'एमएसडीई इंडिया' एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल, 'एआई फॉर इनक्लूसिव डेवलपमेंट' पर विशेष पवेलियन लगाएगा
नई दिल्ली, 15 फरवरी (आईएएनएस)। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, स्किल डेवलपमेंट और एंटरप्रेन्योरशिप मिनिस्ट्री (एमएसडीई) इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेगी।
इसमें एक खास पवेलियन होगा जो एआई फॉर इनक्लूसिव डेवलपमेंट के विजन पर फोकस करेगा। इसमें स्किलिंग को इंडिया की एआई जर्नी के सेंटर में रखा जाएगा।
क्योंकि यह समिट ग्लोबल लीडर्स, पॉलिसीमेकर्स और टेक्नोलॉजी पायनियर्स को एक साथ ला रहा है, जिसे ग्लोबल साउथ में सबसे बड़े एआई गैदरिंग्स में से एक माना जा रहा है, एमएसडीई की मौजूदगी भारत के इस कमिटमेंट को दिखाएगी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोजी-रोटी को हटाए बिना उसे मजबूत करे।
एआई समिट का स्वागत करते हुए, स्किल डेवलपमेंट और एंटरप्रेन्योरशिप मिनिस्टर (एमओएस) जयंत सिंह चौधरी ने कहा, ग्लोबल साउथ में सबसे बड़े एआई समिट्स में से एक की भारत द्वारा होस्टिंग, एक जिम्मेदार और इनक्लूसिव एआई फ्यूचर को आकार देने के हमारे इरादे को दिखाता है। मैं ग्लोबल पार्टनर्स के साथ मीनिंगफुल एंगेजमेंट और यह दिखाने के लिए उत्सुक हूं कि भारत अपने युवाओं और वर्कफोर्स को एआई-रेडी स्किल्स से कैसे तैयार कर रहा है जो सभी के लिए ग्रोथ और मौके को पावर देते हैं।
बयान में कहा गया, एमएसडीई पवेलियन इस विजन को एआई में स्किलिंग, एआई के साथ स्किलिंग और एआई के लिए स्किलिंग के आस-पास बने एक बड़े फ्रेमवर्क के जरिए एक्शन में बदलेगा। एआई में स्किलिंग, एसओएआर (एआई रेडीनेस के लिए स्किलिंग), नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क-अलाइन्ड नई जॉब रोल्स और इंडस्ट्री के साथ पार्टनरशिप में दिए जाने वाले शॉर्ट-ड्यूरेशन नैनो-क्रेडेंशियल्स जैसी पहलों के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बुनियादी और एडवांस्ड काबिलियत बनाने पर फोकस करेगी।
उन्होंने कहा, पवेलियन में आने वाले विजिटर्स माइक्रो-लर्निंग मॉड्यूल, लाइव डैशबोर्ड और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन का अनुभव कर पाएंगे जो दिखाएंगे कि कैसे एआई लिटरेसी को सभी उम्र और बैकग्राउंड में फैलाया जा सकता है, जिससे सीखने वाले एआई-इनेबल्ड करियर में बदल सकें।
एआई के साथ स्किलिंग यह दिखाएगी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खुद स्किल डेवलपमेंट की डिलीवरी और गवर्नेंस को कैसे बदल रहा है। स्किल इंडिया असिस्टेंट (एसआईए) जैसे एआई-पावर्ड सिस्टम सीखने वालों को उनकी क्वालिफिकेशन और रुचियों के हिसाब से करियर के रास्तों पर गाइड करेंगे, जबकि स्किल इंडिया डिजिटल हब के साथ जुड़े रिकमेंडेशन इंजन सभी सेक्टर में कोर्स के सुझावों को पर्सनलाइज करेंगे।
एआई-इनेबल्ड मॉनिटरिंग और असेसमेंट टूल्स, जिसमें कंप्यूटर विजन-बेस्ड प्रैक्टिकल इवैल्यूएशन शामिल हैं, यह दिखाएंगे कि टेक्नोलॉजी स्किल सर्टिफिकेशन में ट्रांसपेरेंसी, एफिशिएंसी और क्रेडिबिलिटी कैसे बढ़ा सकती है। ये इनोवेशन मिलकर दिखाएंगे कि एआई को स्किलिंग इकोसिस्टम में कैसे शामिल किया जा रहा है ताकि नतीजे, पहुंच और क्वालिटी बेहतर हो सके।
बयान में आगे कहा गया, एआई के लिए स्किलिंग एक ऐसी इकॉनमी में वर्कफोर्स की तैयारी को एड्रेस करेगी जहां एआई प्रोडक्टिविटी को तेजी से बढ़ा रहा है। गेमिफाइड डेमोंस्ट्रेशन और रियल-लाइफ पर्सोना के जरिए, पैवेलियन यह दिखाएगा कि किसान एआई-ड्रिवन एडवाइजरी सिस्टम का फायदा कैसे उठा सकते हैं, इलेक्ट्रीशियन एआई-इनेबल्ड एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके खराबी का पता कैसे लगा सकते हैं, कंस्ट्रक्शन वर्कर साइट पर मल्टीलिंगुअल एआई लर्निंग सपोर्ट कैसे एक्सेस कर सकते हैं, और बुनकर एआई टूल्स का इस्तेमाल करके कस्टमाइज्ड डिजाइन को-क्रिएट कैसे कर सकते हैं। ये उदाहरण इस मैसेज को मजबूत करेंगे कि एआई सिर्फ कोडर या बड़े एंटरप्राइज तक ही सीमित नहीं है; यह भारत के इनफॉर्मल और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स के लिए भी प्रोडक्टिविटी और इनकम बढ़ा सकता है।
समिट के दौरान, एमओएस चौधरी एआई स्किलिंग और डिजिटल इन्क्लूजन में कोलेबोरेशन को गहरा करने के लिए ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर्स, एकेडेमिया और इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ कई एंगेजमेंट भी करेंगे। बयान में कहा गया, एमओएस चौधरी 17 फरवरी को एमएसडीई पवेलियन का दौरा करेंगे, ताकि इंस्टॉलेशन का रिव्यू कर सकें, युवा पार्टिसिपेंट्स से बातचीत कर सकें और एआई-इनेबल्ड स्किलिंग सॉल्यूशंस दिखाने वाले स्टेकहोल्डर्स से जुड़ सकें।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
राजनीतिक सुधार के बिना आर्थिक सुधार संभव नहीं, पाकिस्तान को भ्रष्टाचार खत्म करना होगा: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 15 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सबसे पहले उसकी राजनीति को दुरुस्त करना होगा। भ्रष्टाचार से ग्रस्त और कुप्रबंधन वाली राजनीतिक व्यवस्था आर्थिक विकास में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। यह बात पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन में प्रकाशित एक लेख में कही गई है।
यह लेख अर्थशास्त्री साकिब शेरानी ने लिखा है, जो पाकिस्तान की कई पूर्व आर्थिक सलाहकार परिषदों के सदस्य रह चुके हैं। लेख में कहा गया है कि कोई भी आर्थिक व्यवस्था दरअसल राजनीतिक व्यवस्था का ही उत्पाद होती है। राजनीतिक तंत्र सभी उप-प्रणालियों से ऊपर होता है, इसलिए उसमें आई खराबी का असर पूरे ढांचे पर पड़ता है। ऐसे में गिरती हुई अर्थव्यवस्था को राजनीतिक अर्थव्यवस्था से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
लेख में स्पष्ट कहा गया है कि ‘गहरे आर्थिक सुधार’ की बात करना, जबकि भ्रष्ट और कुप्रबंधित राजनीतिक व्यवस्था में सुधार की अनदेखी करना, खुद को और जनता को धोखा देने जैसा है। निष्कर्ष साफ है कि आर्थिक सुधार के लिए राजनीतिक सुधार अनिवार्य है।
शेरानी ने लिखा है कि जब तक संसाधनों के दोहन और रेंट-सीकिंग पर आधारित मौजूदा राजनीतिक ढांचे को नहीं बदला जाएगा, तब तक वास्तविक और टिकाऊ निवेश की उम्मीद करना व्यर्थ है। ऐसा निवेश, जो नवाचार, दक्षता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाए, फिलहाल एक सपना ही बना रहेगा।
उन्होंने एक तथाकथित ‘एलीट पैनल’ द्वारा दिए जा रहे इस तर्क को भी खारिज किया कि कंपनियों की ‘क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन’ से आर्थिक विकास संभव है। उनके अनुसार यह मान लेना कि उद्योगों की अक्षमता पूरी तरह उनके आंतरिक फैसलों का परिणाम है और बाहरी माहौल का उस पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, एक अवास्तविक धारणा है।
लेख में बताया गया है कि पाकिस्तान में औपचारिक क्षेत्र की कंपनियां कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रही हैं। इनमें क्षेत्र में सबसे महंगी और बाधित बिजली आपूर्ति, 50 प्रतिशत से अधिक तक का कर बोझ (सुपर टैक्स सहित), ओवर-वैल्यूड विनिमय दर, व्यापक तस्करी और अंडर-इनवॉइसिंग शामिल हैं। इससे करीब 68 अरब डॉलर की समानांतर अर्थव्यवस्था पनप रही है, जो औपचारिक अर्थव्यवस्था को कमजोर करती है।
इसके अलावा कार्यपालिका का अतिक्रमण, भारी नियामकीय बोझ, भ्रष्टाचार और रिश्वत की लागत, कुशल श्रमिकों की कमी, प्रशिक्षण पर अतिरिक्त खर्च, पानी और सुरक्षा पर निजी खर्च, स्थानीय आपराधिक गिरोहों द्वारा वसूली, राजनीतिक नियुक्तियों का दबाव और बार-बार नीतिगत बदलाव जैसी समस्याएं भी उद्योगों के सामने हैं।
लेख के अनुसार इन सभी बाधाओं को दूर किए बिना केवल कंपनियों को दोष देना और उनसे प्रतिस्पर्धी बनने की उम्मीद करना यथार्थ से परे है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए सबसे पहले राजनीतिक ढांचे में व्यापक और ईमानदार सुधार की आवश्यकता है।
--आईएएनएस
डीएससी
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