Census 2027 की विश्वसनीयता खत्म कर देंगे नए नियम, Congress नेता Jairam Ramesh का दावा
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 17 अक्टूबर को 1990 के जनगणना नियमों में किए गए संशोधनों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 2027 की जनगणना के लिए गणना करने वालों (एन्यूमरेटर्स) के दायरे को बढ़ाने से आरएसएस और भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं को फायदा होगा। रमेश ने कहा कि यह साफ है कि यह आरएसएस/भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं के लिए एक 'रोजगार गारंटी योजना' है।
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X पर एक पोस्ट में, उन्होंने आरोप लगाया कि ये बदलाव बेलगाम में 10 जुलाई से 12 जुलाई तक हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की एक हालिया बैठक के बाद किए गए हैं। रमेश ने दावा किया कि 'जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च-स्तरीय समिति' - जिसने भारतीय और विदेशी संगठनों से जनसांख्यिकीय बदलावों पर सुझाव मांगे थे - उसमें मुख्य रूप से RSS से जुड़े सदस्य शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अब जनगणना 2027 के लिए योग्य गणनाकारों (enumerators) की सूची का विस्तार कर दिया है। इसके पीछे काफी गड़बड़ी है। 10-12 जुलाई 2026 के दौरान, RSS ने बेलगाम में अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था, जिसका एकमात्र एजेंडा 'जनगणना 2027' था। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 26 मई 2026 को गठित 'जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च-स्तरीय समिति' ने अभी हाल ही में देश में जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर जनता (जिसमें भारतीय और विदेशी संगठन भी शामिल हैं) से सुझाव मांगे हैं। इस समिति में 'उच्च-स्तरीय' बस एक ही बात है - इसके सदस्यों का RSS इकोसिस्टम से जुड़ा होना। इसलिए, हमें पता है कि ये सुझाव कहां से आने वाले हैं।
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रमेश ने आगे आरोप लगाया कि इस संशोधन से 2027 की जनगणना की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इसमें भी 'सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना' (SIR) की तरह ही हेरफेर की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले से ही खराब हो चुकी जनगणना और भी ज्यादा दूषित हो जाएगी। एक और संस्था को बर्बाद किया जा रहा है। SIR की तरह, जनगणना में भी खतरनाक तरीके से छेड़छाड़ की जाएगी। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी की कुटिल योजनाओं की कोई सीमा नहीं है। यह टिप्पणी केंद्र सरकार द्वारा 16 अक्टूबर को 1990 के जनगणना नियमों में किए गए उस संशोधन के बाद आई है, जिसके तहत जनगणना करने वालों (एन्यूमेरेटर) के दायरे को बढ़ा दिया गया है। अब इसमें सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, सरकारी अधिकारी, क्लर्क और अन्य लोगों को भी शामिल किया गया है।
अभिजीत दिपके को SEM कोर्ट ने दी जमानत, मगर लगाई एक बड़ी शर्त
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत मिल गई है और उनसे एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को कहा गया है। उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिपके को न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा जाएगा और बॉन्ड की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसे रिहा कर दिया जाएगा। रिहाई की प्रक्रिया के तहत, उससे फिर से एक 'पीस बॉन्ड' (शांति बनाए रखने का बॉन्ड) पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा बुलाए गए 'लहरा दो तिरंगा' मार्च के मद्देनजर सेंट्रल दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, जिसके चलते शनिवार को सेंट्रल पार्क बंद रहा। यह मार्च शुक्रवार को होना था, लेकिन CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत 100 से ज्यादा लोगों को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिए जाने के कारण यह मार्च नहीं हो सका।
दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद नेहा बोरा को रिहा कर दिया गया है, जबकि अभिजीत दिपके अभी भी 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS), 2023 की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में हैं। उन्हें आज दिन में बाद में एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।
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अरविंद केजरीवाल की 'आम आदमी पार्टी' (AAP) और वामपंथी गुट सहित अधिकांश विपक्षी दलों ने दिपके का समर्थन किया है और उनकी हिरासत को गैर-कानूनी बताया है। वहीं, केंद्र सरकार ने विपक्ष पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगाया है और जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई करने की बात कही है। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को कनॉट प्लेस और नई दिल्ली के अन्य हिस्सों में लागू निषेधाज्ञा (prohibitory orders) के उल्लंघन के मामले में कई FIR भी दर्ज की हैं। पुलिस ने बताया कि घोषणाएं किए जाने के बावजूद कनॉट प्लेस के आसपास भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस के अनुसार, BNSS की धारा 163 (मजिस्ट्रेट द्वारा जारी निषेधाज्ञा) के उल्लंघन के लिए ये FIR दर्ज की गई हैं।
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