अमेरिकी सांसदों ने अप्रैल में ट्रंप-शी की मुलाकात से पहले क्वाड समिट की मांग की
वॉशिंगटन, 14 फरवरी (आईएएनएस)। दो वरिष्ठ अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप सरकार से अप्रैल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली मीटिंग से पहले क्वाड नेताओं की समिट बुलाने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे बीजिंग के साथ डील करने में वॉशिंगटन की पकड़ मजबूत होगी।
अमेरिकी सांसद टिम केन (डी-वीए) और पीट रिकेट्स (आर-एनई) दोनों सीनेट विदेश मामलों के कमेटी के सदस्य हैं। दोनों सांसदों ने इस संबंध में मार्को रुबियो को चिट्ठी लिखी, जिसमें सरकार को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान को शामिल करते हुए क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड) के अगले वर्जन को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया।
बता दें, इस बार क्वाड समिट की मेजबानी भारत करने वाला है। यह असल में 2025 में भारत में होने वाला था। ट्रंप समेत सभी चार देशों ने भारत क्वाड समिट में शामिल होने की प्रतिबद्धता जताई है।
सीनेटरों ने लिखा, चीन के साथ जबरदस्त रणनीतिक कॉम्पिटिशन के इस अहम पल में, क्वाड लीडर्स समिट बुलाने से लीडिंग हिंद-प्रशांत लोकतंत्र के बीच एकता, पक्के इरादे और रणनीतिक तालमेल का साफ संकेत जाएगा। अप्रैल में शी जिनपिंग के साथ राष्ट्रपति ट्रंप की तय मीटिंग से पहले क्वाड समिट करना, राष्ट्रपति के बीजिंग दौरे से पहले हिंद-प्रशांत में अमेरिकी नेतृत्व का एक अहम प्रदर्शन होगा। पहले एक सफल क्वाड समिट राष्ट्रपति ट्रंप को ज्यादा फायदे की स्थिति से जुड़ने का मौका देगा।”
सांसदों ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप के बीजिंग दौरे से पहले होने वाली मीटिंग डिप्लोमैटिक माहौल को आकार देगी। उन्होंने लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप की ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने में हाल की सफलताओं ने क्वाड के जरिए फिर से मिलकर काम करने का माहौल तैयार किया है।”
सांसदों ने चिट्ठी में भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा का भी जिक्र किया और कहा कि यह भारत और पूरे हिंद-प्रशांत में रणनीतिक और रक्षा सहयोग को काफी गहरा करने की नींव रखता है।”
आम चिंताओं पर जोर देते हुए सांसदों ने लिखा, “चारों क्वाड साझेदारों को एक जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें सप्लाई चेन की कमजोरियां, जरूरी मिनरल्स पर रोक, आजाद और खुले हिंद-प्रशांत के लिए खतरे और नई तकनीक पर बढ़ता कॉम्पिटिशन शामिल हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चीन ने खास तौर पर जापान पर डिप्लोमैटिक दबाव, सैन्य धमकी और आर्थिक दबाव बढ़ाया है, जिससे इलाके की स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय नियमों को खतरा है।”
सांसदों ने कहा, “क्वाड इन चुनौतियों का सामना करने और ट्रंप की 2025 राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में बताए गए कई मकसदों को आगे बढ़ाने के लिए खास स्थिति में है, जिसमें पिछली सरकार की सफलताओं पर काम करना शामिल है, जिसमें सहयोगी देशों की रोकथाम को मजबूत करना, दुश्मनों पर रणनीतिक निर्भरता कम करना, तकनीकी नेतृत्व की सुरक्षा करना और नेविगेशन की आजादी को बनाए रखना शामिल है।”
सांसदों ने आखिर में लिखा, “हम अमेरिकी डिप्लोमेसी के इस अहम पल में क्वाड को मजबूत करने के लिए आपके साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं और आपसे क्वाड लीडर्स समिट और उसके बाद विदेश मंत्री और वर्किंग ग्रुप की मीटिंग आयोजित करने को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हैं। ऐसा करने से अमेरिकी नेतृत्व मजबूत होगा, हमारे सबसे करीबी साझेदार मजबूत होंगे और यह सुनिश्चित होगा कि बीजिंग के साथ भविष्य का जुड़ाव एकता, ताकत और रणनीतिक दूरदर्शिता पर आधारित हो।”
उन्होंने 13 मार्च, 2026 तक क्वाड के लिए सरकार के दृष्टिकोण और प्राथमिकता पर चर्चा करने के लिए एक ब्रीफिंग का भी अनुरोध किया। अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया वाला क्वाड पिछले दस सालों में हिंद-प्रशांत सुरक्षा, मजबूत सप्लाई चेन, नई तकनीक और समुद्री सहयोग पर तालमेल के लिए एक अहम प्लेटफॉर्म बन गया है। भारत ने सीमा पर तनाव और बड़े क्षेत्रीय मुकाबले के बीच चीन के साथ अपने मुश्किल संबंध को संतुलित करते हुए लगातार एक आजाद और खुले हिंद-प्रशांत का साथ दिया है।
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भारत और इजरायल ने एआई-साइबर सुरक्षा संबंधों को आगे बढ़ाया
वाशिंगटन, 14 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और इजरायल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने के लिए सिलिकॉन वैली में एक महत्वपूर्ण पहल की। तेजी से बढ़ती एआई तकनीक से मिलने वाले अवसरों के साथ-साथ उसके संभावित खतरों पर भी विशेषज्ञों ने चर्चा की।
11 फरवरी को पैलो आल्टो में आयोजित इंडिया-इजरायल एआई-साइबरसिक्योरिटी कनेक्ट कार्यक्रम में 130 से अधिक स्टार्टअप संस्थापक, निवेशक और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। इस कार्यक्रम की मेजबानी सैन फ्रांसिस्को में भारत के महावाणिज्य दूतावास, इजरायल के महावाणिज्य दूतावास और वेंचर डॉक ने संयुक्त रूप से की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच एआई, साइबर सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग को मजबूत करना था। चर्चा का केंद्रीय विषय एआई के लिए साइबर सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के लिए एआई था।
भारत के सैन फ्रांसिस्को स्थित महावाणिज्यदूत डॉ. के. श्रीकर रेड्डी ने दोनों देशों के लंबे संबंधों और बढ़ती तकनीकी साझेदारी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत, अमेरिका और इजरायल तीनों नवाचार के मजबूत केंद्र हैं और जिम्मेदार एआई एवं साइबर सुरक्षा का विकास केवल राष्ट्रीय हित के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक कल्याण के लिए भी आवश्यक है।
रेड्डी ने नई दिल्ली में होने वाले आगामी एआई इम्पैक्ट समिट का भी जिक्र किया, जिसमें 100 से अधिक देशों के भाग लेने की उम्मीद है। इस सम्मेलन का फोकस लोग, ग्रह और प्रगति पर रहेगा, जिसमें एआई के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने पर होगा।
इजरायल के पैसिफिक नॉर्थवेस्ट क्षेत्र के महावाणिज्यदूत मार्को सेरमोनेटा ने 1990 के दशक की शुरुआत में स्थापित भारत-इजरायल कूटनीतिक संबंधों की प्रगति को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि एआई, शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें संयुक्त बूट कैंप और हैकाथॉन शामिल हैं। सिलिकॉन वैली संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक स्वाभाविक मंच है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और साइबर सुरक्षा कंपनी जस्केलर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जय चौधरी ने एआई को परिवर्तनकारी लेकिन संभावित रूप से खतरनाक तकनीक बताया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ दिल के सर्जन की तरह होते हैं, जिन्हें गहरी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
चौधरी ने चेतावनी दी कि एआई इंटरनेट, मोबाइल और क्लाउड से भी बड़ी तकनीकी लहर साबित हो सकती है। हालांकि यह उत्पादकता और स्वचालन को बढ़ावा देती है, लेकिन यह साइबर हमलावरों के लिए भी नई संभावनाएं खोलती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कंपनियां प्रत्येक कर्मचारी के लिए 50 से 100 एआई एजेंट तैनात कर सकती हैं, और यदि ये एजेंट हैक हो गए तो पूरे एंटरप्राइज सिस्टम खतरे में पड़ सकते हैं।
स्टार्टअप संस्कृति पर बोलते हुए उन्होंने सफलता का मूल मंत्र कड़ी मेहनत और जुनून को बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति वही बनता है जो वह पढ़ता, देखता और जिन लोगों के साथ रहता है।
एआई युग में साइबर सुरक्षा पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने डिजिटल परिवर्तन के साथ बढ़ते साइबर जोखिमों पर भी चिंता जताई। गुरु चहल (जो लाइटस्पीड वेंचर्स के पार्टनर हैं) ने कहा कि साइबर सुरक्षा उद्योग की सबसे बड़ी समस्या कुशल पेशेवरों की कमी है, जो उद्यमी एआई मॉडल की मदद से इस कमी को दूर करेंगे, वे भविष्य की सबसे बड़ी कंपनियां बना सकते हैं।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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