शुरुआती गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 650 अंक उछला
मुंबई, 16 फरवरी (आईएएनएस)। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शुरुआती गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ।
हालांकि बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ सपाट हुई थी, लेकिन बंद होने के समय बीएसई सेंसेक्स 650.39 अंकों यानी 0.79 प्रतिशत की तेजी के साथ 83,277.15 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 211.65 (0.83 प्रतिशत) की उछाल के साथ 25,682.75 पर था। इस दौरान निफ्टी ऑटो को छोड़कर तकरीबन सभी इंडेक्स हरे निशान में ट्रेड करते हुए नजर आए।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप में 0.48 प्रतिशत तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप में 0.11 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई।
सेक्टर वार देखें, तो सिर्फ निफ्टी ऑटो में 0.73 प्रतिशत और निफ्टी ग्रोसेक्ट 15 में 0.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जबकि निफ्टी बैंक में 1.27 प्रतिशत की बढ़त, निफ्टी एफएमसीजी में 0.82 प्रतिशत की तेजी तो निफ्टी आईटी में 0.17 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली।
इस दौरान, सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल 9 शेयर ऐसे रहे जिसमें गिरावट देखी गई। पावर ग्रिड, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, आईटीसी और एशियन पेंट्स के शेयरों में 4.45 प्रतिशत तक की बढ़त देखी गई। वहीं, टेक महिंद्रा, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एम एंड एम और इंफोसिस के शेयरों में 1.44 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
ग्लोबल मार्केट्स में मिले-जुले संकेतों के बीच सोमवार को घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों (सेंसेक्स और निफ्टी) ने कमजोर शुरुआत की। हालांकि, बाद में निवेशकों की खरीदारी से बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वहीं दिन के दूसरे हिस्से में बाजार ने रफ्तार पकड़ते हुए 600 अंकों की बढ़त दर्ज की और हरे निशान पर बंद होने में सफल रहा।
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 7,395.41 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5,553.96 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।
--आईएएनएस
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असम में कांग्रेस नेता भूपेन वोरा ने कुछ ही घंटों में वापस लिया इस्तीफा, ये है वजह
असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार वोरा ने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा अपना इस्तीफा कुछ ही घंटों में वापस लेकर राजनीतिक गलियारों में चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया. सुबह करीब आठ बजे भेजे गए इस्तीफे में उन्होंने पार्टी नेतृत्व की ओर से उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया था, लेकिन दिन ढलते-ढलते स्थिति बदल गई.
‘आत्मसम्मान’ और संगठनात्मक नाराजगी
इस्तीफे के वक्त बोरा ने कहा था कि उनका निर्णय आत्मसम्मान की रक्षा के लिए है. उन्होंने संकेत दिया कि संगठनात्मक मामलों में समय पर और प्रभावी फैसले नहीं लिए जा रहे हैं. बोरा का यह भी कहना था कि शीर्ष नेतृत्व तक कई बार अपनी चिंता पहुंचाने के बावजूद उन्हें ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली.
उन्होंने किसी खास नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली और नेतृत्व की कमजोरी पर सवाल उठाए. उनके बयान से यह साफ था कि असंतोष अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से पनप रहा था.
चुनावी साल में बढ़ी चिंता
असम में इस वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं. ऐसे में बोरा का इस्तीफा कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था. इस्तीफे की खबर सामने आते ही पार्टी के वरिष्ठ नेता सक्रिय हो गए. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, असम प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह और अन्य नेताओं ने गुवाहाटी स्थित बोरा के आवास पर पहुंचकर उनसे चर्चा की.
सूत्रों के मुताबिक, लंबी बातचीत के बाद उन्हें मनाया गया और नेतृत्व ने उनके मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया.
राहुल गांधी से बातचीत के बाद बदला रुख
पार्टी सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी समेत शीर्ष नेतृत्व ने बोरा से सीधी बातचीत की. असम प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और परिवार के भीतर मतभेद संवाद से सुलझा लिए गए. करीब तीन दशक से कांग्रेस से जुड़े बोरा के लिए यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन बातचीत के बाद उन्होंने संगठन में बने रहने का निर्णय लिया.
बीजेपी का खुला निमंत्रण
इस्तीफे के तुरंत बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि बोरा के लिए भारतीय जनता पार्टी के दरवाजे खुले हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि यदि बोरा बीजेपी में आते हैं तो उन्हें सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ाने की कोशिश की जाएगी. हालांकि, बोरा ने किसी भी तरह के संपर्क से इनकार किया.
संदेश क्या?
पूरे घटनाक्रम ने असम कांग्रेस में आंतरिक चुनौतियों को उजागर किया है. हालांकि तत्काल संकट टल गया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि चुनावी वर्ष में संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना पार्टी के लिए बड़ी परीक्षा होगी.
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