बाजार में तेजी के साथ एफआईआई की बिकवाली में भारी कमी, सेंटिमेंट स्थिर होने के संकेत
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में 1,166 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया. इसकी वजह बाजार में तेजी लौटना था। यह जानकारी एनालिस्ट की ओर से शनिवार को दी गई. हालांकि, साप्ताहिक आधार पर एफआईआई विक्रेता बने हुए हैं और बीते सप्ताह उन्होंने 8,991 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी, जो कि पिछले सप्ताह की 30,294 करोड़ रुपए की बिकवाली के मुकाबले काफी कम थी, जो कि विदेशी निवेशकों के रुझान में बदलाव को दिखाती है.
दूसरी तरफ, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) शुद्ध खरीदार बने हुए हैं और बीते हफ्ते उन्होंने 7,813 करोड़ रुपए इक्विटी में निवेश किए। हालांकि, शुक्रवार को उन्होंने 3,661 करोड़ रुपए की बिकवाली थी. इस महीने की शुरुआत से अब तक (16 अक्टूबर तक) एफआईआई 48,769 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं, जबकि डीआईआई ने इस दौरान 48,168 करोड़ रुपए का निवेश किया है. विश्लेषकों का कहना है कि एफआईआई की बिकवाली में काफी कमी आना और शुक्रवार को फंड फ्लो का उलटना यह संकेत देता है कि बाजार का सेंटिमेंट स्थिर हो रहा है, हालांकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रिकवरी को अभी भी जोखिम में डाल सकती हैं.
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उन्होंने आगे कहा कि निवेशक ब्रेंट क्रूड की कीमतों के रुझान और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं. वहीं, घरेलू स्तर पर ध्यान वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही की कमाई और सप्ताह के मध्य में आने वाले आरबीआई एमपीसी के मिनट्स पर है. पिछले सप्ताह बेंचमार्क सूचकांकों में जोरदार वापसी देखने को मिली, जिसमें निफ्टी ने लगातार दूसरे सप्ताह अपनी रिकवरी जारी रखी. रुपए में मजबूती और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में नरमी से बाजार के सेंटिमेंट को सहारा मिला, हालांकि ब्रेंट क्रूड का 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहना महंगाई और बाहरी जोखिमों की चिंताओं को बनाए रखे हुए है.
INPUT: IANS
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए 9 क्षेत्रों पर फोकस, स्टार्टअप के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने की बैठक
दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार तकनीक आधारित समाधान तलाश रही है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप के साथ बैठक कर इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की. बैठक में नौ क्षेत्रों को लेकर विचार-विमर्श हुआ, जिनमें एयर क्वालिटी मैपिंग, प्रदूषण की निगरानी, स्वच्छ वाहन, ट्रैफिक प्रबंधन और कचरे का बेहतर इस्तेमाल जैसे विषय शामिल रहे. मंत्री ने प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया. इसके साथ ही इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई.
प्रदूषण की निगरानी के लिए तकनीक का होगा इस्तेमाल
बैठक में एयर क्वालिटी मैपिंग को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया. प्रदूषण के स्तर और उसके स्रोतों की सटीक जानकारी हासिल करना प्रभावी नियंत्रण के लिए जरूरी है. इस दिशा में स्टार्टअप के साथ संभावित तकनीकी समाधानों पर चर्चा की गई. इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के जरिए निगरानी को मजबूत बनाने की पहल भी इस कवायद का हिस्सा है. भूपेंद्र यादव ने ओसीएम के साथ मॉनिटरिंग करने की योजना का भी उल्लेख किया, हालांकि इस व्यवस्था के विस्तृत स्वरूप को लेकर अधिक जानकारी सामने नहीं आई है.
धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ स्वच्छ वाहनों पर जोर
दिल्ली में धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए प्रदूषण के दूसरे स्रोतों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई. बैठक में स्वच्छ वाहनों को बढ़ावा देने और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई. प्रदूषण कम करने के लिए वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण और यातायात प्रबंधन में सुधार को महत्वपूर्ण माना गया. इसके लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करने में स्टार्टअप की भूमिका अहम हो सकती है.
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पराली जलाने की निगरानी को बनाया जाएगा हाईटेक
पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की जरूरत पर भी चर्चा हुई. पराली जलाने के मुद्दे पर कृषि मंत्रालय के साथ बैठक की गई थी. इस दिशा में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने और पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के उपायों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.
DG सेट से होने वाले प्रदूषण पर भी चर्चा
बैठक में डीजल जनरेटर (DG) सेट से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों पर विचार किया गया. इसके लिए तकनीकी विकल्पों और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई. प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ काम करना दिल्ली की वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है. प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कचरे के निस्तारण और उसके दोबारा इस्तेमाल का मुद्दा भी बैठक में उठा. चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि कचरे की रीसाइक्लिंग को बेहतर बनाकर उसका उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है. ठोस अपशिष्ट का उचित प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से निपटान पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है.
नौ क्षेत्रों में समाधान तलाशने की कवायद
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की स्टार्टअप के साथ हुई बैठक का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण के लिए नए और प्रभावी तकनीकी विकल्प तलाशना रहा. एयर क्वालिटी मैपिंग, निगरानी व्यवस्था, स्वच्छ परिवहन, ट्रैफिक नियंत्रण, पराली जलाने की मॉनिटरिंग, DG सेट और ठोस कचरे के प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा के जरिए दिल्ली में प्रदूषण कम करने की रणनीति को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है.
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