Rajnath Singh के बयान पर Ajay Rai का पलटवार, PM Modi की Varanasi जीत पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अजय राय ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने वाराणसी लोकसभा सीट कथित चुनावी धांधली और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग के जरिए जीती है। साथ ही, उन्होंने 2024 के आम चुनावों के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। राय की यह टिप्पणी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन के बिना चुनाव जीतने की चुनौती दी थी। सिंह की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए राय ने कहा कि रक्षा मंत्री को वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए, जहां से पीएम मोदी 2024 में लगातार तीसरी बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी को चुनौती दी कि वे समाजवादी पार्टी के बिना कोई चुनाव जीतकर दिखाएं; शायद उन्हें असल तथ्यों की जानकारी नहीं है। राय ने कहा, "रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र से हमारी नेता सोनिया गांधी 2019 से 2024 तक सांसद रहीं, और उसके बाद राहुल गांधी भी उसी सीट से सांसद रहे हैं।
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रायबरेली में कांग्रेस की मौजूदगी का हवाला देते हुए, राय ने राहुल गांधी के गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर होने संबंधी राजनाथ सिंह के बयान पर सवाल उठाया और चर्चा का रुख वाराणसी में प्रधानमंत्री की चुनावी जीत की ओर मोड़ दिया। राय ने आरोप लगाया मैं राजनाथ सिंह से बनारस सीट के बारे में पूछना चाहूंगा। एक ऐसी सीट जिसे पीएम मोदी ने अपने गठबंधन सहयोगियों के सहारे, चोरी और धांधली के जरिए जीता है। कांग्रेस नेता ने 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान वोटों की गिनती की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती राउंड में पीएम मोदी पीछे चल रहे थे, और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की ओर से मिलने वाले अपडेट दोपहर के आसपास रुक गए थे, जिसके बाद सीधे शाम को अंतिम परिणाम घोषित किए गए। राय ने कहा प्रधानमंत्री सात राउंड तक पीछे चल रहे थे, फिर भी चुनाव आयोग ने दोपहर 12 बजे के बाद चुनाव के अपडेट देना बंद कर दिया, और शाम 7 बजे यह घोषित कर दिया कि वे जीत गए हैं। पूरा देश जानना चाहता है कि आखिर किस तरह के 'चमत्कार' से प्रधानमंत्री मोदी की जीत हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की जीत में उनके सहयोगी दलों के समर्थन और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग की भूमिका रही। साथ ही, उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा पूरी प्रक्रिया को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए।
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राय ने सोशल मीडिया पर राजनाथ सिंह को भी निशाने पर लिया और कहा कि राहुल गांधी की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाने से पहले, उन्हें वाराणसी के नतीजों से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए। राय ने अपनी पोस्ट में लिखा, क्या प्रधानमंत्री में इतनी हिम्मत है कि वे सहयोगी दलों के समर्थन और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग के बिना, अकेले चुनाव लड़ सकें? उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मतगणना के शुरुआती सात राउंड में प्रधानमंत्री पीछे चल रहे थे, और दावा किया कि अंत में आए नतीजों ने चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। राय ने कहा कि वाराणसी की जनता आने वाले चुनावों में इसका जवाब देगी। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी अपने सहयोगी दलों पर लगातार अधिक निर्भर होती जा रही है।
Supreme Court ने निखिल वागले को भेजा अवमानना नोटिस, CJI पर की थी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत को नोटिस जारी किया। यह नोटिस SCBA द्वारा दायर की गई आपराधिक अवमानना याचिका के संबंध में है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के बारे में उनकी टिप्पणियों से जुड़ी है। CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उनसे जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। साथ ही, फिलहाल उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी गई है। जब भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता या किसी अधिकार पर संकट आया है, तो लोग हमेशा मदद के लिए अदालत की शरण में आए हैं। अदालतों ने भी इन अधिकारों की रक्षा करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी है। ऐसे में, अगर वही लोग अदालतों की निंदा करते हैं, आलोचना करते हैं या उन पर तीखे हमले करते हैं, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
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CJI कांत ने टिप्पणी की बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उम्मीद है कि उन्हें सही समझ आएगी। हम बस यही प्रार्थना कर सकते हैं । सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 15 अक्टूबर को निखिल वागले और राउत के खिलाफ आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेंप्ट) की याचिका दायर की। यह मामला CJI सूर्य कांत के बारे में उनकी टिप्पणियों से जुड़ा है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 'कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट' (न्यायालय अवमानना अधिनियम) के तहत इन दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दे दी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले हफ्ते विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने CJI सूर्य कांत से मिलने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। इसके बजाय, उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि वे याचिका दायर करके सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।
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