नयी दिल्ली, चार अगस्त उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह सरकारी आवास योजना से जुड़े धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका का निस्तारण छह महीने के भीतर करे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इस मामले में कोकाटे की दोषसिद्धि पर लगी रोक भी बरकरार रखी। शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष 22 दिसंबर को कोकाटे की दोषसिद्धि पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया था कि उन्हें विधायक के रूप में किसी प्रकार की अयोग्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 30,000 रुपये वार्षिक आय सीमा वाली सरकारी आवास योजना से जुड़ा यह मामला वर्ष 1989-92 का है। कोकाटे नासिक जिले की सिन्नर विधानसभा सीट से विधायक हैं। मजिस्ट्रेट अदालत ने फरवरी 2025 में उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।
नासिक सत्र अदालत ने 16 दिसंबर को इस फैसले को बरकरार रखते हुए कहा था कि कोकाटे और उनके भाई ने बेईमानी से राज्य सरकार को उन्हें फ्लैट आवंटित करने के लिए प्रेरित किया। बंबई उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर, 2025 को धोखाधड़ी और जालसाजी के इस मामले में कोकाटे की दो वर्ष कारावास की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जा सकती, क्योंकि प्रथम दृष्टया ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं जो इस मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता की संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं।
कोकाटे पर आरोप है कि उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बनाई गई सरकारी आवास योजना में झूठे शपथपत्र देकर फ्लैट हासिल किया। उच्च न्यायालय ने कहा था कि मजिस्ट्रेट अदालत ने कोकाटे को केवल दो वर्ष की सजा सुनाई है और मुकदमे के दौरान तथा सत्र अदालत में अपील की सुनवाई के दौरान भी वह जमानत पर रहे थे, इसलिए उन्हें जमानत दी जा सकती है। उच्च न्यायालय में दायर अपनी अपील में कोकाटे ने अपनी दोषसिद्धि को मनमाना और गैरकानूनी बताया था।
विपक्ष द्वारा उनके इस्तीफे की मांग तेज किए जाने के बाद 17 दिसंबर को उनसे मंत्रालय के प्रभार वापस ले लिए गए थे। इसके अगले दिन 18 दिसंबर को उन्होंने महाराष्ट्र मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। उसी रात नासिक पुलिस की एक टीम उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जारी वारंट का पालन करने के उद्देश्य से बांद्रा पहुंची थी।
नासिक सत्र अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि कोकाटे ने झूठे आय संबंधी शपथपत्र प्रस्तुत कर ‘राज्य को गुमराह’ किया और इस तरह अपने नाम फ्लैट आवंटित कराया। अदालत ने अंगूर और रबी फसलों के लिए लिए गए बैंक ऋण तथा कोपरगांव सहकारी साखर कारखाना (चीनी मिल) के अभिलेखों का हवाला देते हुए कहा था कि कोकाटे एक समृद्ध किसान थे, जिनकी आय पात्रता सीमा से कहीं अधिक थी और वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी में नहीं आते थे।
Continue reading on the app
मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बीच 'विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026' को ध्वनि मत से पारित किया गया। वहीं, राज्यसभा ने 'जन्म और मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026' को पारित कर दिया। यह विधेयक पिछले हफ़्ते निचले सदन में पारित हुआ था। मंगलवार को कई मुद्दों पर दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद दोनों सदनों को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया है और अब वे बुधवार (5 अगस्त, 2026) को सुबह 11 बजे फिर शुरू होगी।
आज दोनों सदनों में क्या हुआ
राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानन्द राय ने मंगलवार को कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों पर जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संबंधी कानून को ठीक से लागू नहीं कर ‘‘देश एवं लोकतंत्र के साथ धोखा करने’’ का आरोप लगाया और दावा किया कि वर्तमान सरकार इन दोनों के सार्वभौमिक पंजीकरण के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। उच्च सदन में गृह राज्य मंत्री नित्यानन्द राय ने विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी और हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि विलंब से जन्म और मृत्यु पंजीकरण कराने से होने वाले दुरूपयोग को रोकने के लिए इसमें कई प्रावधान किए गए हैं।
पूर्वाह्न 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने पर जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू कराना चाहा तो विपक्ष के सदस्य हंगामा करने लगे। वे अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठा रहे थे और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे थे। बिरला ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह करते हुए कहा कि मैं आप सभी को बोलने का अवसर दूंगा, लेकिन प्रश्नकाल में केवल प्रश्न-उत्तर होते हैं और सभी से अनुरोध है कि कार्यवाही चलाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि मैंने कल भी बीएसी (कार्य मंत्रणा समिति) की बैठक में सभी दलों से यह अनुरोध किया था। संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और चर्चा एवं संवाद के लिए है। यह नारेबाजी करने और तख्तियां लेकर आने का मंच नहीं है।
वहीं राज्यसभा में 11 बजे बैठक शुरू होने पर, कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकदी और कीमती सामान की कथित चोरी का मुद्दा उठाया, जिसका सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार विरोध किया। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और शून्यकाल शुरू करने का ऐलान किया। इसी दौरान विपक्षी सदस्य राम मंदिर चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करने लगे। सभापति ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से अपनी बात रखने के लिए कहा। खरगे ने राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट के कुछ सदस्यों पर चढ़ावे की कथित चोरी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और अन्य जांच एजेंसियां श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (एसआरजेबीटीके) के सदस्यों पर लगे आरोपों की जांच क्यों नहीं कर रही हैं? खरगे ने कहा कि इस ट्रस्ट का गठन सरकार ने किया था और इसे 70 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। वह अपनी बात पूरी कर पाते, उससे पहले सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू को बोलने की अनुमति दी। रीजीजू ने कहा कि विपक्ष जिस मुद्दे को बार-बार उठाने की कोशिश कर रहा है, उसे सदन में उठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें
National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
Continue reading on the app