फैंस को नहीं करना पड़ेगा इंतजार! सिर्फ 4 दिन बाद ही फिर एक्शन में लौटेगी टीम इंडिया, आज ही नोट कर लें शेड्यूल
IND VS NZ: वेस्टइंडीज के साथ खेली गई 5 मैचों की टी-20 सीरीज खत्म हो चुकी है. पांचवें मैच के बारिश में धुलने के कारण सीरीज 2-2 से बराबर पर खत्म हुई. इस सीरीज के खत्म होने के बाद फैंस को मायूस होने की बिलकुल जरूरत नहीं है, क्योंकि टीम इंडिया सिर्फ 4 दिन के बाद दोबारा एक्शन में नजर आने वाली है. जी हां, भारतीय टीम 45 दिन लंबे न्यूजीलैंड दौरे पर जा रही है, जिसकी शुरुआत 5 मैचों की टी-20 सीरीज के साथ होने वाली है. आइए इस आर्टिकल में आपको कीवी टीम के साथ खेली जाने वाली टी-20 सीरीज की डेट, टाइम और शेड्यूल के बारे में बताते हैं.
कितनी तारीख से शुरू होगी अगली टी-20 सीरीज?
भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड दौरे पर जाने वाली है, जिसकी शुरुआत 22 अक्टूबर से होगी. नतीजन, टीम इंडिया अगली बार 4 दिन के बाद ही एक्शन में नजर आएगी. भारत-न्यूजीलैंड के बीच 22 अक्टूबर को क्राइस्टचर्च में खेला जाएगा.
An update to our T20I squad ahead of the Hero VIDA T20I Series Powered by AI+ Nova Smartphone against India, starting at Hagley Oval on October 22.
— BLACKCAPS (@BLACKCAPS) October 9, 2026
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कितने बजे शुरू होंगे मैच?
न्यूजीलैंड दौरे पर खेले जाने वाले मैचों की टाइमिंग में बदलाव देखने को मिलने वाला है. दरअसल, भारत और न्यूजीलैंड की टामिंग में 7 घंटे 30 मिनट का अंतर है. ऐसे में IND VS NZ के बीच खेली जाने वाली टी-20 सीरीज के मुकाबले दोपहर 12.30 बजे से खेला जाएंगे, जिसके टॉस के लिए दोनों कप्तान 12 बजे मैदान पर आएंगे.
IND VS NZ टी-20 सीरीज का शेड्यूल
भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जाने वाली टी-20 सीरीज 22 अक्टूबर से शुरू होगी और 1 नवंबर तक खेली जाएगी. सीरीज का दूसरा मैच 24 अक्टूबर, तीसरा मैच 27 अक्टूबर और चौथा मैच 30 अक्टूबर को खेला जाएगा. इस सीरीज को लेकर क्रिकेट फैंस काफी उत्साहित हैं, क्योंकि न्यूजीलैंड दौरे पर खेले जाने वाले मैचों का रोमांच ही अलग स्तर का होता है.
|
मैच |
तारीख |
दिन |
मुकाबला |
वेन्यू |
|---|---|---|---|---|
|
पहला T20I |
22 अक्टूबर 2026 |
गुरुवार |
भारत vs न्यूजीलैंड |
हेगले ओवल, क्राइस्टचर्च |
|
दूसरा T20I |
24 अक्टूबर 2026 |
शनिवार |
भारत vs न्यूजीलैंड |
हेगले ओवल, क्राइस्टचर्च |
|
तीसरा T20I |
27 अक्टूबर 2026 |
मंगलवार |
भारत vs न्यूजीलैंड |
एचएनआरवाई स्टेडियम, वेलिंगटन |
|
चौथा T20I |
30 अक्टूबर 2026 |
शुक्रवार |
भारत vs न्यूजीलैंड |
ईडन पार्क, ऑकलैंड |
|
पांचवां T20I |
1 नवंबर 2026 |
रविवार |
भारत vs न्यूजीलैंड |
सेडन पार्क, हैमिल्टन |
2-2 के साथ ड्रॉ पर खत्म हुई टी-20 सीरीज
An entertaining series comes to an end ????
— BCCI (@BCCI) October 17, 2026
???? BCCI Hon. Treasurer Mr A. Raghuram Bhat presents the @mflone_ T20I Series trophy to #TeamIndia Captain Shreyas Iyer and West Indies Captain Shai Hope ????#INDvWI pic.twitter.com/iKA8vx68ba
भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली गई टी-20 सीरीज 2-2 से ड्रॉ पर खत्म हुई. सीरीज का पहला मैच भारत ने जीता था, दूसरे मैच में वेस्टइंडीज ने जीत दर्ज की, तीसरा मैच फिर भारत ने जीता और चौथे मैच में कैरेबियाई टीम ने जीत दर्ज की. पांचवां और सीरीज निर्णायक मैच बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला गया. ये मैच बारिश से प्रभावित हुआ, जिसके चलते ओवरों की कटौती हुई, लेकिन फिर भारतीय पारी की बैटिंग के दौरान फिर बारिश होने लगी और कुछ देर इंतजार करने के बाद मैच को रद्द करने की घोषणा कर दी गई.
The final T20I has been called off due to rain.
— BCCI (@BCCI) October 17, 2026
The 5️⃣-match #INDvWI series ends with a 2️⃣-2️⃣ scoreline ????
Scorecard ▶️ https://t.co/hpGnrNyZVS #TeamIndia | @mflone_ pic.twitter.com/CO9H3IeRGk
Shardiya Navratri 2026 Day 8: शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी पर आज करें माता महागौरी की पूजा, पढ़ें उनकी कथा बरसेगी कृपा
Shardiya Navratri 2026 Day 8: शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि का प्रारंभ आज 18 अक्टूबर 2026 को 8 बजकर 29 से हो चुका है. इस दिन दुर्गा मां के आठवें स्वरूप की पूजा की जाएगी. इस दिन माता श्वेत वर्ण की जिन्हें माता महागौरी भी कहा जाता है, उनकी पूजा की जाएगी. साथ ही अष्टमी के दिन पर कन्या पूजन भी किया जाता है. हालांकि, आज कई घरों तथा मंदिरों में महाष्टमी पूजन नहीं किया जा रहा है क्योंकि सूर्योदय के बाद भी सप्तमी तिथि जारी थी. धार्मिक मान्यता है कि महागौरी माता की पूजा करने से रोग-दोषों से मुक्ति मिलती है. इनके पूजन से राहु ग्रह भी शांत होता है. इसलिए, इनकी पूजा करने से राहु के बुरे प्रभावों को दूर करने में मदद मिलती है. आज आठवें नवरात्रि के दिन पर महागौरी की पूजा के साथ-साथ कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए.
आज है दुर्गाष्टमी
ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा के अनुसार, आज यानी 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 29 मिनट पर अष्टमी तिथि का प्रारंभ हुआ है. यह तिथि 19 नवंबर तक सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहने वाली है. ऐसे में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर से शुरू होकर 19 नवंबर तक रहने वाली है. इसलिए, आप दोनों दिन पूजन कर सकते हैं. महाष्टमी पर माता महागौरी की पूजा के साथ-साथ महानिशा पूजा करने का भी विशेष महत्व होता है. इस दिन पर कई भक्त व्रत रखते हैं और दुर्गा मां से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा भी होती है, जिनमें छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है.
माता महागौरी की व्रत कथा (Read Mata Mahagauri Vrat Katha)
नवरात्रि के नौ दिनों में आठवें दिन, महाअष्टमी पर, माता महागौरी की पूजा की जाती है. वे करुणा, पवित्रता और शांति की देवी कहलाती हैं. उनके नाम में ही उनका स्वरूप समाया है. "महा" का अर्थ है अत्यंत और "गौरी" का अर्थ है श्वेत, यानी अत्यंत उज्ज्वल वर्ण वाली देवी. भक्तों की मान्यता है कि माता की आराधना से मन के विकार मिटते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है.
शिव को पाने की तपस्या
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया था. इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने अत्यंत कठोर तपस्या की. वे वर्षों तक अन्न-जल का मोह छोड़कर साधना में लीन रहीं. ऋतुएं बदलती रहीं, आंधी, वर्षा और कड़ाके की ठंड आती-जाती रही, पर उनका संकल्प अडिग रहा. इतने लंबे समय तक तप करने के कारण उनका शरीर धूल-मिट्टी से ढक गया और उनका कोमल गौर वर्ण सांवला पड़ गया.
अंततः भगवान शिव उनकी निष्ठा और तपस्या से प्रसन्न हुए. उन्होंने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. यह पार्वती की साधना की सबसे बड़ी विजय थी, परंतु तपस्या के चिह्न के रूप में उनका रंग अब भी सांवला ही था.
ब्रह्मा जी की आराधना
शिव को पाने के बाद माता पार्वती ने अपने मूल गौर वर्ण को दोबारा पाने की इच्छा की. इसके लिए उन्होंने सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा की आराधना की. कथा के एक अन्य वर्णन के अनुसार, उन्होंने ब्रह्मा जी से विनम्र प्रार्थना की कि उन्हें उनका पहले जैसा उज्ज्वल रूप लौटा दिया जाए. ब्रह्मा जी उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें एक उपाय बताया. उन्होंने कहा कि वे मानसरोवर में जाकर पवित्र स्नान करें.
मानसरोवर में स्नान और महागौरी का प्रकट होना
माता पार्वती ने ब्रह्मा जी के बताए अनुसार मानसरोवर में पवित्र स्नान किया. जैसे ही उन्होंने जल में डुबकी लगाई, चमत्कार हो गया. धूल-मिट्टी और तपस्या की श्यामलता उतर गई और उनका रंग पहले की तरह उज्ज्वल और गौर हो गया. उनके शरीर से दिव्य श्वेत आभा फूट पड़ी, मानो पूर्णिमा का चंद्रमा धरती पर उतर आया हो. उनके इसी दिव्य और तेजस्वी स्वरूप को "महागौरी" नाम से जाना गया.
कौशिकी का प्रकट होना
मान्यता है कि स्नान के समय माता पार्वती के शरीर से जो श्याम वर्ण अलग हुआ, वह व्यर्थ नहीं गया. वह एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में प्रकट हुआ, जिसे "कौशिकी" कहा गया. यह शक्ति अत्यंत प्रचंड और तेजस्वी थी. आगे चलकर इसी शक्ति ने अत्याचारी राक्षसों का संहार किया और देवताओं को उनके आतंक से मुक्ति दिलाई. इस प्रकार एक ही देवी के दो रूप सामने आए: एक शांत, सौम्य और करुणामयी महागौरी, और दूसरा दुष्टों का नाश करने वाली कौशिकी.
कथा का संदेश
माता के विभिन्न स्वरूपों की ये कथाएं सिर्फ चमत्कार की कहानियां नहीं हैं, बल्कि गहरा संदेश भी देती हैं. पार्वती की तपस्या बताती है कि सच्चे संकल्प और धैर्य से हर लक्ष्य पाया जा सकता है. उनका सांवला रंग और फिर गौर वर्ण यह सिखाता है कि साधना का हर चरण अपने आप में पवित्र है. कौशिकी का राक्षसों का संहार करना बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म की स्थापना का प्रतीक है.
माता की महिमा
मां महागौरी को करुणामयी और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाली देवी माना जाता है. वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनका स्वरूप अत्यंत सौम्य है. नवरात्रि की महाअष्टमी पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं, माता का पूजन करते हैं और कन्या पूजन करके उनका आशीर्वाद लेते हैं. भक्त सुखी वैवाहिक जीवन, परिवार की खुशहाली और जीवन में शांति की कामना करते हैं. मान्यता है कि जो सच्चे मन से माता की शरण में जाता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और उसे अटूट सुख-शांति प्राप्त होती है.
माता महागौरी के शक्तिशाली मंत्र
- ऊं देवी महागौर्यै नमः॥
- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नमः॥
- श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥ - या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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