दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए 9 क्षेत्रों पर फोकस, स्टार्टअप के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने की बैठक
दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार तकनीक आधारित समाधान तलाश रही है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप के साथ बैठक कर इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की. बैठक में नौ क्षेत्रों को लेकर विचार-विमर्श हुआ, जिनमें एयर क्वालिटी मैपिंग, प्रदूषण की निगरानी, स्वच्छ वाहन, ट्रैफिक प्रबंधन और कचरे का बेहतर इस्तेमाल जैसे विषय शामिल रहे. मंत्री ने प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया. इसके साथ ही इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई.
प्रदूषण की निगरानी के लिए तकनीक का होगा इस्तेमाल
बैठक में एयर क्वालिटी मैपिंग को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया. प्रदूषण के स्तर और उसके स्रोतों की सटीक जानकारी हासिल करना प्रभावी नियंत्रण के लिए जरूरी है. इस दिशा में स्टार्टअप के साथ संभावित तकनीकी समाधानों पर चर्चा की गई. इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के जरिए निगरानी को मजबूत बनाने की पहल भी इस कवायद का हिस्सा है. भूपेंद्र यादव ने ओसीएम के साथ मॉनिटरिंग करने की योजना का भी उल्लेख किया, हालांकि इस व्यवस्था के विस्तृत स्वरूप को लेकर अधिक जानकारी सामने नहीं आई है.
धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ स्वच्छ वाहनों पर जोर
दिल्ली में धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए प्रदूषण के दूसरे स्रोतों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई. बैठक में स्वच्छ वाहनों को बढ़ावा देने और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई. प्रदूषण कम करने के लिए वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण और यातायात प्रबंधन में सुधार को महत्वपूर्ण माना गया. इसके लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करने में स्टार्टअप की भूमिका अहम हो सकती है.
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पराली जलाने की निगरानी को बनाया जाएगा हाईटेक
पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की जरूरत पर भी चर्चा हुई. पराली जलाने के मुद्दे पर कृषि मंत्रालय के साथ बैठक की गई थी. इस दिशा में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने और पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के उपायों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.
DG सेट से होने वाले प्रदूषण पर भी चर्चा
बैठक में डीजल जनरेटर (DG) सेट से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों पर विचार किया गया. इसके लिए तकनीकी विकल्पों और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई. प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ काम करना दिल्ली की वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है. प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कचरे के निस्तारण और उसके दोबारा इस्तेमाल का मुद्दा भी बैठक में उठा. चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि कचरे की रीसाइक्लिंग को बेहतर बनाकर उसका उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है. ठोस अपशिष्ट का उचित प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से निपटान पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है.
नौ क्षेत्रों में समाधान तलाशने की कवायद
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की स्टार्टअप के साथ हुई बैठक का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण के लिए नए और प्रभावी तकनीकी विकल्प तलाशना रहा. एयर क्वालिटी मैपिंग, निगरानी व्यवस्था, स्वच्छ परिवहन, ट्रैफिक नियंत्रण, पराली जलाने की मॉनिटरिंग, DG सेट और ठोस कचरे के प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा के जरिए दिल्ली में प्रदूषण कम करने की रणनीति को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है.
Axis Bank को दूसरी तिमाही में 7,704 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ
निजी क्षेत्र के एक्सिस बैंक ने शनिवार को बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में उसका एकीकृत शुद्ध लाभ 39.4 प्रतिशत बढ़कर 7,704.67 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में बैंक का एकीकृत शुद्ध लाभ 5,527.85 करोड़ रुपये था। बैंक ने शेयर बाजार को बताया कि एकल आधार पर उसका शुद्ध लाभ सितंबर तिमाही में 37.6 प्रतिशत बढ़कर 7,003.28 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 5,089.64 करोड़ रुपये था।
दूसरी तिमाही में बैंक का परिचालन लाभ छह प्रतिशत बढ़कर 11,083 करोड़ रुपये हो गया। बैंक का मुख्य परिचालन लाभ 11 प्रतिशत उछलकर 10,998 करोड़ रुपये रहा। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में परिचालन लागत सालाना आधार पर नौ प्रतिशत बढ़ी।
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बैंक की शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) 15,371 करोड़ रुपये रही, जो पिछली तिमाही से पांच प्रतिशत और सालाना आधार पर 12 प्रतिशत अधिक है। एक बयान के अनुसार दूसरी तिमाही में बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) 3.36 प्रतिशत रहा। बैंक का कुल ऋण 30 सितंबर, 2026 तक सालाना आधार पर 23 प्रतिशत और तिमाही आधार पर नौ प्रतिशत बढ़कर 13,73,727 करोड़ रुपये पहुंच गया।
खुदरा ऋण सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 7,39,905 करोड़ रुपये रहा और कुल शुद्ध ऋण में इसकी हिस्सेदारी 54 प्रतिशत रही। समीक्षाधीन तिमाही में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात सुधरकर 1.16 प्रतिशत रहा, जो सालाना आधार पर 0.30 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 0.12 प्रतिशत कम है। शुद्ध एनपीए 0.35 प्रतिशत रहा, जो सालाना आधार पर 0.09 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 0.04 प्रतिशत कम है।
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