RERA Annual Report | कई राज्यों के रेरा प्राधिकरण प्रकाशित नहीं कर रहे वार्षिक रिपोर्ट: एफपीसीई
रियल एस्टेट डेस्क देशभर के घर खरीदारों के प्रमुख संगठन फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (FPCE) ने शुक्रवार को एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। संगठन का आरोप है कि अधिकांश राज्यों के रियल एस्टेट नियामक (RERA) अपने वैधानिक दायित्वों को पूरा करने में विफल रहे हैं, जिससे 'रेरा' कानून का मूल उद्देश्य ही खतरे में पड़ गया है।
इसे भी पढ़ें: कॉर्पोरेट जगत के लिए बड़ी राहत! RBI ने अधिग्रहण वित्तपोषण की सीमा बढ़ाकर 75% की
एफपीसीई ने एक बयान में रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) की धारा 78 के उल्लंघन की तरफ इशारा किया। संगठन ने कहा, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के स्पष्ट वैधानिक दायित्वों और बार-बार के निर्देशों के बावजूद देशभर में 75 प्रतिशत से अधिक राज्य रेरा प्राधिकरणों ने या तो कभी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की है या उनका प्रकाशन बंद कर दिया है, या वे अद्यतन नहीं हैं। एफपीसीई ने मंत्रालय से सभी रेरा प्राधिकरणों को निर्धारित प्रारूप में वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए नए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।
इसे भी पढ़ें: Mumbai Municipal Corporation scam | फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में महापौर का कड़ा रुख, 'अवैध घुसपैठियों' और भ्रष्ट अफसरों पर गिरेगी गाज
संगठन ने मंत्रालय से आग्रह किया कि वह राज्य सरकारों को अधिनियम की धारा 82 और 83 के तहत शक्तियों का उपयोग करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहे। एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा कि जब तक पुख्ता डेटा यह साबित न कर दे कि रेरा लागू होने के बाद घरों का कब्जा मिलने और कार्यप्रणाली की निष्पक्षता में बेहतरी आई है, तब तक सफलता के सभी दावे खोखले एवं बेबुनियाद हैं।
उन्होंने कहा, निर्दोष घर खरीदारों के साथ छल किया जा रहा है और इस बार इसके लिए रेरा का सहारा लिया जा रहा है। बिल्डरों के लिए यह कानून अब महज़ एक ऐसा प्रमाण-पत्र बन गया है, जिसकी आड़ में वे बिना किसी जवाबदेही के अपनी परियोजनाएं बेच रहे हैं।
एफपीसीई ने कहा कि कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गोवा ने रेरा के लागू होने के बाद से एक भी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की है। वहीं, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे नौ राज्यों ने रिपोर्ट प्रकाशित करना शुरू किया था, लेकिन अब इसे बंद कर दिया है।
कॉर्पोरेट जगत के लिए बड़ी राहत! RBI ने अधिग्रहण वित्तपोषण की सीमा बढ़ाकर 75% की
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को देश के बैंकिंग क्षेत्र और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक गेम-चेंजर कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने अधिग्रहण वित्तपोषण (Acquisition Financing) पर अंतिम दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं, जिसमें बैंकों को किसी कंपनी के अधिग्रहण के लिए सौदे के कुल मूल्य का 75 प्रतिशत तक ऋण देने की अनुमति दी गई है।
इसे भी पढ़ें: 'कानपुर को 'बदनामपुर' बना दिया', Akhilesh Yadav का भाजपा पर तीखा हमला
मसौदा नियमों से अधिक उदार हुई नीति
दिलचस्प बात यह है कि अक्टूबर में जारी किए गए मसौदा नियमों (Draft Rules) में यह सीमा 70 प्रतिशत प्रस्तावित थी, जिसे अब अंतिम अधिसूचना में बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पहले भारतीय बैंकों को इस तरह की गतिविधियों के लिए वित्तपोषण की अनुमति नहीं थी।
बैंक वित्तपोषण अधिग्रहण मूल्य के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा
केंद्रीय बैंक ने कहा कि कुल बैंक वित्तपोषण अधिग्रहण मूल्य के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, जिसका स्वतंत्र आकलन संबंधित बैंक द्वारा किया जाएगा। शेष राशि अधिग्रहण करने वाली कंपनी को अपने संसाधनों से जुटानी होगी। नए नियमों के तहत बैंक प्रवर्तकों की हिस्सेदारी को भी वित्तपोषित कर सकेंगे, बशर्ते अधिग्रहण के बाद ऋण-इक्विटी अनुपात निरंतर आधार पर 3:1 से अधिक न हो। अधिग्रहीत इक्विटी शेयर या अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर किसी भी प्रकार के भार से मुक्त होने चाहिए।
इसे भी पढ़ें: Telangana Municipal Election Results 2026 | कांग्रेस की 'हाथ' मजबूत, मल्लिकार्जुन खरगे ने जनता के विश्वास को सराहा
आरबीआई ने बैंकों को अधिग्रहण वित्तपोषण के लिए निदेशक मंडल से अनुमोदित नीति बनाने के लिए कहा है। पात्र उधारकर्ता की न्यूनतम शुद्ध संपत्ति 500 करोड़ रुपये और लगातार तीन वर्षों का शुद्ध लाभ होना आवश्यक है। गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए निवेश-योग्य रेटिंग भी अनिवार्य होगी।
आरबीआई के ये दिशानिर्देश एक अप्रैल से प्रभावी हो जाएंगे। केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर के अंत में पहली बार एक मसौदा जारी किया था, जिसमें बैंकों को अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया था। इससे पहले तक बैंकों को इस तरह की गतिविधि की अनुमति नहीं थी।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi






















