पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक सामान के दम पर भारत का Merchandise Export 44.4 अरब डॉलर पहुंचा
पेट्रोलियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रसायनों के निर्यात में अच्छी वृद्धि से अगस्त में देश का वस्तु निर्यात 23.04 प्रतिशत बढ़कर 44.4 अरब डॉलर रहा। इससे पिछले साल इसी महीने में निर्यात का आंकड़ा 36.08 अरब डॉलर था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, कीमती धातुओं के आयात में गिरावट से व्यापार घाटा कम होकर आलोच्य महीने में सालाना आधार पर 30.21 अरब डॉलर रहा।
हालांकि, अगस्त की तुलना में सितंबर में व्यापार घाटा बढ़ा है। अगस्त में यह 26.86 अरब डॉलर था। पिछले साल सितंबर में व्यापार घाटा 33 अरब डॉलर रहा था।
आयात सितंबर में सालाना आधार पर आठ प्रतिशत बढ़कर 74.61 अरब डॉलर रहा। आलोच्य महीने के दौरान सोने और चांदी का आयात क्रमशः 81.27 प्रतिशत और 49.11 प्रतिशत घटकर 1.8 अरब डॉलर और 66.5 करोड़ डॉलर रहा। वहीं, कच्चे तेल का आयात 30.76 प्रतिशत बढ़कर 18.34 अरब डॉलर रहा।
पिछले कुछ सप्ताह से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-सितंबर के दौरान निर्यात 18.51 प्रतिशत बढ़कर 259.89 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 16.31 प्रतिशत बढ़कर 437.53 अरब डॉलर रहा। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में व्यापार घाटा बढ़कर 177.64 अरब डॉलर हो गया, जो बीते वित्त वर्ष इसी अवधि में 156.88 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने व्यापार आंकड़ों पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि निर्यात में वृद्धि का रुख बना हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि यह रुख जारी रहता है, तो देश का वस्तु निर्यात 500 अरब डॉलर के पार पहुंच जाएगा। वित्त वर्ष 2025-26 में यह 442 अरब डॉलर रहा था।
सितंबर में पेट्रोलियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रसायन का निर्यात क्रमशः 31.9 प्रतिशत बढ़कर 6.2 अरब डॉलर, 70.44 प्रतिशत बढ़कर 5.3 अरब डॉलर और 24.21 प्रतिशत बढ़कर तीन अरब डॉलर रहा। पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत को पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर बेहतर कीमतें मिली हैं। सरकार के अनुमान के अनुसार, सितंबर में सेवा निर्यात 36.35 अरब डॉलर और सेवा आयात 19.44 अरब डॉलर रहा।
अग्रवाल ने सेवा निर्यात के बारे में कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि का असर यात्रा और पर्यटन सहित कई क्षेत्रों के निर्यात पर पड़ा है। निर्यातकों के शीर्ष निकाय फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा कि निर्यातक वैश्विक अनिश्चितता के बीच तेजी से बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाल रहे हैं और विभिन्न बाजारों तथा उत्पाद श्रेणियों में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘निर्यात प्रदर्शन की खासियत इसकी वृद्धि के विविध स्रोत हैं।
इंजीनियरिंग, रसायन और कृषि जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ प्रौद्योगिकी-प्रधान उत्पादों का निर्यात भी वृद्धि को गति दे रहा है। वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में इस संतुलन को बनाए रखना और नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।’’ रल्हन कहा, ‘‘पहली छमाही का यह मजबूत प्रदर्शन भारत के 1,000 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए ठोस आधार देता है। अब प्राथमिकता इस गति को लगातार मिलने वाले ऑर्डर और बाजारों में गहरी पहुंच में बदलने की है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अनुकूल नीतिगत माहौल के साथ भारत उच्च मूल्य वाले और प्रौद्योगिकी-प्रधान निर्यात का विस्तार कर सकता है, अपनी पारंपरिक ताकत को आगे बढ़ा सकता है और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी भागीदारी मजबूत कर सकता है।’’
Tata Group की Air India बढ़ते नुकसान को रोकने के लिए विभागों का करेगी विलय
टाटा समूह की एयर इंडिया इस समय बढ़ते खर्च और लगातार हो रहे नुकसान को कम करने की तैयारी में जुटी है। कंपनी ने इसके लिए खर्चों पर नियंत्रण रखने, काम करने के तरीकों में सुधार लाने और कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाने की योजना बनाई है। एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तेवोल्डे गेब्रेमेरियम ने कर्मचारियों को भेजे एक आंतरिक संदेश में कहा है कि मौजूदा मुश्किल हालात में कंपनी के हर कर्मचारी को खर्च बचाने और कामकाज को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभानी होगी।
सोमवार को कर्मचारियों के साथ साझा किए गए संदेश में गेब्रेमेरियम ने कहा कि कंपनी के कामों में खर्च को लेकर सावधानी, सादगी और जिम्मेदारी को शामिल करना जरूरी है। विमानन क्षेत्र इस समय कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है। हवाई मार्गों पर लगी पाबंदियों, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और विमान ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण एयरलाइंस का कामकाज प्रभावित हो रहा है। इन हालात में एयर इंडिया के लिए खर्च कम करना और उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की कुछ इकाइयों के विभागों को मिलाने की योजना है। यह कदम ‘वन एयर इंडिया’ एकीकरण योजना के तहत उठाया जा सकता है। इसके साथ ही खर्चों की समीक्षा करने के लिए अलग-अलग विभागों के लोगों की एक स्थायी टीम बनाई जाएगी। यह टीम कंपनी के हर विभाग में होने वाले खर्चों का आकलन करेगी और उन तरीकों की पहचान करेगी, जिनसे काम की गुणवत्ता बनाए रखते हुए लागत घटाई जा सकती है। गेब्रेमेरियम ने कर्मचारियों से इस टीम को पूरा सहयोग देने की अपील की है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि खर्च कम करने की जिम्मेदारी केवल किसी एक टीम या विभाग की नहीं हो सकती। इसके लिए कंपनी के हर कर्मचारी की सक्रिय भागीदारी और प्रतिबद्धता जरूरी है। कंपनी ने खर्चों को मंजूरी देने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। इसके तहत 1 अक्टूबर से सभी मंजूरियां विभाग प्रमुख, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के माध्यम से दी जाएंगी। इस बदलाव का मकसद खर्चों पर निगरानी बढ़ाना और फैसलों की जवाबदेही तय करना है।
खर्च घटाने की कोशिशों को कर्मचारियों से जोड़ने के लिए एयर इंडिया ने ‘प्रभाव-वैल्यू क्रिएटर अवॉर्ड’ नाम से एक नई पहल भी शुरू की है। इसके तहत कर्मचारी ऐसे सुझाव दे सकेंगे, जिनसे खर्च कम हो, कामकाज में तेजी आए और कमाई बढ़ाने के नए रास्ते मिलें। इसमें संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल, काम करने के तरीकों में सुधार, प्रक्रियाओं को आसान बनाना, ठेकों की शर्तों पर दोबारा बातचीत, खरीद प्रक्रिया में बचत और बर्बादी कम करने जैसे सुझाव शामिल होंगे। जरूरत के मुताबिक बाहर से कराए जाने वाले कुछ काम कंपनी के भीतर करने के सुझाव भी दिए जा सकेंगे।
कर्मचारी कंपनी की मौजूदा सेवाओं और सुविधाओं से ज्यादा कमाई करने या नए कारोबार के अवसर तलाशने से जुड़े विचार भी साझा कर सकते हैं। सभी सुझावों की तय प्रक्रिया के तहत समीक्षा होगी और जिन विचारों को लागू करना संभव होगा, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। सुझाव जमा करने की प्रक्रिया की जानकारी अलग से दी जाएगी।
गेब्रेमेरियम ने कहा कि बड़े संगठन में छोटे-छोटे सुधार भी मिलकर बड़ा असर डाल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार काम को करीब से समझने वाले कर्मचारियों के पास सबसे उपयोगी सुझाव होते हैं। उनके मुताबिक, बचाया गया हर रुपया कंपनी को अपने संचालन, सेवाओं, यात्रियों के अनुभव और भविष्य की बढ़त को मजबूत करने में मदद कर सकता है। गौरतलब है कि एयर इंडिया के सामने इस समय खर्च घटाने के साथ-साथ सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने की चुनौती भी है, इसलिए कंपनी की नई योजना में कर्मचारियों की भागीदारी अहम मानी जा रही है।
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