1601 करोड़ के फंड डायवर्जन केस में Nayan Raheja को झटका, PMLA के तहत अग्रिम जमानत खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में रियल एस्टेट कारोबारी नयन एन. रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि वह 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) की दो शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं। इसके अलावा, बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश न होना, उनके पक्ष में नहीं जाता और इसी वजह से उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा नहीं दी जा सकती। जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि रहेजा कथित मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के दोषी नहीं हैं, या जमानत मिलने पर वे ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। कोर्ट ने कहा कि जांच अभी चल रही है और उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि अदालत के सामने दिए गए आश्वासनों के बावजूद, रहेजा जांच में सहयोग करने में विफल रहे। कोर्ट ने माना कि समन मिलने के बाद भी ED के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश न होने के लिए उन्होंने जो कारण बताए, वे उचित नहीं थे।
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ईडी की ओर से वकील रजत नायर, सार्थक सहगल, देवाशीष दीक्षित, आलोक दुबे, आशीर्वाद और प्रियांशु पेश हुए। यह अग्रिम जमानत याचिका 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' की धारा 482 के तहत, PMLA की धारा 45 और 65 के साथ मिलाकर दायर की गई थी। यह मामला ED द्वारा मार्च 2022 में दर्ज की गई एक ECIR से जुड़ा है। इससे पहले, 19 सितंबर 2026 को सेशन कोर्ट ने रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने गौर किया कि ED ने अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच रहेजा को नौ समन भेजे थे। आदेश के अनुसार, रहेजा ने कुछ समन का जवाब देते हुए कहा कि वे शहर से बाहर हैं, या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने पाया कि अप्रैल 2026 में एक आईपैड (iPad) जब्त किए जाने के बाद से रहेजा ED के सामने पेश नहीं हुए हैं। ED के मुताबिक, उस डिवाइस में 'रहेजा डेवलपमेंट लिमिटेड' (RDL) के प्रोजेक्ट-वार विवरण थे, जिनमें लागत, खर्च और बिना बिके इन्वेंट्री की जानकारी शामिल थी। कोर्ट ने एक अलग रिट याचिका में रहेजा द्वारा दिए गए इस आश्वासन पर भी ध्यान दिया कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। कोर्ट ने पाया कि इस आश्वासन और सहयोग करने की उनकी इच्छा दर्ज करने वाले पिछले आदेश के बावजूद, अगस्त 2026 में भेजे गए समन के जवाब में वे पेश नहीं हुए।
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'अमानतुल्लाह खान बनाम प्रवर्तन निदेशालय' (ED) मामले में अपने पहले के फैसले का हवाला देते हुए, हाई कोर्ट ने दोहराया कि PMLA की धारा 50 के तहत समन किए गए व्यक्ति को खुद पेश होना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर नए तथ्य सामने आते हैं, तो जांच एजेंसी किसी व्यक्ति को दोबारा समन कर सकती है, भले ही वह पहले पेश हो चुका हो। कोर्ट ने रहेजा के इस तर्क को खारिज कर दिया कि ED, 'प्रेडिकेट ऑफेंस' (मूल अपराधों) से जुड़ी चार्जशीट में बताई गई रकम से ज्यादा की 'अपराध से प्राप्त रकम' (proceeds of crime) का हिसाब नहीं लगा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है और ED की जांच, 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (अनुसूचित अपराधों) की जांच से बिल्कुल अलग है। ED के अनुसार, घर खरीदारों से मिले फंड में से 1,601.63 करोड़ रुपये को दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया गया था। रहेजा ने इन आरोपों को गलत बताया और तर्क दिया कि RDL द्वारा इकट्ठा किए गए फंड का इस्तेमाल वैध कामों के लिए ही किया गया था।
Indore से Pankaj Gupta गिरफ्तार, APK files बनाकर कराई 150 करोड़ रुपये की ठगी
डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी से बाल-बाल बचा 36 वर्षीय एक ग्राफिक डिजाइनर बाद में ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाला ऐसा सॉफ्टवेयर बनाने लगा जिसकी मदद से साइबर ठगों ने 9,600 से अधिक लोगों से 150 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले पंकज गुप्ता को मुंबई अपराध शाखा के संपत्ति प्रकोष्ठ ने गिरफ्तार किया है।
उस पर बिहार और झारखंड से संचालित साइबर अपराधियों के गिरोह को ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाला 2,805 एंड्रॉयड पैकेज किट (एपीके) फाइल बनाकर उपलब्ध कराने का आरोप है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, पांच साल पहले गुप्ता खुद डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी का शिकार होते-होते बचा था। इससे दूर रहने के बजाय उसने इसमें कमाई का अवसर देखा और ठगों से संपर्क कर उन्हें विशेष रूप से तैयार एपीके फाइल उपलब्ध कराने की पेशकश की।
ये फाइल लक्षित स्मार्टफोन पर नियंत्रण हासिल करने के लिए डिजिटल रिमोट कंट्रोल की तरह काम करती हैं। मामला तब सामने आया जब मुंबई के भायखला इलाके के एक वरिष्ठ नागरिक ने 13 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। अधिकारी ने बताया, पीड़ित को एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को एक राष्ट्रीयकृत बैंक का प्रतिनिधि बताया और वरिष्ठ नागरिक कार्ड योजना में सहायता देने की पेशकश की।
संदेश के जरिये भेजे गए एपीके लिंक पर क्लिक करने के बाद उनके खाते से पांच लाख 62 हजार रुपये धोखाधड़ी से निकाल लिए गए। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर मुंबई अपराध शाखा इंदौर में गुप्ता के ठिकाने तक पहुंची। गुप्ता द्वारा तैयार किए गए सॉफ्टवेयर की मदद से पीड़ितों से कुल मिलाकर करीब 150 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का पता चला।
अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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