सुप्रीम कोर्ट ने CBI मामले में RG कर कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को दी जमानत, 2 साल की जेल और धीमी सुनवाई का दिया हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के प्रसिद्ध RG कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जुड़े एक मामले में शुक्रवार को जमानत दे दी। अदालत ने यह फैसला उनके लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे की धीमी रफ्तार को आधार बनाते हुए सुनाया है। घोष पर कॉलेज के कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और अयोग्य उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए मेरिट अंकों में हेरफेर करने के गंभीर आरोप हैं। कोर्ट ने उनके लंबे समय तक जेल में रहने और सुनवाई की धीमी गति को ध्यान में रखा। कोर्ट ने गौर किया कि घोष के दो साल से अधिक समय तक हिरासत में रहने के बावजूद, 147 गवाहों में से अब तक केवल सात गवाहों से ही पूछताछ हो पाई है।
जस्टिस एम.एम. सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने 15 अक्टूबर को यह आदेश दिया। इसके साथ ही, कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के 23 फरवरी, 2026 के उस फैसले के खिलाफ घोष की अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि संबंधित ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों के आधार पर घोष को जमानत पर रिहा किया जाए।
कोर्ट ने कहा, "इस मामले को देखते हुए, हिरासत की अवधि और सुनवाई के मौजूदा चरण पर विचार करते हुए, हम हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करने और इस अपील को स्वीकार करने का निर्णय लेते हैं।"
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सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष को जमानत क्यों दी?
हिरासत में बिताया गया लंबा समय और सुनवाई की धीमी गति सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुख्य आधार थे। बेंच ने गौर किया कि घोष दो साल से अधिक समय से जेल में हैं, जबकि अभियोजन पक्ष ने कुल 147 गवाहों में से अब तक केवल सात गवाहों से ही पूछताछ की है।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने माना कि जमानत खारिज होने के खिलाफ उनकी अपील स्वीकार की जानी चाहिए। इस आदेश ने कलकत्ता हाई कोर्ट के पिछले फैसले को पलट दिया है, हालांकि घोष के खिलाफ लगे आरोप अभी भी चल रही आपराधिक कार्यवाही का हिस्सा बने रहेंगे। जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें बरी कर दिया गया है या कोर्ट ने यह मान लिया है कि आरोप झूठे हैं। घोष को ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों का पालन करना होगा।
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RG कर कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल पर क्या आरोप हैं?
घोष के खिलाफ CBI का मामला RG कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उनके प्रिंसिपल रहने के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। इसके साथ ही, उन पर अयोग्य उम्मीदवारों को दाखिला दिलाने के लिए मेरिट स्कोर में हेरफेर करने का भी आरोप है।
एजेंसी ने उन पर 'विशेष मामला संख्या 1/2025' (Special Case No. 1 of 2025) के तहत आरोप लगाए हैं। यह मामला 24 अगस्त 2024 को कोलकाता में CBI की भ्रष्टाचार-रोधी शाखा (Anti-Corruption Branch) द्वारा दर्ज की गई एक FIR से शुरू हुआ। इन आरोपों में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B, 409, 420, 468 और 471 के तहत आपराधिक साजिश, विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करना शामिल है। इस मामले में 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) के प्रावधान भी लागू किए गए हैं।
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जमानत का मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा
दो बार जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद, घोष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 7 जनवरी 2025 को विशेष CBI अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, और बाद में 23 फरवरी 2026 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी उनकी चुनौती को खारिज कर दिया। इसके बाद, लगातार हिरासत में रहने से राहत पाने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करने से पहले, उनके जेल में बिताए गए समय और मुकदमे की कार्यवाही में हुई प्रगति पर विचार किया।
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दिल्ली में 'तिरंगा मार्च' विवाद! AISA अध्यक्ष नेहा बोरा रिहा, CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को SEM कोर्ट में किया जाएगा पेश
राजधानी दिल्ली में कनॉट प्लेस पर प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस द्वारा की गई एहतियातन कार्रवाई के बाद अब राजनीतिक और छात्र संगठनों का विरोध तेज हो गया है। दिल्ली पुलिस ने शनिवार तड़के 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को रिहा कर दिया है, जबकि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने यह जानकारी दी। कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले दोनों को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत हिरासत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बोरा को रिहा कर दिया गया, जबकि दीपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग करने के एक नए मामले में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दीपके को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें एसईएम की अदालत में पेश किया जाएगा। अदालत यह तय करेगी कि उन्हें जेल भेजा जाएगा या जमानत पर रिहा किया जाएगा। इससे पहले, दस अक्टूबर को जब दीपके को हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था, तब भी शांति भंग करने का एक अलग मामला दर्ज किया गया था। उस समय उनसे एक साल तक शांति बनाए रखने के मुचलके पर हस्ताक्षर कराए थे।
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रिहा होने के बाद नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए हिरासत में लेने की इन कार्रवाई को ‘‘गैर-कानूनी’’ करार दिया। बोरा ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘मुझे मंडी हाउस से हिरासत में लिया गया और सुबह पांच बजे तक (थाने में) रखा गया। आप (पुलिस) गैर-कानूनी तरह से हिरासत में क्यों ले रहे हैं? देश में यह काफी समय से हो रहा है और इस आंदोलन ने साफ कर दिया है कि ऐसी गिरफ्तारियां की जा रही हैं। इसने ऐसी घटनाओं को उजागर किया है।
पुलिस कानून-व्यवस्था का पालन करने और नियमों के मुताबिक काम करने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है।’’ आइसा अध्यक्ष ने दीपके समेत हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘इस आंदोलन के दौरान पुलिस शाम को गैर-कानूनी तरीके से लोगों को हिरासत में लेती है और अगली सुबह या शाम को छोड़ती है। हमें समझ नहीं आता कि कौन सा कानून इस तरह की हिरासत की इजाजत देता है। अभिजीत दीपके सहित हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाना चाहिए। मध्य दिल्ली में कर्फ्यू जैसे माहौल को खत्म किया जाना चाहिए।’’
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बोरा ने कहा, ‘‘ज्ञानेश कुमार और भाजपा सरकार को अपना अड़ियल रवैया छोड़ना चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को या तो इस्तीफा देना चाहिए या फिर महाभियोग चलाकर उन्हें जेल भेजा जाए। साथ ही एसआईआर प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगनी चाहिए ताकि दिल्ली और देश की जनता राहत की सांस ले सके।’’ पुलिस सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को कनॉट प्लेस जाने के दौरान बोरा को मंडी हाउस से और दीपके को झंडेवालान से हिरासत में लिया गया था।
आइसा ने दावा किया कि हिरासत में लिए जाने के बाद बोरा को आर.के. पुरम थाने ले जाए जाने से पहले पांच घंटे तक दिल्ली में एक जगह से दूसरी जगह घुमाया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि वकील आधी रात के आसपास आर.के. पुरम थाने पहुंचे, लेकिन उन्हें बोरा से मिलने नहीं दिया गया। आइसा ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें कब रिहा किया जाएगा और यह जानते हुए भी कि वह पिछले कुछ दिन से अस्वस्थ हैं, उन्हें दवाएं देने से मना किया।
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पुलिस के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुचारू यातायात के लिए लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया। कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में सुरक्षाकर्मियों की घेराबंदी है और पार्क के भीतर त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) के जवान तैनात हैं साथ ही इलाके में अतिरिक्त बल को भी तैनात किया गया है।
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