वांगचुक रिहाई केस में सुप्रीम कोर्ट का केंद्र से सवाल:सोनम के बयान के वीडियो ट्रांसक्रिप्ट के साथ सही अनुवाद क्यों नहीं दिया
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई से जुड़े मामले में सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि उसने वांगचुक के खिलाफ जो वीडियो ट्रांसक्रिप्ट (बयान का लिखित रूप) जमा किए हैं, उनकी सही और सटीक अनुवाद क्यों नहीं दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में अनुवाद कम से कम 98 प्रतिशत तक सटीक होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई कर रहा है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी बी वराले की बेंच ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज से कहा कि उन्हें वांगचुक के भाषण का असली और सही ट्रांसक्रिप्ट चाहिए। कुछ शब्दों को वांगचुक से जोड़ा है, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि सरकार ने जिन कुछ शब्दों को वांगचुक से जोड़ा है, वे उन्होंने कभी कहे ही नहीं। डिटेंशन ऑर्डर (नजरबंदी आदेश) में लिखा है कि वांगचुक ने हड़ताल जारी रखी और युवाओं को भड़काया तथा नेपाल का संदर्भ दिया। उन्होंने पूछा कि यह पंक्ति कहां से आई? उन्होंने कहा कि यह एक अनोखा डिटेंशन आदेश है, जिसमें ऐसी बातों का हवाला दिया गया है जो मौजूद ही नहीं हैं। नटराज ने कोर्ट को बताया कि ट्रांसक्रिप्ट तैयार करने के लिए एक अलग विभाग होता है और हम इस मामले में विशेषज्ञ नहीं हैं। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी। वांगचुक की 24 बार मेडिकल जांच की गई इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि- हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते गीतांजलि अंगमो ने कहा कि पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के लिए किसी भी तरह से वांगचुक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि इससे लद्दाख की पांच साल की शांतिपूर्ण “तपस्या” को नुकसान होगा। अंगमो ने कहा कि वह दिन उनके जीवन का सबसे दुखद दिन था। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट बोला-वांगचुक ने भाषणों में हिंसा पर चिंता जताई:इसमें उकसावा कहां; सरकार ने कहा था- सोनम लद्दाख को नेपाल बनाना चाहते थे सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सोनम वांगचुक की NSA के तहत हिरासत पर सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या उनके भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट सच में भड़काऊ थे। अदालत ने यह भी सवाल किया कि इन बयानों का 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा से सीधा संबंध कैसे जुड़ता है। पढ़ें पूरी खबर…
भारतीय लड़की भी यौन अपराधी एपस्टीन का शिकार हुई:नई फाइल्स से खुलासा; अमेरिकी अधिकारियों ने मुआवजा देने के लिए ढूंढा
यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइलों में खुलासा हुआ है कि एक भारतीय लड़की भी उसका शिकार हुई थी। दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने उसे पीड़ित मुआवजा फंड से भुगतान दिलाने के लिए भारत में तलाश शुरू की थी। 13 जनवरी 2020 की एक ईमेल में अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत सामने आई है। इसमें भारत में मौजूद पीड़िता का पता और जानकारी जुटाने को कहा गया है, ताकि भारत स्थित अमेरिकी दूतावास के जरिए उससे संपर्क किया जा सके। यह ईमेल एपस्टीन की अगस्त 2019 में जेल में हुई मौत के बाद की है। रिलीज दस्तावेजों में इस मेल का टाइटल ‘एपस्टीन विक्टिम्स’ है, हालांकि अधिकारियों के नाम और कुछ जानकारियां छुपा दी गई हैं। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी। हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था। मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं। इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए। इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर '#MeToo' लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं। इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की।
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