कर्नाटक के गंगावती जिले की एक अदालत ने हम्पी के पास एक विदेशी महिला के साथ बलात्कार और एक विदेशी पर्यटक की हत्या के मामले में तीन दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। इस मामले ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था। 6 फरवरी को प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी पाया था। 16 फरवरी को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश सदानंद नागप्पा नाइक ने दोषियों को मौत की सजा दी। मल्लेश उर्फ हांडीमल, साई और शरणप्पा नाम के इन तीनों व्यक्तियों को इस जघन्य अपराध में संलिप्तता के लिए मौत की सजा सुनाई गई है।
हम्पी विश्व धरोहर स्थल के पास अपराध
यह मामला विश्व प्रसिद्ध हम्पी के पास एक इजरायली महिला के बलात्कार और एक अमेरिकी पर्यटक की हत्या से जुड़ा है। हमले की प्रकृति और हिंसक हत्या ने व्यापक आक्रोश पैदा किया और कड़ी सजा की मांग उठाई गई।
क्या आप इस मामले के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं?
इससे पहले 6 फरवरी को, कोप्पल जिले की एक अदालत ने हम्पी के पास दो महिलाओं (जिनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल थी) के साथ सामूहिक बलात्कार और एक पुरुष पर्यटक की हत्या के मामले में तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अदालत दोषियों की सुनवाई के बाद 16 फरवरी को फैसला सुनाएगी। यह घटना पिछले साल मार्च में विश्व धरोहर स्थल हम्पी के पास, सनापुरा में तुंगभद्रा के बाएं किनारे की नहर के पास हुई थी। पुलिस के अनुसार, दोषी ठहराए गए तीनों आरोपियों ने 6 मार्च, 2025 की रात को दो महिला पीड़ितों (एक इजरायली पर्यटक और एक होमस्टे संचालक) और उनके तीन अन्य पुरुष पर्यटक मित्रों से पैसे की मांग की। पैसे न देने पर, तीनों ने कथित तौर पर तीन पुरुष पर्यटकों को नहर में धकेल कर हमला किया और दोनों महिलाओं (इजरायली पर्यटक और होमस्टे संचालक) का यौन उत्पीड़न किया।
नहर में धकेले गए लोगों में से दो तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि ओडिशा का एक पर्यटक नहर में डूब गया। पुलिस ने बताया कि अदालत ने बाद में मल्लेश, साई और शरणप्पा को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत हत्या, सामूहिक बलात्कार, बलात्कार, हत्या के प्रयास और डकैती सहित कई अपराधों के लिए दोषी ठहराया।
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अमेरिका ईरान के माथे पर एयरक्राफ्ट कैरियर्स और खूंखार लड़ाकू विमान लेकर खड़ा है। तो वहीं इन सबके बीच एक और बड़ा खुलासा हो गया है। यह खुलासा किया है चीन की सेटेलाइट तस्वीरों ने। जिसने दिखा दिया है कि जॉर्डन के मुआफक साल्टी एयरबेस पर अमेरिका का सुपर डिफेंस सिस्टम ठाड यानी कि टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस तैनात हो चुका है। जिनकी तैनाती की यह तस्वीरें सवाल उठा रही हैं कि क्या अमेरिका ईरान पर हमले की तैयारी कर चुका है और हमले के बाद किसी भी जवाबी हमले से निपटने के लिए अमेरिका इन डिफेंस सिस्टमकी तैनाती कर रहा है। इसकी तैनाती उस बेस पर की गई है जिसे अमेरिकी फौजों का मिडिल ईस्ट में सबसे महत्वपूर्ण फॉरवर्ड लोकेशन माना जाता है और इसलिए ईरान के खिलाफ किसी कार्रवाही से पहले अमेरिका इस बेस पर अपने आप को मजबूत कर रहा है और अब चीन ने अमेरिका के इस चाल को बेनकाब कर दिया जहां इस पूरे मामले में चीन की सेटेलाइट्स का एक अलग खेल सामने आया है।
इस सिस्टम की तैनाती का खुलासा करने के पीछे चीनी कंपनी मिजार विजन का हाथ है। जिसकी सेटेलाइट तस्वीरों ने इन सिस्टम्स की तैनाती को सार्वजनिक कर दिया है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या चीन यह जानकारी ईरान तक पहुंचाना चाह रहा था? कुछ रिपोर्ट्स तो ऐसा दावा कर रही हैं कि चीनी युद्ध पोर्ट पर्शियन गल्फ के पास तैनात है और अमेरिकी गतिविधियों पर लगातार नजर भी बनाए हुए हैं। इन सबके बीच चीन की तरफ से अमेरिकी सिस्टम की लोकेशन लीक करना ईरान के लिए बेहद अहम हो जाता है। जहां किसी भी अमेरिकी कारवाही के बाद ईरान इस जानकारी की मदद से अमेरिकी बेसिस पर घातक हमलों को अंजाम दे सकता है। जिससे अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
थार्ड एक एडवांस एंटीबैलेस्टिक मिसाइल सिस्टम है जो दुश्मनों की बैलेस्टिक मिसाइलों को आसमान में ही मार गिराने के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह वायुमंडल के अंदर भी काम करता है और वायुमंडल के बाहर भी। अमेरिका के पास इसकी अब सिर्फ आठ बैटरीियां मौजूद हैं और इसमें इस्तेमाल होने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक भी अब अमेरिका के पास सीमित रह गया है। जॉर्डन का मुआफाक साल्टी बेस ईरान के बेहद करीब है और अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई भी कारवाई करता है तो उसे सबसे पहले मिडिल ईस्ट में मौजूद अपनी फौजों की रक्षा को मजबूत करना होगा।
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