Crime पर हमारी Zero Tolerance नीति, Ankita Case में बोले CM Dhami, Politics कर रही Congress
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासत तेज है। इस बीत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि पहले दिन से ही हमने इस मामले में हर संभव कोशिश की है और सभी जरूरी कानूनी कदम उठाए हैं। परिवार से बातचीत के बाद, जिसमें उनकी CBI जांच की मांग भी शामिल थी, हमने ऐसी जांच कराने के लिए आगे और प्रयास किए। हमारे स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी से की गई कार्रवाई के कारण ही हाई कोर्ट ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कानूनी प्रक्रिया चल रही है, और इस तरह के अपराध के लिए हमारी 'जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) की नीति है। यह साफ है कि कांग्रेस पार्टी के पास कोई ठोस मुद्दा या एजेंडा नहीं है, इसलिए वे बार-बार इस मामले का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।
इसे भी पढ़ें: CBI Investigation से पहले फैसला क्यों? Ankita Bhandari केस में बोले Rahul Gandhi- पीड़ितों की आवाज दबाती है सरकार
दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने को लेकर बृहस्पतिवार को सरकार पर निशाना साधा और कहा कि उनकी पार्टी पीड़ित परिवार के साथ तब तक खड़ी रहेगी, जब तक उसे न्याय नहीं मिल जाता। गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि कि सुबह चार बजे अंकिता भंडारी के माता-पिता को उस वक्त हिरासत में ले लिया गया, जब वे इंडिया गेट पर शांतिपूर्वक बैठे थे। ऋषिकेश के निकट वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट रही 19 वर्षीय अंकिता की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को अदालत ने दोषी ठहराया था और तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अंकिता के माता-पिता की मांग थी कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पूरी होने तक भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि वह और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा एक दिन पहले अंकिता के माता-पिता से मिले थे। गांधी ने आरोप लगाया कि जिस जांच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की और सवाल पूछने वाले मां-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया।
इसे भी पढ़ें: 'कायरता और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा', अंकिता भंडारी के माता-पिता की हिरासत पर भड़के मल्लिकार्जुन खरगे, केंद्र पर साधा निशाना
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने सरकार पर पीड़ितों की आवाज दबाने और सवाल उठाने वालों को हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी। कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी—जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।’’ पुलिस ने अंकिता के माता पिता और कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
1601 करोड़ के फंड डायवर्जन केस में Nayan Raheja को झटका, PMLA के तहत अग्रिम जमानत खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में रियल एस्टेट कारोबारी नयन एन. रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि वह 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) की दो शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं। इसके अलावा, बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश न होना, उनके पक्ष में नहीं जाता और इसी वजह से उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा नहीं दी जा सकती। जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि रहेजा कथित मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के दोषी नहीं हैं, या जमानत मिलने पर वे ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। कोर्ट ने कहा कि जांच अभी चल रही है और उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि अदालत के सामने दिए गए आश्वासनों के बावजूद, रहेजा जांच में सहयोग करने में विफल रहे। कोर्ट ने माना कि समन मिलने के बाद भी ED के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश न होने के लिए उन्होंने जो कारण बताए, वे उचित नहीं थे।
इसे भी पढ़ें: Pakistan में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर संकट, HRFP की REAT Helpline पर आईं 900 से अधिक कॉल
ईडी की ओर से वकील रजत नायर, सार्थक सहगल, देवाशीष दीक्षित, आलोक दुबे, आशीर्वाद और प्रियांशु पेश हुए। यह अग्रिम जमानत याचिका 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' की धारा 482 के तहत, PMLA की धारा 45 और 65 के साथ मिलाकर दायर की गई थी। यह मामला ED द्वारा मार्च 2022 में दर्ज की गई एक ECIR से जुड़ा है। इससे पहले, 19 सितंबर 2026 को सेशन कोर्ट ने रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने गौर किया कि ED ने अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच रहेजा को नौ समन भेजे थे। आदेश के अनुसार, रहेजा ने कुछ समन का जवाब देते हुए कहा कि वे शहर से बाहर हैं, या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने पाया कि अप्रैल 2026 में एक आईपैड (iPad) जब्त किए जाने के बाद से रहेजा ED के सामने पेश नहीं हुए हैं। ED के मुताबिक, उस डिवाइस में 'रहेजा डेवलपमेंट लिमिटेड' (RDL) के प्रोजेक्ट-वार विवरण थे, जिनमें लागत, खर्च और बिना बिके इन्वेंट्री की जानकारी शामिल थी। कोर्ट ने एक अलग रिट याचिका में रहेजा द्वारा दिए गए इस आश्वासन पर भी ध्यान दिया कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। कोर्ट ने पाया कि इस आश्वासन और सहयोग करने की उनकी इच्छा दर्ज करने वाले पिछले आदेश के बावजूद, अगस्त 2026 में भेजे गए समन के जवाब में वे पेश नहीं हुए।
इसे भी पढ़ें: Dhaka के Dhakeshwari Temple से लेकर गांवों तक, Bangladesh में Durga Puja का भव्य उल्लास
'अमानतुल्लाह खान बनाम प्रवर्तन निदेशालय' (ED) मामले में अपने पहले के फैसले का हवाला देते हुए, हाई कोर्ट ने दोहराया कि PMLA की धारा 50 के तहत समन किए गए व्यक्ति को खुद पेश होना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर नए तथ्य सामने आते हैं, तो जांच एजेंसी किसी व्यक्ति को दोबारा समन कर सकती है, भले ही वह पहले पेश हो चुका हो। कोर्ट ने रहेजा के इस तर्क को खारिज कर दिया कि ED, 'प्रेडिकेट ऑफेंस' (मूल अपराधों) से जुड़ी चार्जशीट में बताई गई रकम से ज्यादा की 'अपराध से प्राप्त रकम' (proceeds of crime) का हिसाब नहीं लगा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है और ED की जांच, 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (अनुसूचित अपराधों) की जांच से बिल्कुल अलग है। ED के अनुसार, घर खरीदारों से मिले फंड में से 1,601.63 करोड़ रुपये को दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया गया था। रहेजा ने इन आरोपों को गलत बताया और तर्क दिया कि RDL द्वारा इकट्ठा किए गए फंड का इस्तेमाल वैध कामों के लिए ही किया गया था।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









