारत के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी समाधान तैयार करेंगे।

यह एक्सपो इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के साथ आयोजित किया जा रहा है, जो ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई सम्मेलन है और इसमें अभूतपूर्व भागीदारी देखी जा रही है, जिसमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 वैश्विक एआई नेता भाग लेने वाले हैं।

इस बीच, सोमवार से शुरू हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों, मंत्रियों, वैश्विक प्रौद्योगिकी नेताओं, प्रख्यात शोधकर्ताओं, बहुपक्षीय संस्थानों और उद्योग जगत के हितधारकों को एक साथ लाया गया ताकि समावेशी विकास को आगे बढ़ाने, सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत करने और सतत विकास को सक्षम बनाने में एआई की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जा सके। साथ ही, यह पहली बार है कि इस मुद्दे पर इतने बड़े पैमाने पर वैश्विक सम्मेलन का आयोजन ग्लोबल साउथ में किया जा रहा है।

इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्देश्य एआई के प्रति प्रभाव-उन्मुख और जन-केंद्रित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है, जिसमें मापने योग्य सामाजिक और आर्थिक परिणाम प्रदान करने पर जोर दिया गया है।

--आईएएनएस

एसएके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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लंदन में फर्टिलिटी मरीजों को हाई कोर्ट ने दी बड़ी राहत, क्लिनिक की गलती से होने वाला था नुकसान, जानें मामला

लंदन से एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है. यहां 15 से ज्यादा फर्टिलिटी मरीजों ने हाई कोर्ट में अपना केस जीता है. दरअसल, इन मरीजों में कुछ कैंसर सर्वाइवर्स भी शामिल थे, जिन्होंने इलाज से पहले अपने एग्स, स्पर्म और भ्रूण सुरक्षित रखवाए थे ताकि भविष्य में जब वे ठीक हो जाए तो माता-पिता बन सकें.

क्या है मामला?

दरअसल, यह मामला फर्टिलिटी क्लिनिकों की लापरवाही से जुड़ा हुआ था. उनके नियमों के मुताबिक मरीजों के अंडे, स्पर्म और भ्रूण को 10 साल तक स्टोर किया जा सकता है. इसके बाद स्टोरेज जारी रखने के लिए कंसेंट  को समय पर रिन्यू कराना जरूरी होता है. लेकिन क्लिनिक की गलती से कई मरीजों का कंसेंट रिन्यू नहीं हो पाया था.

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कैंसर सर्वाइवर्स के लिए अंतिम अवसर

इस गलती की वजह से जून 2025 में उनके भ्रूण, अंडे और स्पर्म नष्ट होने वाले थे. जब मरीजों को इस बात का पता चला तो वे बेहद परेशान हो गए. कई लोगों के लिए माता-पिता बनने का यह उनकी जिंदगी का आखिरी मौका था. खासकर कैंसर सर्वाइवर्स के लिए यह अंतिम अवसर होता है. जब यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा तो कोर्ट में मरीजों की ओर से कहा गया कि यह उनकी गलती नहीं है बल्कि क्लिनिक की लापरवाही है. ऐसे में उन्हें सजा क्यों मिले?

कोर्ट ने सुनाया यह फैसला?

इसके बाद सुनवाई में जज ने 14 मामलों में मरीजों के पक्ष में फैसला सुनाया. जज ने स्पष्ट कहा कि माता-पिता बनने का मौका घड़ी की टिक-टिक से नहीं छीना जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि असली महत्व मरीजों की सहमति और उनकी इच्छा का है, न कि सिर्फ तकनीकी डेडलाइन का. कोर्ट का मानना है कि स्टोरेज जारी रखना वैध है और भ्रूण को नष्ट नहीं किया जा सकता है.

हालांकि, एक मामला कोर्ट ने खारिज कर दिया. उस केस में शुरुआत से ही वैलिड कंसेंट मौजूद नहीं था. इसलिए, अदालत ने उन्हें राहत नहीं दी थी.

कागजी कार्यवाही नहीं छीन सकती पेरेंट्स बनने का सपना

यह फैसला उन सभी फर्टिलिटी मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आया है, जो तकनीकी कारणों या कागजी प्रक्रिया की वजह से अपने पेरेंट्स बनने के सपने को पूरा नहीं कर पाते. कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया कि इंसानी भावनाओं और भविष्य की उम्मीदों को सिर्फ एक तारीख के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता है.

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