Vaishno Devi Yatra: मां वैष्णो देवी के दर्शन करने जा रहे हैं? इस तरह करें टूर की प्लानिंग, यादगार रहेगा सफर
Vaishno Devi Yatra: आप मां वैष्णो देवी के दरबार में हाजिरी लगाने की योजना बना रहे हैं, तो यह यात्रा आपके जीवन का एक यादगार आध्यात्मिक अनुभव बन सकती है। त्रिकुटा पर्वत पर स्थित यह पवित्र धाम हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। माता के जयकारों के बीच 13-14 किलोमीटर की चढ़ाई न सिर्फ आस्था की परीक्षा होती है, बल्कि रोमांच और ऊर्जा से भर देने वाला सफर भी बन जाती है।
हालांकि, सही प्लानिंग के बिना यह यात्रा थकाने वाली भी हो सकती है। मौसम, भीड़, रजिस्ट्रेशन और ठहरने की व्यवस्था जैसी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अगर आप पहले से तैयारी कर लें, तो न सिर्फ आरामदायक यात्रा होगी, बल्कि पूरा समय एन्जॉय भी कर पाएंगे।
वैष्णो देवी यात्रा की स्मार्ट प्लानिंग के टिप्स
यात्रा का सही समय चुनें
वैष्णो देवी यात्रा पूरे साल खुली रहती है, लेकिन मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है। गर्मियों में मौसम सुहावना रहता है, जबकि सर्दियों में बर्फबारी का अलग ही आनंद मिलता है। त्योहारों और नवरात्रि के दौरान भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए पहले से बुकिंग जरूरी है।
यात्रा पर्ची और रजिस्ट्रेशन
कटरा पहुंचने के बाद यात्रा पर्ची (यात्रा रजिस्ट्रेशन स्लिप) लेना अनिवार्य है। अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे समय की बचत होती है। बिना पर्ची के आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलती, इसलिए इसे प्राथमिकता दें।
ठहरने की सही व्यवस्था
कटरा में बजट से लेकर लक्ज़री होटल तक कई विकल्प मौजूद हैं। श्राइन बोर्ड की ओर से धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस भी उपलब्ध हैं। अगर आप पीक सीजन में जा रहे हैं, तो होटल पहले से बुक कर लें।
चढ़ाई के विकल्प
कटरा से भवन तक करीब 13-14 किलोमीटर की चढ़ाई है। आप पैदल, घोड़े, पालकी या हेलीकॉप्टर सेवा का विकल्प चुन सकते हैं। हाल के वर्षों में बैटरी कार और रोपवे जैसी सुविधाएं भी शुरू हुई हैं, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को सुविधा मिलती है।
जरूरी सामान साथ रखें
- आरामदायक जूते और हल्के कपड़े
- पानी की बोतल और हल्का स्नैक
- पहचान पत्र
- मौसम के अनुसार जैकेट या रेनकोट
- यात्रा के दौरान साफ-सफाई और नियमों का पालन करना जरूरी है।
आसपास के दर्शनीय स्थल
भवन के अलावा आप भैरवनाथ मंदिर के दर्शन जरूर करें। इसके अलावा कटरा में बाणगंगा, चरण पादुका और अर्धकुंवारी गुफा भी प्रमुख स्थल हैं। अगर समय हो तो पटनीटॉप और शिवखोरी भी घूम सकते हैं।
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Fig Side Effects: 5 परेशानियों में भूलकर भी न खाएं अंजीर! फायदे की जगह बढ़ सकती है समस्या
Fig Side Effects: अंजीर को सेहत का खजाना माना जाता है। फाइबर, कैल्शियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर यह ड्राई फ्रूट पाचन सुधारने से लेकर हड्डियों को मजबूत बनाने तक कई फायदे देता है। खासकर भिगोकर खाया गया अंजीर सुबह के समय काफी लाभकारी माना जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर किसी के लिए अंजीर फायदेमंद नहीं होता? कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में इसका सेवन समस्या को बढ़ा सकता है। इसलिए जरूरी है कि फायदे के साथ-साथ इसके संभावित नुकसान भी समझे जाएं।
5 हेल्थ कंडीशन में अंजीर खाना पहुंचा सकता है नुकसान
लो ब्लड शुगर की समस्या
अंजीर प्राकृतिक रूप से मीठा होता है और ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों का शुगर लेवल पहले से ही कम रहता है या जो डायबिटीज की दवाएं ले रहे हैं, उन्हें अंजीर सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। ज्यादा सेवन से शुगर लेवल अचानक गिर सकता है।
एलर्जी की शिकायत
कुछ लोगों को अंजीर से एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है। इसके लक्षणों में खुजली, सूजन, गले में जलन या स्किन रैश शामिल हैं। अगर पहले कभी ड्राई फ्रूट से एलर्जी रही हो, तो अंजीर खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
पेट से जुड़ी समस्याएं
अंजीर में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। कब्ज में यह फायदेमंद है, लेकिन जिन लोगों को पहले से दस्त, गैस या पेट दर्द की शिकायत हो, उनके लिए अधिक मात्रा में अंजीर नुकसानदायक हो सकता है। इससे पेट फूलना या ऐंठन बढ़ सकती है।
किडनी स्टोन की समस्या
अंजीर में ऑक्सलेट्स पाए जाते हैं, जो किडनी स्टोन की समस्या को बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों को पहले से पथरी की शिकायत है, उन्हें अंजीर का सेवन सीमित रखना चाहिए।
ब्लड थिनर लेने वाले लोग
अगर आप खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, तो अंजीर का ज्यादा सेवन खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
(Disc।aimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी डॉक्टर/विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)
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(लेखक:कीर्ति)
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