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Market Outlook: बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 19 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय इक्विटी बाजार में रिकवरी का सिलसिला जारी रहा। इसमें IT शेयरों में लगातार हुई खरीदारी का अहम योगदान रहा। मजबूत तिमाही नतीजों और मैनेजमेंट की अच्छी टिप्पणियों ने इस सेक्टर की कमाई के आउटलुक को लेकर भरोसा बढ़ाया है

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Delhi SDRF: आपदाओं से निपटने को दिल्ली में 1050 कर्मियों वाले बल का होगा गठन

दिल्ली सरकार ने प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं से कुशलतापूर्वक निपटने के लिए 1,050 कर्मियों वाले राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के गठन को मंजूरी दे दी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने हाल में राज्य आपदा मोचन बल की 18 कंपनी के गठन को मंजूरी दी है, जिनमें से 13 जिलों में एक-एक कंपनी तैनात होगी और पांच कंपनियों को ‘रिजर्व’ (आपात स्थिति के लिए तैयार) रखा जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में आपदाओं से निपटने के लिए फिलहाल कोई विशेष बल नहीं है जिसके कारण आग लगने, इमारतें ढहने और बड़ी दुर्घटनाओं जैसी आपात स्थितियों में त्वरित और प्रभावी ढंग से बचाव एवं राहत कार्य करने में परेशानी होती है। राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की प्रत्येक कंपनी में बचाव एवं राहत कार्य करने वाले 50 से 55 कर्मी होंगे। इनमें अधिकतर कर्मियों को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से लिया जाएगा।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि कुछ पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। उन्होंने बताया कि दिल्ली एसडीआरएफ का नेतृत्व महानिरीक्षक (आईजी) स्तर के एक पुलिस अधिकारी करेंगे। मंत्रिमंडल के इस प्रस्ताव को उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की मंजूरी के लिए भेजे जाने के बाद आगामी महीनों में चरणबद्ध तरीके से बल के गठन का काम शुरू होगा, जिसके बाद औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।

देश की राजधानी होने के नाते और बाढ़ एवं भूकंप जैसे संभावित खतरों के अलावा आग लगने, दुर्घटनाओं और इमारतें ढहने जैसी मानव निर्मित आपदाओं को देखते हुए दिल्ली में एक अलग एसडीआरएफ की आवश्यकता कई वर्षों से महसूस की जा रही थी। पिछले महीने सत्य निकेतन में एक इमारत ढहने से सात लोगों की जान चली गई थी।

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  Sports

दिल्ली की दम तोड़ती खेल संस्कृति: क्रिकेट के अलावा कहां हैं दर्शक, टूर्नामेंट और भविष्य की ठोस योजना?

राजधानी दिल्ली में खेल संस्कृति क्रिकेट तक सिमटती जा रही है. फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों के लिए नियमित टूर्नामेंट, दर्शकों की भागीदारी और मजबूत जमीनी ढांचे की कमी चिंता बढ़ाती है. कभी डूरंड कप दिल्ली की फुटबॉल पहचान था, लेकिन इसके बाहर जाने से राजधानी ने बड़ा आकर्षण खोया. सुब्रतो कप और नेहरू हॉकी टूर्नामेंट जैसे आयोजनों को स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय क्लबों से जोड़ना जरूरी है. दिल्ली सरकार, खेल महासंघों और स्थानीय संस्थाओं को सालभर का खेल कैलेंडर बनाकर जवाबदेही तय करनी चाहिए. क्रिकेट की लोकप्रियता बरकरार रहे, लेकिन राजधानी की खेल पहचान बहुआयामी भी बने. Fri, 16 Oct 2026 17:50:02 +0530

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