Mahashivratri 2026: इन 5 राशियों पर मेहरबान हैं भगवान शिव, महाशिवरात्रि पर बरसेगी महादेव की कृपा, करें ये सरल उपाय
Mahashivratri 2026: आज यानी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है. मान्यता है कि महाशिवरात्रि का पर्व महादेव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भगवान शिव नवग्रह के अधिष्ठात्र देव कहे जाते हैं. महाशिवरात्रि पर देवाधिदेव का राशि अनुसार अभिषेक किया जाए तो जीवन में ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिल सकता है. इसके साथ ही ज्योतिषशास्त्र में भगवान शिव की प्रिय राशियों के बारे में बताया गया है. इन राशियों का संबंध महादेव से माना जाता है. कहते हैं इन राशि के जातकों पर महादेव की विशेष कृपा रहती है. महाशिवरात्रि के दिन राशि के जातकों को लाभ की प्राप्ति होगी. आइए जानते हैं महादेव की प्रिय राशियां कौन सी हैं.
महादेव की प्रिय राशियां कौन सी हैं?
वृषभ राशि
वृषभ राशि भगवान शिव की प्रिय राशि मानी जाती है. वृषभ राशि का संबंध भगवान शिव के वाहन नंदी से माना जाता है. इसके साथ ही भगवान शिव के मस्तक पर लगा चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च का होता है. वृषभ राशि के जातकों पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है. महाशिवरात्रि के दिन वृषभ राशि के जातक दही से महादेव का अभिषेक करें. सफेद चंदन से श्रंगार करें. सफेद फूलों की माला शिवजी को पहनाएं. महादेव की कृपा से आपको धन, सम्मान और यश की प्राप्ति होगी.
कर्क राशि
कर्क राशि भगवान प्रिय राशि में से एक है. कर्क राशि के स्वामी चंद्रदेव हैं. भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित रहता है. इसलिए उनका एक नाम चंद्रशेखर भी है. यही वजह है कर्क राशि के जातकों पर शिव कृपा सदा बनी रहती है. महाशिवरात्रि के दिन कर्क राशि के जातक दूध में शक्कर मिलाकर रुद्राभिषेक करें. सफेद चंदन से श्रंगार करें. सफेद फूल और सफेद रंग के वस्त्र चढ़ाएं. शिव कृपा से आपको मानसिक शांति, दांपत्य सुख और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी.
सिंह राशि
सिंह राशि के जातकों पर शिव कृपा बनी रहती है. सिंह को माता पार्वती का वाहन माना जाता है. यही वजह है सिंह राशि को शिव की प्रिय राशि माना जाता है. सिंह राशि के जातकों पर देवाधिदेव की कृपा हमेशा बनी रहती है. महाशिवरात्रि के दिन सिंह राशि के जातक शहद या गंगाजल में गुड़ मिलाकर रुद्राभिषेक करें. लाल फूलों से श्रंगार करें. भोलेनाथ की कृपा से आपको जीवन के कठिन समय में सफलता प्राप्त होगी. जीवन में पद-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान की प्राप्ति होगी.
मकर राशि
मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं. शनिदेव को महादेव का परम भक्त कहा जाता है. यही वजह है मकर राशि के जातकों पर हमेशा शिव कृपा बनी रहती है. महाशिवरात्रि के दिन मकर राशि के जातक गंगाजल से अभिषेक करें. महादेव पर बेलपत्र के साथ शमी पत्र अवश्य चढ़ाएं. भगवान शिव की कृपा से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी. जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होगी.
कुंभ राशि
कुंभ राशि के स्वामी शनिदेव हैं. महादेव को अपने भक्त शनि की यह राशि बेहद प्रिय है. इस राशि के जातकों पर हमेशा शिव कृपा बनी रहती है. महाशिवरात्रि के दिन कुंभ राशि के जातक सरसों के तेल की धारा से अभिषेक करें. बेलपत्र के साथ शमी पत्र, भांग, धतूरा चढ़ाएं. भोलेनाथ की कृपा से आपके ऊपर चल रही साढ़ेसाती के अशुभ प्रभावों में कमी आएगी. आपको करियर और कारोबार में तरक्की प्राप्त होगी.
लाल किले के पास धमाके की कड़ी सुलझी, श्रीनगर के डॉक्टरों और कट्टरपंथियों का खतरनाक प्लान आया सामने
जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच में एक ऐसे आतंकी मॉड्यूल का पता चला है जिसे 'सफेदपोश' (व्हाइट-कॉलर) लोग चला रहे थे. अधिकारियों ने बताया कि कुछ डॉक्टरों और कट्टरपंथी उपदेशकों ने मिलकर 'अंसार अंतरिम' नाम का एक नया आतंकी संगठन खड़ा किया था. इस ग्रुप का मुख्य मकसद घाटी और देश के अन्य हिस्सों में अशांति फैलाना था.
अब इस केस की कमान नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने संभाल ली है. जांच में पता चला है कि इस ग्रुप का एक अहम सदस्य डॉक्टर उमर-उन-नबी था, जिसकी मौत 10 नवंबर को लाल किले के बाहर एक धमाके में हो गई थी.
ईदगाह में बनी थी संगठन की रूपरेखा
पुलिस के अनुसार, अप्रैल 2022 में श्रीनगर के ईदगाह इलाके में एक गुप्त मीटिंग हुई थी. इसमें डॉक्टर मुज़मिल गनी, उमर-उन-नबी और अदील राथर जैसे पढ़े-लिखे लोगों के साथ मौलवी इरफान और कारी आमिर भी शामिल थे. इसी मीटिंग में तय हुआ कि 'अदील राथर' इस गुट का मुखिया (अमीर) होगा और मुज़मिल गनी पैसों का हिसाब-किताब देखेगा. इन लोगों ने पूछताछ में बताया कि जब पुराने आतंकी संगठनों से उनका संपर्क टूट गया, तो उन्होंने खुद का नया गुट बनाने का फैसला किया.
हरियाणा से मंगाया सामान
यह मॉड्यूल कितना खतरनाक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने विस्फोटक बनाने के लिए जरूरी सामान हरियाणा के सोहना, नूंह और फरीदाबाद से जुटाया था. डॉक्टर उमर-उन-नबी ने इंटरनेट पर वीडियो देखकर आईईडी (IED) बनाना सीखा था. उसने 'TATP' जैसा खतरनाक विस्फोटक भी तैयार कर लिया था, जिसका इस्तेमाल अक्सर बड़े आतंकी हमलों में होता है.
जांच में यह भी सामने आया कि उमर एक आत्मघाती हमले (सुसाइड अटैक) की योजना बना रहा था. वह दिल्ली की किसी भीड़भाड़ वाली जगह या किसी बड़े धार्मिक स्थल को निशाना बनाना चाहता था.
कैसे खुला यह राज?
इस पूरे नेटवर्क का सुराग तब मिला जब 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम में 'जैश-ए-मोहम्मद' के पोस्टर दिखाई दिए. पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाली और तीन युवकों को पकड़ा, तो कड़ियां जुड़ती चली गईं. इन्हीं की निशानदेही पर मौलवी इरफान को पकड़ा गया, जिसने इन डॉक्टरों को कट्टरपंथ की राह पर धकेला था. जब पुलिस ने डॉक्टर मुज़मिल गनी को गिरफ्तार कर विस्फोटक बरामद किए, तो इस ग्रुप में भगदड़ मच गई. माना जा रहा है कि इसी घबराहट की वजह से लाल किले के पास वाला धमाका समय से पहले ही हो गया.
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