बिहार में नीतीश सरकार का मिशन मोड ऑन, 2026-27 में आयोगों में भरे जाएंगे हजारों पद, युवाओं के लिए सुनहरा मौका
Bihar News: नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिहार में कई अहम आयोगों के खाली पदों को भरने की तैयारी शुरू हो गई है. राज्य सरकार विभिन्न आयोगों में नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने जा रही है. इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए भी बड़ी संख्या में बहाली की जाएगी.
बिहार युवा आयोग में होंगी नियुक्तियां
सबसे पहले हाल ही में गठित बिहार युवा आयोग में नियुक्तियां की जानी हैं. इस आयोग में एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और सात सदस्यों की नियुक्ति होगी. इन पदों पर नियुक्ति सरकार स्तर पर की जाएगी और सत्ताधारी गठबंधन के बीच हिस्सेदारी को लेकर चर्चा भी चल रही है. इसके अलावा बिहार राज्य सूचना आयोग में राज्य सूचना आयुक्त के एक पद पर नियुक्ति की जाएगी. इस प्रक्रिया में नेता प्रतिपक्ष से भी सलाह ली जाती है.
यहां भी रिक्त हैं पद
अन्य आयोगों में भी रिक्त पद भरे जाएंगे. बिहार तकनीकी सेवा आयोग में एक अध्यक्ष और एक सदस्य (स्वास्थ्य सेवा) की नियुक्ति होगी. वहीं पिछड़ा वर्ग आयोग में दो सदस्यों की नियुक्ति की तैयारी है. बिहार लोक सेवा आयोग में भी एक सदस्य का पद खाली है, जिसे नए वित्तीय वर्ष में भरा जाएगा. अनुसूचित जाति आयोग में भी एक सदस्य की नियुक्ति होगी. साथ ही बिहार लोकायुक्त में एक अध्यक्ष और दो सदस्यों की नियुक्ति की जानी है.
बड़े स्तर पर होगी बहाली
प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से भी बड़े स्तर पर बहाली होगी. 33वीं बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा के आधार पर असैनिक न्यायाधीश (कनीय कोटि) के 173 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है.
चलाए जाएंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम
बिहार कर्मचारी चयन आयोग 31,924 पदों के लिए परीक्षा आयोजित करेगा. वहीं बिहार लोक सेवा आयोग 18,112 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा लेगा. बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने 43,315 पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा भेजने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे. बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) वित्तीय वर्ष 2026-27 में 400 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा. साथ ही एक लाख युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार की इस पहल से युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर मिलने की उम्मीद है.
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गिलगित-बाल्टिस्तान के रेअर अर्थ मिनरल्स पर पाकिस्तान की नजर, स्थानीय लोगों पर सेना कर रही ज्यादती: रिपोर्ट
वाशिंगटन, 14 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान (पीओजीबी) में सियासी हालात संजीदा हो चले हैं। चीन के अलावा, पाकिस्तान अब अमेरिकी और सेंट्रल एशियाई कंपनियों से भी इस इलाके में संसाधनों के दोहन में शामिल होने की गुजारिश कर रहा है। एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में कजाकिस्तान और इंडोनेशिया ने गिलगित- बाल्टिस्तान के सोने और तांबे की माइन्स में निवेश करने में दिलचस्पी दिखाई है।
कई स्थानीय कार्यकर्ता मानते हैं, गिलगित-बाल्टिस्तान में अस्थिरता की एक मुख्य वजह स्ट्रेटेजिक लोकेशन और रेयर अर्थ्स की मौजूदगी है। पाकिस्तानी सेना स्थानीय लोगों को मुआवजा दिए बिना उनके संसाधनों का फायदा उठाना चाहती है। पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में एक गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक लैंड रिफॉर्म एक्ट लागू किया है, जिससे प्राकृतिक संसाधन का गलत इस्तेमाल जारी है। जब स्थानीय सही हिस्सा मांगते हैं, तो पाकिस्तान रॉयल्टी देने से मना कर देता है, यह कहते हुए कि सियासी दिक्कत यह है कि जमीन विवादित जम्मू-कश्मीर का हिस्सा बनी हुई है और इसलिए संवैधानिक और आर्थिक मजबूरियों के चलते इस पर मालिकाना हक नहीं जताया जा सकता।
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के रहने वाले सेंगे सेरिंग ने वाशिंगटन के ग्लोबल स्ट्रैट व्यू के जरिए ये खुलासा किया है।
सेरिंग, जो अब वाशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर गिलगित बाल्टिस्तान स्टडीज (आईजीबीएस) के प्रमुख हैं, ने विस्तार से बताया कि यह देखते हुए कि रेयर अर्थ एलिमेंट का प्रसंस्करण और आपूर्ति कुछ ही देशों में केंद्रित है, गिलगित बाल्टिस्तान की भौगोलिक स्थिति प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के रेयर अर्थ सप्लाई चेन में विविधता लाने के प्रयासों को पूरा करती है।
उन्होंने बताया कि तंगिर और गिलगित बाल्टिस्तान की आस-पास की घाटियां दुनिया भर में जानी-मानी मिनरल हॉटस्पॉट हैं - जहां मोनाजाइट, चेवकिनाइट, लैंथेनम, समैरियम, प्रेज़ोडायमियम, नियोडिमियम, सेरियम, टाइटेनियम, थोरियम और दूसरे रेयर अर्थ एलिमेंट्स बहुत अधिक हैं। चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड की कोशिशों से पाकिस्तान को (अपने कब्जे वाले इलाके को) एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप के चौराहे पर एक रेयर-अर्थ हब बनाने में मदद मिल रही है।
उन्होंने वर्तमान हालातों को ध्यान में रख एक अपील की है। कहा है, इन हालात में, गिलगित बाल्टिस्तान के लोगों को एकजुट रहना चाहिए और कब्जा करने वाले पाकिस्तानी औपनिवेशिक मालिकों को निकालने की अपनी कोशिशें जारी रखनी चाहिए, जो सिर्फ कुदरती दौलत और आने-जाने के रास्तों का फायदा उठाने और उनका गलत इस्तेमाल करने में दिलचस्पी रखते हैं, जबकि वहां के लोगों को उनके जरूरी सियासी और संवैधानिक अधिकार नहीं देते। यह लगन और हिम्मत आखिरकार गिलगित बाल्टिस्तान के लोगों को भारत के संवैधानिक नागरिक के तौर पर लद्दाख में शामिल होने और इलाके और पहचान दोनों की रक्षा करने में मदद करेगी।
गुरुवार को, पाकिस्तानी मीडिया ने बताया कि पीओजीबी में डायमर की तंगिर घाटी में एक गाड़ी के पास एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) फटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक आर्मी मेजर समेत तीन अन्य घायल हो गए।
सेरिंग, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके के सबसे जाने-माने जानकारों में से एक हैं, ने कहा कि कमांडर मौलाना आमिर हमजा से जुड़े एक आतंकवादी सेल ने हमले से पहले एक बयान दिया था, जिसमें बताया गया था कि वे गिलगित बाल्टिस्तान के डायमर जिले से हैं और पाकिस्तानी सेना, जिसमें आईएसआई और एमआई जैसी सीक्रेट एजेंसियां के अलावा पुलिस भी शामिल हैं, पर हमले करते हैं।
सेरिंग ने ग्लोबल स्ट्रैट व्यू में लिखा, उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना गिलगित बाल्टिस्तान को कंट्रोल करने के लिए फूट डालो और राज करो की स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करती है। गिलगित बाल्टिस्तान के शिया और सुन्नी नेताओं, जिसमें आगा राहत भी शामिल हैं, को दिए एक बयान में, ग्रुप ने कहा कि अगर पहले आगा राहत या काजी निसार पर सांप्रदायिक हमले हुए हैं, तो यह पाकिस्तान की सेना और उनके एजेंटों का काम है ताकि स्थानीय लोगों के बीच झगड़ा और फूट पैदा की जा सके।
--आईएएनएस
केआर/
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