Supreme Court ने निखिल वागले को भेजा अवमानना नोटिस, CJI पर की थी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत को नोटिस जारी किया। यह नोटिस SCBA द्वारा दायर की गई आपराधिक अवमानना याचिका के संबंध में है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के बारे में उनकी टिप्पणियों से जुड़ी है। CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उनसे जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। साथ ही, फिलहाल उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी गई है। जब भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता या किसी अधिकार पर संकट आया है, तो लोग हमेशा मदद के लिए अदालत की शरण में आए हैं। अदालतों ने भी इन अधिकारों की रक्षा करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी है। ऐसे में, अगर वही लोग अदालतों की निंदा करते हैं, आलोचना करते हैं या उन पर तीखे हमले करते हैं, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
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CJI कांत ने टिप्पणी की बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उम्मीद है कि उन्हें सही समझ आएगी। हम बस यही प्रार्थना कर सकते हैं । सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 15 अक्टूबर को निखिल वागले और राउत के खिलाफ आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेंप्ट) की याचिका दायर की। यह मामला CJI सूर्य कांत के बारे में उनकी टिप्पणियों से जुड़ा है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 'कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट' (न्यायालय अवमानना अधिनियम) के तहत इन दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दे दी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले हफ्ते विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने CJI सूर्य कांत से मिलने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। इसके बजाय, उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि वे याचिका दायर करके सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।
विमानन नियमों को मिली मंजूरी, Supreme Court में केंद्र ने कहा 2 हफ्ते में होंगे प्रकाशित
केंद्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि भारत के विमानन क्षेत्र को विनियमित और नियंत्रित करने संबंधी अधिनियम के तहत नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है, और दो सप्ताह के भीतर इनके प्रकाशित होने की संभावना है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ के तहत प्रकाशित नियमों को सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत के समक्ष रखें। शुरुआत में, मेहता ने कहा, ‘‘नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है और उन्हें प्रशासनिक मंजूरी भी मिल गई है।
इन्हें दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित कर दिया जाएगा।’’ पीठ ने मामले को 16 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अदालत सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक की मांग की है, जो नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
साथ ही, याचिकाकर्ता ने भारत में निजी विमानन कंपनियों द्वारा हवाई किराए और अन्य शुल्कों में होने वाले ‘‘अनिश्चित उतार-चढ़ाव’’ को नियंत्रित करने के लिए नियामक दिशानिर्देशों का भी अनुरोध किया है। केंद्र सरकार ने 17 अगस्त को शीर्ष अदालत को बताया था कि वह ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया में तेजी ला रहा है। इस अधिनियम का उद्देश्य भारत के विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाना है और इसके नियमों को तीन सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
सरकार ने नियमों का मसौदा एक सीलबंद लिफाफे में रखा और कहा कि कुछ अंतिम चर्चाएं जारी हैं। शीर्ष अदालत ने 13 जुलाई को केंद्र से कहा था कि वह ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ के तहत बनाए गए नियमों को उसके समक्ष रखे। इसने कहा था कि नियम एक सीलबंद लिफाफे में उसके सामने रखे जाएं, भले ही उन्हें संसद के समक्ष रखा गया हो या नहीं।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कहा था कि हवाई किराए को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए और केंद्र यात्रियों को राहत प्रदान करे। केंद्र ने पीठ को बताया था कि 2024 का नया कानून जनवरी 2025 में लागू हो गया है और इससे जुड़े नियम तैयार किए जा रहे हैं।
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