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जुबीन गर्ग मौत मामले के पहले शिकायतकर्ता करेंगे उच्चतम न्यायालय का रुख

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रेलवे का सख्त नियम! ट्रेन में यह गलती पड़ सकती है भारी, जुर्माने के साथ जेल भी

Indian Railway News: रेलवे का सफर हर रोज करोड़ों लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा होता है. लोग लंबी दूरी तय करने के लिए ट्रेन को सबसे आरामदायक साधन मानते हैं, जहां वे सुकून से सो सकें, पढ़ सकें या आराम से अपनी मंजिल तक पहुंच सकें. लेकिन पिछले कुछ सालों में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते चलन ने इस शांति में खलल डाल दिया है. आपने भी सफर के दौरान देखा होगा कि कुछ लोग बिना इयरफोन लगाए तेज आवाज में रील देखते रहते हैं या स्पीकर खोलकर बातें करते हैं.

इससे आसपास बैठे सहयात्रियों का सिरदर्द बढ़ जाता है. खासकर रात के समय जब पूरी बोगी सोने की तैयारी में होती है, तब किसी के फोन से आने वाला कर्कश शोर पूरे माहौल को तनावपूर्ण बना देता है. अब भारतीय रेलवे ने ऐसे लापरवाह यात्रियों पर पूरी तरह लगाम कसने की तैयारी कर ली है. रेलवे का साफ कहना है कि चलती ट्रेन में दूसरों की शांति भंग करना केवल खराब आदत नहीं, बल्कि कानूनन अपराध है.

शोर मचाने पर जुर्माना और जेल का प्रावधान

ट्रेनों में यात्रियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने सख्त नियम लागू कर दिए हैं. अगर आप कोच के भीतर बिना हेडफोन के गाने बजाते हैं या ऊंची आवाज में वीडियो चलाते पकड़े गए, तो तत्काल एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. यह कार्रवाई मामले की गंभीरता पर निर्भर करती है. अगर कोई यात्री बार बार टोकने के बावजूद अपनी हरकत से बाज नहीं आता और बोगी में हंगामा या अशांति पैदा करता है, तो रेलवे अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत जुर्माना बढ़कर पांच हजार रुपये तक हो सकता है. इतना ही नहीं, मामले के बहुत ज्यादा बिगड़ने या सार्वजनिक शांति को बड़ा नुकसान पहुंचाने की स्थिति में दोषी को छह महीने तक की जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. दक्षिण रेलवे ने इस दिशा में विशेष अभियान शुरू करते हुए स्टेशनों और बोगियों में सूचनाएं लगवाना शुरू कर दिया है.

किन आदतों से दूसरों को होती है परेशानी

सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करते समय कुछ बुनियादी शिष्टाचार का पालन करना बेहद जरूरी होता है. कई बार लोग अनजाने में या अपनी आदत के चलते ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो दूसरों के लिए भारी असुविधा का कारण बन जाती हैं. बिना इयरफोन लगाए लगातार सोशल मीडिया स्क्रोल करना और रील देखना इनमें सबसे आम है. वातानुकूलित यानी एसी डिब्बों में खिड़कियां और दरवाजे बंद रहने की वजह से छोटी सी आवाज भी गूंजती है और दूर तक सुनाई देती है. इसके अलावा फोन को लाउडस्पीकर पर रखकर लंबी निजी बातचीत करना, बार बार तेज रिंगटोन बजना और देर रात तक तेज रोशनी या आवाज वाले वीडियो देखना साथी यात्रियों की नींद खराब करता है. यह स्थिति उन बुजुर्गों, बीमार लोगों और छोटे बच्चों के लिए बहुत कष्टदायक हो जाती है, जो सफर में विश्राम की उम्मीद करते हैं.

टोकने पर विवाद से बचें, रेलवे से लें मदद

सफर के दौरान अक्सर यह देखा जाता है कि जब कोई परेशान होकर सामने वाले को आवाज धीमी करने को कहता है, तो बात बहस और गाली गलौज तक पहुंच जाती है. कई मामलों में स्थिति मारपीट तक पहुंच जाती है. रेलवे प्रशासन की सलाह है कि यात्री आपस में उलझने और विवाद को बढ़ावा देने के बजाय सीधे ट्रेन में मौजूद आधिकारिक तंत्र की मदद लें. जब भी कोई यात्री बार बार आग्रह के बाद भी शोर बंद न करे, तो तुरंत टिकट चेकिंग स्टाफ यानी टीटीई या कोच अटेंडेंट से संपर्क करना चाहिए. आप अपनी सीट संख्या, बोगी नंबर और समस्या का ब्योरा देकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा रेलवे की आधिकारिक हेल्पलाइन और रेलमदद पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है. अगर किसी तरह के खतरे या हाथापाई की आशंका हो, तो रेलवे सुरक्षा बल को बुलाना सबसे सुरक्षित उपाय है.

सार्वजनिक जिम्मेदारी और समझदारी भरा सफर

रेलवे बोर्ड ने पहले भी ऐसे दिशा निर्देश जारी किए थे, लेकिन अब जमीनी स्तर पर इनके कड़ाई से पालन की तैयारी है. ट्रेन किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह एक सार्वजनिक सुविधा है जहां हर किसी को शांति और सुरक्षा के साथ यात्रा करने का अधिकार है. सफर का आनंद तभी है जब हम अपनी खुशियों के साथ साथ दूसरों की सुविधा और आराम का भी पूरा मान रखें. जब भी आप यात्रा करें, अपने पास इयरफोन जरूर रखें और बात करते समय अपनी आवाज धीमी रखें. रात के समय फोन को साइलेंट या वाइब्रेशन मोड पर रखना एक अच्छे नागरिक की पहचान है. थोड़ी सी समझदारी आपको भारी जुर्माने और कानूनी पचड़े से बचा सकती है, साथ ही सफर को हर किसी के लिए सुखद और यादगार बना सकती है.

यह भी पढ़ें: मध्य प्रदेश के रतलाम में रेलवे ट्रैक पर फंसी कार को ट्रेन ने मारी टक्कर, 50 मीटर तक घिसटती गई गाड़ी

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  Sports

Rajasthan के Sachin Yadav और Karan Lamba ने ठोके 194 रन Railways के खिलाफ 338 रन की साझेदारी

रणजी ट्रॉफी में राजस्थान और रेलवे के बीच खेले जा रहे मुकाबले के दूसरे दिन ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे क्रिकेट फैंस लंबे समय तक याद रख सकते हैं। राजस्थान के बल्लेबाज सचिन यादव और करण लांबा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 194-194 रन बनाए, लेकिन दोनों ही खिलाड़ी दोहरे शतक से केवल 6 रन दूर रह गए। दोनों का एक ही स्कोर पर आउट होना इस मुकाबले का सबसे खास संयोग बन गया।

जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेले जा रहे ग्रुप डी के इस मुकाबले में राजस्थान ने दूसरे दिन सुबह 247 रन पर 2 विकेट से आगे खेलना शुरू किया। सचिन और करण ने अपनी शानदार बल्लेबाजी जारी रखी और रेलवे के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया। दोनों के बीच 338 रन की बड़ी साझेदारी हुई, जिसने राजस्थान को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि, सचिन के आउट होने के बाद मेजबान टीम की पारी लड़खड़ा गई और पूरी टीम 497 रन बनाकर आउट हो गई।

सचिन यादव ने अपनी 194 रन की पारी के लिए 358 गेंदों का सामना किया। इस दौरान उन्होंने 22 चौके और 4 छक्के लगाए। दूसरी ओर, अपना 11वां फर्स्ट क्लास मुकाबला खेल रहे करण लांबा ने केवल 284 गेंदों पर 194 रन बनाए। उनकी पारी में 19 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। करण ने इस दौरान अपना तीसरा रणजी शतक भी पूरा किया। दोनों बल्लेबाजों ने धैर्य और आक्रामकता के बीच अच्छा तालमेल दिखाया।

सुबह नई गेंद आने के बाद बल्लेबाजों को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रेलवे के गेंदबाजों ने किनारे लगवाने में सफलता हासिल की, लेकिन खराब क्षेत्ररक्षण के कारण टीम कुछ आसान मौके गंवा बैठी। इसका फायदा राजस्थान के बल्लेबाजों को मिला। शुरुआती दबाव से निकलने के बाद सचिन और करण ने खुलकर रन बनाए और रेलवे के गेंदबाजी आक्रमण को थका दिया। सचिन स्टंप आउट हुए, जबकि करण पॉइंट पर कैच दे बैठे।

दोनों बल्लेबाज कई वर्षों से राजीव गांधी क्रिकेट अकादमी में साथ अभ्यास करते रहे हैं। करण ने बताया कि लंबे समय से साथ खेलने के कारण दोनों एक-दूसरे की ताकत और खेल को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने यह भी माना कि दोहरे शतक से चूकने का थोड़ा अफसोस जरूर था, लेकिन वह इस बारे में बहुत ज्यादा नहीं सोच रहे थे। करण के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट में बल्लेबाजी के लिए इतनी अच्छी पिच कम ही मिलती है और उन्होंने लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की कोशिश की।

दिन के आखिरी सत्र में राजस्थान के गेंदबाजों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। पदार्पण कर रहे तेज गेंदबाज दानिश भांबू ने सटीक गेंदबाजी की, जबकि चेतन शर्मा और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकाश सिंह ने उनका साथ दिया। बाएं हाथ के स्पिनर मोहित चांगड़ा ने सलामी बल्लेबाज विवेक सिंह को पगबाधा आउट कर रेलवे को पहला झटका दिया।

दिन का खेल समाप्त होने तक रेलवे ने 1 विकेट पर 46 रन बना लिए थे और वह राजस्थान से 451 रन पीछे है। ऐसे में मुकाबले में वापसी करने के लिए रेलवे के बल्लेबाजों को अगले दिन बड़ी साझेदारियां करनी होंगी।

Mon, 19 Oct 2026 22:45:00 +0530

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