यूपी में बनेंगे 3 नए एक्सप्रेस-वे, 651 गांवों से होकर गुजरेंगे; जानें किन जिलों को मिलेगा फायदा
उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए तीन नए एक्सप्रेस-वे बनाने की तैयारी है. इनमें मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेस-वे, विंध्य एक्सप्रेस-वे और विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे शामिल हैं. इन तीनों परियोजनाओं के रूट तय कर लिए गए हैं. इनके निर्माण के लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है. प्रस्तावित योजनाओं के तहत कुल 8,193 हेक्टेयर जमीन खरीदी जानी है. तीनों एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के 651 गांवों से होकर गुजरेंगे. इन परियोजनाओं से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विंध्य क्षेत्र और पूर्वांचल के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है.
मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेस-वे से इन जिलों को होगा फायदा
गंगा एक्सप्रेस-वे के पश्चिमी छोर को हरिद्वार तक बढ़ाने की योजना है. प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेस-वे अमरोहा और बिजनौर से होते हुए हरिद्वार तक पहुंचेगा. इसके लिए अलग-अलग जिलों में जमीन खरीदने की तैयारी की गई है. अमरोहा जिले के 52 गांवों में 555.94 हेक्टेयर जमीन खरीदी जाएगी. वहीं, बिजनौर के 108 गांवों में 1,058.44 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी. इसके अलावा हरिद्वार के 24 गांवों से 406 एकड़ जमीन खरीदी जानी है. इस परियोजना से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरिद्वार के बीच आवागमन आसान बनाने में मदद मिल सकती है.
विंध्य एक्सप्रेस-वे चार जिलों से होकर गुजरेगा
तीनों प्रस्तावित परियोजनाओं में विंध्य एक्सप्रेस-वे के लिए सबसे ज्यादा जमीन खरीदी जानी है. इसका रूट प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र से होकर गुजरेगा. इस परियोजना के लिए कुल 4,613.93 हेक्टेयर जमीन खरीदने की योजना है. एक्सप्रेस-वे चार जिलों के 327 गांवों को अपने दायरे में लेगा.
जिलेवार जमीन का विवरण इस प्रकार है:
प्रयागराज: 71 गांवों में 862.76 हेक्टेयर जमीन.
भदोही: 58 गांवों में 472.74 हेक्टेयर जमीन.
मिर्जापुर: 89 गांवों में 1,258.79 हेक्टेयर जमीन.
सोनभद्र: 109 गांवों में 2,019.64 हेक्टेयर जमीन.
इन आंकड़ों के अनुसार, विंध्य एक्सप्रेस-वे के लिए सबसे ज्यादा जमीन सोनभद्र जिले में खरीदी जाएगी. यह परियोजना क्षेत्र में सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे तीन जिलों को जोड़ेगा
तीसरा प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे है. यह लिंक एक्सप्रेस-वे मिर्जापुर, चंदौली और गाजीपुर क्षेत्र को जोड़ेगा. इसके निर्माण के लिए कुल 1,558.93 हेक्टेयर जमीन खरीदने की योजना है. इसका रूट तीन जिलों के 140 गांवों से होकर गुजरेगा. इस परियोजना के तहत चंदौली के 52 गांवों में 663.72 हेक्टेयर, गाजीपुर के 52 गांवों में 576.91 हेक्टेयर और मिर्जापुर के 36 गांवों में 318.30 हेक्टेयर जमीन खरीदी जानी है.
जल्द शुरू हो सकती है जमीन खरीद की प्रक्रिया
तीनों एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन की जरूरत और प्रस्तावित रूट तय किए जा चुके हैं. अब जिला प्रशासन के स्तर पर जमीन खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है. इन परियोजनाओं के पूरा होने पर प्रदेश के कई जिलों के बीच यात्रा और माल ढुलाई को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने और परियोजनाओं के पूरा होने की समयसीमा के बारे में अभी दी गई जानकारी में कोई स्पष्ट तारीख नहीं बताई गई है.
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यूपी पुलिस सिपाही और होमगार्ड भर्ती में अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, 31 अक्टूबर को फिर होगी शारीरिक माप
UP News: उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही और होमगार्ड भर्ती-2025 के लाखों अभ्यर्थियों के लिए राहत की खबर है. दरअसल, शारीरिक माप के दौरान अयोग्य घोषित किए गए अभ्यर्थियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है. अदालत ने चार श्रेणियों में शामिल पात्र अभ्यर्थियों की लंबाई और सीने की माप दोबारा कराने का निर्देश दिया है. इसके लिए लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा. जहां अभ्यर्थियों की 31 अक्टूबर 2026 को फिर से जांच की जाएगी.
न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने अनुज कुमार और अन्य अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोबारा माप की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए और मेडिकल बोर्ड को अभ्यर्थियों की पिछली माप के बारे में कोई जानकारी न दी जाए.
पहले की भर्ती में पास, अब माप पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वे पहले उपनिरीक्षक, सिपाही और होमगार्ड भर्ती की शारीरिक जांच में निर्धारित मानकों पर खरे उतरे थे. इसके बावजूद मौजूदा भर्ती प्रक्रिया में उन्हें लंबाई या सीने की माप के आधार पर अयोग्य कर दिया गया. अभ्यर्थियों का तर्क था कि वयस्क व्यक्ति की लंबाई में एक-दो साल के भीतर इतनी कमी आना सामान्य नहीं है कि वह भर्ती के निर्धारित मानक से नीचे चला जाए. ऐसे में शारीरिक माप की प्रक्रिया की विश्वसनीयता की जांच जरूरी है. इसी आधार पर उन्होंने दोबारा माप कराने की मांग की.
सरकार ने मौके पर अपील का दिया हवाला
वहीं राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने अदालत को बताया कि भर्ती नियमों के तहत शारीरिक माप से असंतुष्ट अभ्यर्थियों को मौके पर ही अपील करने का अवसर दिया गया था. सरकार का पक्ष था कि अपील के बाद भी यदि अभ्यर्थी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो दर्ज किए गए परिणाम को अंतिम माना जाना चाहिए.
वहीं, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के 'सौरभ यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले का उल्लेख किया. उन्होंने दलील दी कि इस मामले में भी दोबारा जांच के बाद अभ्यर्थी की लंबाई सही पाई गई थी. दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पात्र अभ्यर्थियों को एक और मौका देने का फैसला किया.
31 अक्टूबर को केजीएमयू में दोबारा होगी जांच
अदालत के निर्देश के मुताबिक, संबंधित चार श्रेणियों में आने वाले पात्र अभ्यर्थियों को 31 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे तक केजीएमयू, लखनऊ के प्रधानाचार्य के समक्ष उपस्थित होकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी. प्रधानाचार्य की निगरानी में गठित स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड अभ्यर्थियों की लंबाई और सीने की माप करेगा. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड और होमगार्ड विभाग को भी अपने जिम्मेदार अधिकारियों को वहां भेजना होगा, ताकि अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित की जा सके. अभ्यर्थियों को अपने साथ आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र, संबंधित भर्ती का प्रवेश पत्र और हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति ले जानी होगी.
पुरानी माप से अनजान रहेगा मेडिकल बोर्ड
जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि मेडिकल बोर्ड को अभ्यर्थियों की पहले दर्ज की गई शारीरिक माप नहीं बताई जाएगी. इससे बोर्ड स्वतंत्र रूप से नए सिरे से माप कर सकेगा. केजीएमयू को जांच पूरी होने के बाद अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में 4 नवंबर 2026 को हाईकोर्ट में पेश करनी होगी. इसके बाद मामले से जुड़ी शेष याचिकाओं पर आगे सुनवाई की जाएगी.
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निजी अस्पताल की रिपोर्ट के आधार पर नहीं मिली राहत
अदालत ने उन अभ्यर्थियों की याचिकाएं खारिज कर दीं, जिनकी दो सरकारी जांचों में समान परिणाम आया था और जिन्होंने निजी अस्पतालों की रिपोर्ट के आधार पर दोबारा माप कराने की मांग की थी. कोर्ट ने माना कि केवल निजी डॉक्टरों के प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी भर्ती प्रक्रिया में दर्ज माप को चुनौती देना पर्याप्त नहीं है.
अब 31 अक्टूबर को होने वाली जांच और 4 नवंबर को पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर प्रभावित अभ्यर्थियों की नजर रहेगी. मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों के आधार पर मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई होगी.
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