थकान दूर कर मन को तरोताजा करती है सौंफ की चाय, पेट की ऐंठन भी छूमंतर
नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। दिन भर की ऑफिस वाली थकान हो या पीरियड्स में होने वाली पेट की ऐंठन या सूजन, इन समस्याओं से राहत दिलाने में कारगर है सौंफ की चाय। यह चाय न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। सौंफ के सूखे बीजों से बनाई जाने वाली यह चाय मुलेठी जैसा मीठा स्वाद देती है।
सौंफ पाचन तंत्र के लिए एक प्राकृतिक सहायक के रूप में जानी जाती है। इसे पीने से पेट की कई आम परेशानियां जैसे दर्द, सूजन और गैस में काफी राहत मिल सकती है। सौंफ में मौजूद विशेष गुण गैस को कम करते हैं, पेट की ऐंठन को शांत करते हैं और पाचन क्रिया को सुचारू बनाते हैं। यह चाय खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है जिन्हें इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी पुरानी पाचन संबंधी समस्या है। गर्म पानी के साथ सौंफ के तत्व मिलकर पाचन तंत्र को आराम देते हैं, सूजन कम करते हैं और आंतों की गतिविधि को संतुलित रखते हैं।
नियमित रूप से सौंफ की चाय का सेवन करने से पाचन संबंधी लक्षणों में सुधार आता है और रोजमर्रा की जिंदगी की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। भोजन के बाद या जब भी पेट में भारीपन या असहजता महसूस हो, एक कप सौंफ की चाय पीना एक सरल और प्रभावी घरेलू उपाय साबित हो सकता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के अनुसार, सौंफ की चाय पाचन तंत्र को मजबूत करती है और कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत देती है। सौंफ में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण होते हैं। यह पाचन में सहायक है और गैस, ब्लोटिंग (पेट फूलना), अपच और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करती है। सौंफ ऐंठन और पेट दर्द को रोकती है, साथ ही थकान को कम कर मन को तरोताजा रखती है।
आयुर्वेद में सौंफ को पित्त दोष संतुलित करने वाली माना जाता है। यह सूजन कम करती है, सांस की तकलीफ में राहत देती है और शरीर से अतिरिक्त पानी निकालने में मदद करती है। नियमित सेवन से वजन नियंत्रण, हार्मोन बैलेंस और त्वचा की चमक भी बढ़ती है।
सौंफ की चाय बनाने का तरीका भी आसान है, इसके लिए 1 चम्मच सौंफ के बीजों को 1 कप पानी में 5-10 मिनट उबालें और छानकर गर्म पिएं। भोजन के बाद पीने से सबसे अच्छा फायदा मिलता है। स्वाद के लिए इसमें शहद भी मिला सकते हैं। हालांकि अधिक मात्रा में सेवन से बचें और गर्भवती महिलाएं डॉक्टर से सलाह लें।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पुरानी बोतल बन सकती है आपके लिए खतरा, इसमें रखा पानी पेट में घोलता है जहर
नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए हर कोई घर से अपने साथ पानी की बोतल लेकर चलता है, लेकिन इन सबमें अक्सर हम एक छोटी सी गलती कर बैठते हैं, और वो है कि हम पानी की बोतल को समय-समय पर बदलते नहीं हैं। उस एक बोतल का इस्तेमाल महीनों तक करते रहते हैं, बिना यह सोचे कि पुरानी बोतल और उसमें रखा पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।
विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही नजरिए से पानी केवल तभी सुरक्षित और शुद्ध रहता है जब वह सही चीज में हो। प्लास्टिक या किसी भी प्रकार की बोतल में समय के साथ बैक्टीरिया, वायरस और कवक पनपने लगते हैं। यह समस्या खासतौर पर तब होती है जब बोतल बार-बार इस्तेमाल की जाती है और उसे अच्छे से साफ नहीं किया जाता। आयुर्वेद में कहा गया है कि शुद्ध और ताजा भरा पानी ही शरीर के लिए जीवनदायिनी शक्ति है। जब पानी अशुद्ध या दूषित होता है, तो यह पाचन और मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर डाल सकता।
अगर हम रोजमर्रा की बोतल की बात करें तो इसमें दो-तीन दिन से ज्यादा पानी रखना या उसी बोतल को लंबे समय तक इस्तेमाल करना नुकसानदेह हो सकता है। पुरानी बोतल में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, और यह पेट दर्द, उल्टी या पेट फूलना जैसी परेशानियों का कारण बन सकते हैं। विज्ञान की मानें तो पानी भले ही स्वच्छ और फिल्टर किया हुआ हो, लेकिन जिस बर्तन में वह रखा गया है, उसकी सफाई और समय पर न बदला जाना पानी की शुद्धता को प्रभावित करते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, लगातार इस्तेमाल की गई बोतल में मौजूद सूक्ष्म जीव और अशुद्धि शरीर में वात और पित्त के असंतुलन को बढ़ा सकते हैं। यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है और छोटे-मोटे संक्रमणों का खतरा बढ़ा देता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि प्लास्टिक की बोतलों को हर 6 से 12 महीनों में बदल देना चाहिए। इसके अलावा, हर दिन या हर दो-तीन दिन में पानी को ताजा डालना और बोतल की अच्छी तरह से सफाई करना भी बेहद जरूरी है। अगर बोतल में बदबू आने लगे या धब्बे या निशान पड़ जाएं, तो उसे तुरंत बदल दें। सिर्फ पानी नहीं, बल्कि बोतल की शुद्धता भी स्वास्थ्य के लिए अहम है।
आजकल बाजार में स्टेनलेस स्टील और कांच की बोतलों का चलन बढ़ रहा है। ये बोतलें बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम करती हैं। साथ ही, इन बोतलों में पानी लंबे समय तक ताजा और ठंडा रहता।
--आईएएनएस
पीके/डीकेपी
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